कोथावाँ प्रा०वि० का हाल, बच्चों को दूध और फल नहीं दे रहे जिम्मेदार

देश के युवा साथियों के नाम एक कविता

सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ –लखनऊ-हरदोई राजमार्ग, टावर प्लाट, सुन्नी, हरदोई (उ॰प्र॰)


युवा साथियों जोश मे आओ, अपने देश की शान को |
विश्व गुरु भारत भूमि के, मिलके बढ़ाओ मान को ||

केवल अपने तक सीमित रहना, संस्कार बतलाए ना |
वह शरीर किस काम का जो, परहित काम में आए ना ||
यथा शक्ति सहयोग करो तुम, वासी देश उत्थान को |
युवा ………………………………………………………….||

जिस मिट्टी में जन्म लिया, उसका भी कुछ अधिकार है |
पानी अन्न जहाँ का पाया, ऋण उसका तुम पर भार है ||
कानून-नियम से रहना सीखो, रखो सुरक्षित जान को |
युवा ………………………………………………………….||

खान-पान-सम्मान चाहिए, हर मन की अरदास है |
पाता सब कोई बिरला ही, अभिलाषा यह खास है ||
‘परदेशी’ देश की चर्चा में, भरता मन की उड़ान को |
युवा ………………………………………………………….||