सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

राजनैतिक दृष्टि में कटियारी की तस्वीर

रिपोर्ट- बृजेश ‘कबीर’


2008 के परिसीमन में तत्कालीन मल्लावां और नवसृजित सवायजपुर विधानसभा में बंट गई बिलग्राम असेम्बली कॉन्सीट्वेंसी सीट पर आपातकाल के बाद 1977 से 2007 तक 40 बरसों में हुए 01 उपचुनाव सहित 11 चुनावों में मतदाताओं का मिजाज़ बदलता रहा। क्या कुछ रही कटियारी की तस्वीर, रपट देखें।

1977 में जनता पार्टी से लड़े शारदा भक्त सिंह 49.6% मत लेकर विधानसभा पहुंचे। कांग्रेस के हरिशंकर तिवारी 40.48% वोट लेकर रनर रहे थे। 1980 का चुनाव कांग्रेस के हरिशंकर तिवारी 48.16% मत लेकर जीते और जनता पार्टी (सोशलिस्ट) के विश्राम सिंह यादव 39.46% वोट के साथ रनर रहे थे। 1985 में कांग्रेस के हरिशंकर 36.76% मत लेकर लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। इस चुनाव में लोकदल की शान्ति देवी 27.8% वोट पाकर रनर रहीं थीं। 1989 में भारतीय जनता पार्टी के गंगाभक्त सिंह 36.89% वोट के साथ विधानसभा पहुंच गए। जनता दल से लड़े विश्राम सिंह यादव 27.69% मत लेकर रनर रहे। 1991 में भाजपा के गंगाभक्त सिंह लगातार दोबारा चुने गए। उन्हें 22.93% और रनर रहे जनता पार्टी के विश्राम सिंह यादव को 21.65% वोट मिले थे। 1993 में समाजवादी पार्टी से मैदान में उतरे विश्राम सिंह यादव की साध पूरी हुई और वह 42.7% मत हासिल कर जीते। भाजपा के गंगा सिंह चौहान 32.62% वोट पाकर रनर रहे।

1996 में भाजपा के गंगा सिंह चौहान 33.32% मत लेकर विधानसभा पहुंचने में सफल हुए। रनर कांग्रेस के ओम नारायण त्रिवेदी ‘नन्हे’ को 30.79% वोट मिले थे। 2002 में सपा के विश्राम सिंह यादव 28.58% मत पाकर दूसरी बार जीते। भाजपा के गंगा सिंह चौहान 18.31% वोट पाकर रनर रहे। 2007 में उपेन्द्र तिवारी ‘पम्मी’ ने पहली बार सीट बसपा की झोली में डाल दी। उन्हें 43.5% और रनर रहे सपा के विश्राम सिंह यादव को 34.71% वोट मिले थे। हालांकि, उपेन्द्र का असमय देहावसान होने से 2008 में हुए उपचुनाव में बसपा ने उनकी पत्नी रजनी तिवारी को उम्मीदवार बनाया। सहानुभूति लहर और सत्ता के प्रभाव के बीच रजनी ने 38,186 वोट हासिल कर सपा के विश्राम सिंह यादव को हराया था। इसके बाद परिसीमन में बिलग्राम व साण्डी ब्लॉक के कुछ हिस्से और शाहाबाद विधानसभा सीट से अलग कर भरखनी ब्लॉक और पाली नगर पंचायत को मिलाकर सवायजपुर विधानसभा क्षेत्र का गठन किया गया।

2012 में नवसृजित सवायजपुर विधानसभा क्षेत्र में रोमांचक चुनावी चौसर बिछी। सपा नेतृत्व ने विश्राम सिंह यादव के परम्परागत क्षेत्र से उनके सियासी वारिस तत्कालीन सपा जिलाध्यक्ष पद्मराग सिंह यादव ‘पम्मू’ का दावा ख़ारिज कर तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव डॉ0 अशोक बाजपेयी को टिकट दे दिया। नाराज़ पम्मू सपा छोड़ कल्याण सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन राष्ट्रीय क्रान्ति पार्टी के सिम्बल पर मैदान में उतर गए। हालांकि, 49,099 (23.31%) वोट पाकर चुनाव ज़रूर बसपा की रजनी तिवारी ने जीता, लेकिन 44,580 (21.97%) मत हासिल कर पम्मू ने सपा नेतृत्व को उसकी भूल का अहसास दमदारी से कराया। इस चुनाव में भाजपा के माधवेन्द्र प्रताप सिंह ‘रानू’ 37,604 (17.86%) वोट लेकर सैकेण्ड रनर रहे। सपा की लहर के बीच डॉ बाजपेयी 34,954 मत लेकर चौथे पायदान पर खिसक गए थे। 2017 के लिए सवायजपुर से सपा ने अबकी पम्मू और बसपा ने फर्रूखाबाद के डॉ0 अनुपम दुबे को प्रत्याशी बनाया है। सिटिंग विधायक रजनी तिवारी बसपा छोड़ भाजपा ज्वॉइन कर चुकी हैं। अभी भाजपा और कांग्रेस के पत्ते खुलने बाकी हैं।