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लड़कियों में बाल विवाह के खिलाफ जो आक्रोश है वही बाल विवाह से मुक्ति में सहायक है

पश्चिम चंपारण जिले की बेटियों ने बाल विवाह की कुप्रथा को रोकने की खास पहल की है। हर पंचायत से दस लड़कियों की सुकन्या टीम बनायी गयी है जो हर गली-मुहल्ले पर नजर रखती है और बाल विवाह के अपराध की भनक पाते ही उसे रुकवाने के लिए जी जान से जुट जाते हैंं।
अब तक दर्जनों बेटियों ने इसी आधार पर शादी से इंकार कर दिया है। जिले में इस मुहिम की अगुवा बनी हैं समाजसेवी लक्ष्मी खत्री जिन्होंने पांच लड़कियों का समूह बनाकर इसकी शुरुआत की थी। चंपारण की धरती बदलाव की धरती रही है और अब इस नए बदलाव ने आंदोलन का रूप ले लिया है। इस जिले के एक बड़े भू-भाग में थारु और ऊरांव जनजाति के लोग रहते हैं। जहां हर साल सैकड़ों बाल विवाह हुआ करते थे। लेकिन सुकन्या टीम की हुंकार के आगे सब बंद हो गया।  दरअसल इस क्षेत्र की लड़कियों में बाल विवाह के खिलाफ जो आक्रोश है वही बाल विवाह से मुक्ति में सहायक हो रहा है। चंपारण की बेटियां बाल विवाह के खिलाफ सुकन्या टीम बनाकर समाज को एक आईना दिखाने का काम कर रही हैं। यह आईना महिला सशक्तिकरण की तस्वीर है।