पति के मामू ने किया बलात्कार, पीड़िता ने डीजीपी से की शिकायत

आवश्यकता है, एक ‘कबीर’ की ——–

विज्ञापक– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

कर्म–
० अराजक समाज के चेहरे पर लगे मुखौटे को नोच लेना।
० अपनी शब्दशक्ति के आधार पर धर्म-मज़हब के नाम पर पाखण्ड प्रदर्शित करनेवालों को जड़ से उखाड़ फेंकना।
कर्मक्षेत्र–
० यत्र-तत्र-सर्वत्र
योग्यता–
० अविवाहित हो अथवा घर-फूँक तमाशा देखने की सामर्थ्य रखता हो।
० मोह-माया के प्रपंच से सुदूर, स्वतन्त्र व्यक्तित्व-धारक और उन्मुक्तचेत्ता हो।
वेतन–
० क्रोध को पीना।
० अपमान को खाना-पचाना तथा उससे ऊर्जा ग्रहण कर कुपात्रों को लताड़ना।
० पदातिक पथ (फुटपाथ) पर शयन करना।
पुरस्कार—
० समाज से निष्कासन।
० कारावास का जीवन।
० ‘देशद्रोही शिखर सम्मान’
सम्पर्क-सूत्र— ९९१९०२३८७०

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १२ जुलाई, २०२० ईसवी)

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