सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

दिल्ली का कूड़ा

वीर विनोद छाबड़ा-


दिल्ली में आये दिन सफाई कर्मी हड़ताल पर रहते हैं। कई कई दिन कूड़ा सड़क पर फैला रहता है। चैनलों के ज़रिये बदबू पूरे मुल्क में फैलती है। हड़ताल का मुख्य मुद्दा कई कई महीने के वेतन नहीं मिलना होता है। दिल्ली की सफाई का ज़िम्मा दिल्ली नगर निगम का होता है। वेतन दिल्ली सरकार देती है। निगमों में बीजेपी का कब्ज़ा है और दिल्ली सरकार पर केजरीवाल की आप पार्टी का कब्ज़ा है। दिल्ली में एक और सरकार भी बैठती है जिसे मोदी सरकार कहा जाता है।
निगम प्रमुख कहते हैं कि दिल्ली सरकार पैसा नहीं देती है और दिल्ली सरकार के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया कल एक चैनल पर बता रहे थे कि ११९ करोड़ रिलीज़ कर दिया है। इस पूरे साल में ६०० करोड़ से अधिक दिया है। आज भी एक नगर प्रमुख कह रहे थे कि बैंक में पैसा नहीं पहुंचा। डिजिटल युग में तो पलक झपकते ही पैसा आ जाता है। लेकिन दिल्ली में एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस पैसा नहीं पहुंचता। है न हैरानी की बात। हमें एक बात समझ नहीं आती कि दिल्ली सरकार के उपमुख्यमंत्री और तीनों निगमों के प्रमुख आमने-सामने क्यों नहीं बैठ जाते? दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए। उप-राज्यपाल इसमें मध्यस्थ की भूमिका अदा कर सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं होगा। समस्या का हल कोई नहीं चाहता। इस साल दिल्ली निगमों के चुनाव हैं और फिर दिल्ली में कूड़ा हट जाए तो रायता फैलाऊ पसंद चैनल वालों को ‘न्यूज़’ देने में मज़ा भी तो नहीं आएगा।