संजय सिंह, सांसद, आप ने पेयजल एवं स्वच्छता मिशन पर उठाए सवाल! | IV24 News | Lucknow

चिथड़ा-चिथड़ा मन

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

एक–
माना तू सरकार है, सीमा अपनी जान।
मत छेड़ तू हम सबको, खोयेगा तू मान।।
दो–
मन आन्दोलित है यहाँ, रोक सके तो रोक।
ज्वाला से मत खेल तू! बोल रहा है लोक।।
तीन–
जन-जन जागो देश के, करते हैं हम घोष।
जीना दूभर हो रहा, रिक्त हो रहा कोष।।
चार–
बदले की इस आग में, जलकर होगे ख़ाक।
कोशिश करके देख ले, नहीं बचेगी नाक।।
पाँच–
ख़ून खौलता आँख में, बहुत किया तू खेल।
बहुत बुरा अंजाम है, चाहें होगी जेल।।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २३ जनवरी, २०२१ ईसवी।)