सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

लड़ाका भील पुरखा पुनिया

आशीष सागर-


झाबुआ, अलीराजपुर (मध्य प्रदेश) के इलाके में 50 के दशक में भीलों का एक बड़ा आंदोलन हुआ. इस आंदोलन की अगुआई पुनिया भीमा नामक भील लड़ाके ने की थी. पुनिया बाबा के नाम से विख्यात इस आंदोलनकारी ने जं्रगल-जमीन की जोरदार लड़ाई लड़ी और हजारों एकड़ जंगल – forest को बचाया. इस आंदोलन के दौरान साहसी पुनिया ने जंगल के एक ठेकेदार को मार डाला था. जिसके लिए उन्हें 10 साल की सजा हुई. जेल से निकलने के बाद वे फिर से 80 के दशक में सक्रिय हुए और ‘खेड़ुत मजदूर चेतना संघ’ से जुड़कर लड़ाई के दूसरे दौर को नेतृत्व दिया. नर्मदा बांध के खिलाफ चले संघर्ष में भी पुनिया बाबा हमेशा संघर्ष की अग्रिम पंक्ति में रहे. 90 के दशक में उन पर कई झूठे केस लादे गए, उनकी गिरफ्तारी हुई.

लड़ाका भील पुरखा पुनिया बाबा अब जीवित हैं या नहीं इस बारे में जानकारी नहीं है. उस इलाके के साथियो पर यह जिम्मेवारी है कि उनकी पूरी जीवनी और उनके नेतृत्व में हुए संघर्ष की कहानी को सामने लाएं