सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

अंग्रेजों ने भारतीय साहित्य को कलुषित करने का प्रयास किया: बल्देव भाई शर्मा

बृजनन्दन-


अंग्रेजों ने भारत के साहित्य को कलुषित करने का प्रयास किया। इसलिए युवाओं को सही दिशा मिले और भारत के प्रति गौरव का भाव जगाने वाले साहित्य का सृजन होना चाहिए। यह बातें नेशनल बुक ट्रस्ट आॅफ इण्डिया के अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार बल्देव भाई शर्मा ने कही। वह रविवार को सरस्वती कुंज निरालानगर के माधव सभागार में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे।
बल्देव भाई शर्मा ने कहा कि भारत के मनीषियों ने जिस साहित्य का सृजन किया वह पूरे विश्व के लिए था। भारतीय साहित्य की संकल्पना व्यापक है। उन्होंने कहा कि साहित्य मनुष्यता का संस्कार देता है। साहित्य परिषद जिस भाव को लेकर चला आज उसका व्याप्त दिख रहा है। साहित्य बड़ा व्यापक शब्द है। जीवन को व्याप्त देना वाला जो कुछ भी है वह साहित्य है।
साहित्य के माध्यम से अंग्रेजों ने भारतीयों के मन में आत्महीनता का भाव जगाया।
उन्होंने कहा कि साहित्य मनुष्यता का संस्कार देता है। छात्रों को पाठ्यक्रमों से इतर साहित्य को भी पढ़ना चाहिए। क्योंकि पाठ्य पुस्तकों से इतर जो साहित्य है वह साहित्य मनुष्य बनाता है। आज लोग विश्वविद्यालयों से डिग्री लेकर डाक्टर,इंजीनियर,वकील तो बन रहे हैं लेकिन उनके अन्दर मनुष्यता का अभाव है। मनुष्यता का भाव घटने के कारण अपने दायित्व का निर्वाह वह ठीक से नहीं करता।
बल्देव भाई शर्मा ने कहा कि भारत के प्रति गौरव का भाव जगाने वाले साहित्य की रचना होनी चाहिए। आज साहित्य के नाम पर जो कुछ परोसा जा रहा है उसे ध्यान से समझने और परिष्कृत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत में ऐसे भी लेखक हुए हैं जिन्होंने लिखा है कि मैं अंग्रेजों का शुक्रगुजार हूँ कि उन्होंने भारत को एक देश के नाम पर रहना सिखाया। जबकि ऋग्वेद में हमारी ऋषियों ने बहुत पहले ही राष्ट्र की पूर्ण परिकल्पना की थी। हमारी संकल्पना है सर्वे भवन्तु सुखिनः। मनुष्यता की यह व्यापक दृष्टि है। धरती हमारी माता है हम इसके पुत्र हैं। जबकि जिस पाश्चात्य के पीछे हम भागते हैं उसमें जो ताकतवर है वही बचेगा। यह विकृत मानसिकता है।