डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला ◆ विषय : वर्णमाला

भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

★ हिन्दी-वर्णमाला की कुल संख्या
★ वर्णमाला के अन्तर्गत वर्णों की कुल संख्या

‘हिन्दी-वर्णमाला’ में वर्णों की कुल कितनी संख्या है? इस प्रश्न का विस्तृत और विशद उत्तर लिखते हुए, विद्यार्थियों, यहाँ तक कि अधिकतर अध्यापकों के भी पसीने छूटने लगते हैं। इसके चार मुख्य कारण हैं :– प्रथम, अपात्रों-द्वारा पुस्तकलेखन और प्रकाशन; द्वितीय, शिक्षा का बाज़ारीकरण; तृतीय, अधिकतर कुपात्रों की नियुक्ति; चतुर्थ, दोनों में ‘जिज्ञासा का न होना’ और ‘सीखने की इच्छा का मृतप्राय हो जाना’। यही कारण है कि विकृतिपूर्ण अध्ययन-अध्यापनपद्धति ने ‘वर्णमाला’ में वर्णों की संख्या को ‘पहेली’ का रूप दे दिया है, जिसे शिक्षक बुझा रहे हैं और शिक्षार्थी बूझ रहे हैं। इस प्रकार दोनों ही अपनी स्वाभाविक ग्रहणशीलता के आधार पर ग्रहण करते आ रहे हैं। यही कारण है कि पहेली अब भी ‘पहेली’ बनी हुई है।

‘भाषा की पाठशाला’ में अब उस पहेली का अस्तित्व समाप्त कर, यहाँ ‘हिन्दी-वर्णमाला’ के अन्तर्गत वर्णों की उपयुक्त संख्या दी गयी है। विद्यार्थी और अध्यापकवृन्द इसे भक्ति और श्रद्धाभावपूर्वक ग्रहण करें; क्योंकि भक्ति और श्रद्धा तर्कातीत होती है।

हमने एक ऐसे नेपथ्य से हिन्दीवर्णमाला को समक्ष लाया है, जो शताब्दियों से संशयपूर्ण अवस्था में जीती आ रही थी। अब वह अपने सम्पूर्ण अस्तित्व में आवरणराहित्य रूप में सदैव संलक्षित होती रहेगी; आइए! परिशीलन करें :–
★ हिन्दी-वर्णमाला की कुल संख्या– एक (१)
★ हिन्दीवर्णमाला के अन्तर्गत वर्णों की कुल संख्या– बावन (५२)
स्वर– ग्यारह (११)– (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ)
व्यंजन– पच्चीस (२५)– (‘क-वर्ग’ से ‘प-वर्ग’ तक)
अन्त:स्थ व्यंजन–चार (४)– (य् र् ल् व्)
उष्म व्यंजन– चार (४)– (श् ष् स् ह्)
संयुक्त व्यंजन– चार (४)– (क्ष् त्र् ज्ञ् श्र्)
द्विगुण व्यंजन– दो (२)– (ड़् ढ़्)
अयोगवाह– दो (२)– (अनुस्वार और विसर्ग)

कुल योग– बावन (५२)

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ११ फ़रवरी, २०२० ईसवी)

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