कोथावाँ प्रा०वि० का हाल, बच्चों को दूध और फल नहीं दे रहे जिम्मेदार

नोटा है भई नोटा है

शशांक कृष्ण मिश्रा-


देश का बेड़ा ग़र्क कर दिया
राजनीती के, आकाओ ने
भृष्टाचाऱ से लतपत होकर
राज किया है नेताओ ने
पांच साल में वोट की खातिर
एक बार ये आते है
वोट की खातिर जनता से
झूठा प्यार दिखाते है
वोट मिले तो मिल्खा सिंह सी
सरपट दौड़ लगाते है
जनता जिसको समझी सोना
वो सिक्का तो खोटा है
अबकी चुनाव में मेरा मत
नोटा है भई नोटा है

झूठे वादे और मलाई
इनने सबको खूब खिलाई
हर गली में इनके पिल्ले
जो भरते है इनसे गल्ले
भाई को भाई से लडवाते है
धर्म के नाम पे भड़काते है
वोट के बदले नोट की भाषा
ये सब तो है इनका झांसा
अब इनकी चाल में न आयेगे
अपने मुह की ये खायेगे
बाते इनकी बड़ी बड़ी पर
काम तो इनका छोटा है
अबकी चुनाव में मेरा मत
नोटा है भई नोटा है

रिश्वत खा गए, राशन खा गए
ये जनता का हक़ भी खा गए
इनका विकास तो इनके घर में
इनके लोंडे रहे टशन में
चुनाव आयोग ने दिया है मौका
रंग गुलावी ,दिया है नोटा
अब इनकी अक्ल लगाना है
वोट का मान निभाना है
गर कोई भी नेता न मन भावे
नोटा हमें दवाना है
जनता के अधिकारो को
अपने मत की ताकत को
गाकर हमें सुनना है
इनके वादे हुए है फेकू
ये जनता के असली डेंगू
इनको वोट दिया तो समझो
पांच साल फिर घाटा है
अबकी चुनाव में मेरा मत
नोटा है भई नोटा है ।।