सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

विपक्षी दलों ने आज निर्वाचन आयोग से मुलाकात की और मांग की कि आठ मार्च के बाद बजट पेश किया जाना चाहिए

पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही आम बजट पर घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस, जनता दल यूनाईटेड और तृणमूल कांग्रेस सहित आठ विपक्षी दलों ने आज निर्वाचन आयोग से मुलाकात की और मांग की कि आठ मार्च के बाद बजट पेश किया जाना चाहिए क्‍योंकि इस दिन चुनाव वाले राज्‍यों में मतदान का अंतिम दिन होगा। नई दिल्‍ली में कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि बजट में आम लोगों के फायदे के उपाय किए जाते हैं। ऐसी स्‍थिति में अगर प्रस्‍तावित तिथि में बजट पेश किया जाता है तो स्‍वतंत्र और निष्‍पक्ष चुनाव सुनिश्‍चित नहीं हो पायेगा। श्री आजाद ने कहा कि विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग से कहा है कि बजट को भारतीय जनता पार्टी चुनाव वाले राज्‍यों में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए इस्‍तेमाल कर सकती है। विपक्ष आम बजट को चुनाव बाद पेश करने की मांग कर रहा है। विपक्ष की इस मांग का केंद्र में एनडीए की सहयोगी शिवसेना का भी समर्थन हासिल   है। गुरुवार को आम बजट को टलवाने के लिए कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, जेडीयू, आरएलडी के नेता चुनाव आयोग पहुंचे। दूसरी तरफ सरकार ने बजट टालने की किसी भी संभावना से इनकार किया है।

इससे पहले, विपक्षी दल, राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर अनुरोध कर चुके हैं कि पहली फरवरी को बजट पेश करने के प्रस्‍ताव को स्‍थगित किया जाए। इन दलों का दावा है कि  उत्‍तरप्रदेश सहित चुनाव वाले सभी पांचों राज्‍यों में इससे  मतदान प्रभावित होगा। इस बीच, संसदीय राज्‍यमंत्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने कहा है कि बजट की तिथि के बदले जाने की कोई संभावना नहीं है और बजट पहली फरवरी को ही पेश किया जायेगा। चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद प्रतिनिधिमंडल की अगुआई कर रहे कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, हमने चुनाव आयोग से मांग की है कि 1 फरवरी को बजट पेश करने पर रोक लगाई जाए। यदि सरकार 31 जनवरी से संसद सत्र बुलाती है तो हमें इस पर ऐतराज नहीं है, लेकिन बजट 8 मार्च के बाद ही पेश किया जाए ताकि सरकार को मतदाताओं को लुभाने का कोई मौका ना मिले सके । आजाद के मुताबिक, चुनाव आयोग ने उनकी बात को ध्यान से सुना और विचार करने का भरोसा दिया। उनके के मुताबिक, यदि चुनाव आयोग विपक्ष की मांग को नहीं मानता तो चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे। इस बीच केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि बजट को टालने की कोई गुंजाइश नहीं है। इसे 1 फरवरी को ही पेश किया जाएगा। बीजेपी के विरोधी दलों ने 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करने की योजना पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसके माध्यम से लुभावनी घोषणाएं कर बीजेपी मतदाताओं को लुभा सकती है। चुनाव आयोग ने कहा है कि 1 फरवरी को बजट पेश करने की योजना के खिलाफ राजनीतिक दलों द्वारा की गई दरख्वास्त पर वह विचार करेगा। इस बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस कदम का बचाव करते हुए सवाल किया कि अगर राजनीतिक दल दावा करते हैं कि नोटबंदी एक अलोकप्रिय फैसला है तो उन्हें बजट से डर क्यों होना चाहिए।