ख़ुद को बदल रहा है वो

शिवांकित तिवारी “शिवा”,  युवा कवि एवं लेखक,        सतना (मध्यप्रदेश) संपर्क:-7509552096

आखिर अब खुद को बदल रहा है वो,

गिर  उठ  गिर  फिर  संभल रहा है वो ।

मौसम  का  मौसम  बिगड़ रहा है अब,

और कांटें भरें रास्तों पर चल रहा है वो ।

हिम्मत अब  उसकी और बढ़ती जा रही है,

खयालों से सवाल कर आजकल रहा है वो,

हवाओं  को  पकड़ने  में तुला  है  इस कदर,

कि जमीं के खिलौनों से अब बहल रहा है वो,

चांद और तारे अपनी तकलीफें बयां करते है उससे,

आसमां  में  खुद  का  बना  अब  महल  रहा  है वो,

तबीयत उसकी अब ठीक होती जा रही है,

सुबह  शाम  उठ   कर  टहल  रहा  है   वो,

इंसानों  के  भेष  में  यहां अब हवसी दरिंदे रहते है,

इन्हीं इंसानों की भीड़ से बच कर निकल रहा है वो ।

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