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ये शताब्‍दी पूरी तरह टेक्‍नोलॉजी के प्रभाव की शताब्‍दी है : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 21वीं सदी प्रौद्योगिकी की सदी है और रेलवे की गति और प्रगति के लिए नई खोज आवश्‍यक है। वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए रेल विकास शिविर के उद्घाटन सत्र को सम्‍बोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि समय में बदलाव के साथ भारतीय रेल की व्‍यवस्‍था को भी बदलना होगा।

ये शताब्‍दी पूरी तरह टेक्‍नोलॉजी के प्रभाव की शताब्‍दी है। विश्‍व में बहुत प्रयोग हुए हैं, प्रयास हुए हैं। इनोवेशन्‍स हुए हैं। भारत ने बात समझनी होगी कि रेल ये भारत के लिए गति और प्रगति की एक बहुत बड़ी व्‍यवस्‍था है। देश को अगर गति चाहिए, तो भी रेल से मिलेगी, देश को प्रगति चाहिए तो भी रेल से मिलेगी।  प्रधानमंत्री ने कहा कि देश और रेल में काम कर रहे लोगों के फायदे के लिए रेल को विकसित करना होगा और इसे वित्‍तीय मजबूती प्रदान करनी होगी। रेलवे सामर्थ्‍यवान बनेगी तो अपने आप देश को लाभ होना ही होना है और इसलिए मेरे साथियों तत्‍कालीन लाभ लेने का कोई मोह नहीं है, राजनीतिक लाभ लेने का बिल्‍कुल मोह नहीं है। सिर्फ और सिर्फ शताब्‍दी बदल चुकी है, रेल भी बदलनी चाहिए। 21वीं सदी के अनुकूल हमें नई रेल, नई व्‍यवस्‍था, नई गति, नया सामर्थ्‍य, ये सब देना है और आप लोग मिल करके दे सकते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार के रेल बजट की प्राथमिकता कभी भी राजनीतिक नहीं रही है और इस क्षेत्र में बड़े परिवर्तन की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि रेल के साथ उनका बड़ा ही पुराना रिश्‍ता है और उनका बचपन रेलवे के प्‍लेटफॉर्मों पर बीता है। उन्‍होंने कहा कि यह भी एक बड़ा कारण है कि वे रेल में बदलाव चाहते हैं। गौरतलब है कि हरियाणा में सूरजकूंड में आज से तीन दिन का रेल शिविर हुआ। इसका उद्देश्य रेलवे की महत्वपूर्ण प्रगति के लिए रेल संचालन के सर्वाधिक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नए-नए विचारों को प्रोत्साहन देना है।