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साहित्य संगम संस्थान : संक्षिप्त परिचय (इलेक्ट्रॉनिक हिंदी साहित्य का महाभियान)

राजवीर सिंह मन्त्र

साहित्य संगम संस्थान स्वयंसेवी साहित्यिक संगठन है । इसमें विविध पृष्ठभूमि के लोग माँ भारती की सेवा में अपने विविध कौशलों से इसे अक्षय ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं । इसकी स्थापना ५ जुलाई २०१६ को पश्चिम मध्य रेलवे के सतर्कता निरीक्षक डॉ अरुण श्रीवास्तव समर्थगुरु की सत्प्रेरणा से १४ मंथनरत्नों के द्वारा हुई थी । संस्थान का प्रांतीय पंजीकरण इलाहाबाद उत्तर प्रदेश से २०१६ में कराया गया, राष्ट्रीय पंजीकरण सन २०१७ में ही दिल्ली से हो चुका है । संस्थान के महासचिव कविराज तरुण सहायक प्रबंधक यूको बैंक लखनऊ ने अपनी सूझबूझ और सौंदर्य दृष्टि से संस्थान को न केवल संस्थापित करके अपितु इसे सजा-धजाकर साहित्यक्रांति को जन्म दिया है । संस्थान से पाँच ई पत्रिकाएँ सवेरा, आह्लाद, अविचल प्रभा, छंदेष्टि, ‘गज़ल-गुञ्जन’ प्रतिमाह प्रकाशित होती हैं ।

संस्थान अब तक लगभग (साझा एकल) ६५ पुस्तकें प्रकाशित कर चुका है । अब तक कई बड़े मंचीय महोत्सव दिल्ली, इंदौर, लखनऊ और चक्रधरपुर में आयोजित हो चुके हैं । इसका अस्तित्व वेबसाइट, व्हाट्स ऐप, फेशबुक ट्विटर, यूट्यूब सहित दिल्ली मुख्यालय और नौ राज्यों में है । संस्थान से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग एक लाख लोग जुड़े हैं ।

संस्थान ने इस लघु अंतराल में लगभग ७,००० सम्मानपत्र जारी किए हैं । संस्थान की गद्य-पद्य, छंद-गज़ल- व्याकरण-साहित्यालंकरण सिखाने की ऑनलाइन पाठशालाएँ चलती हैं । संस्थान का अपना ऐप है जिसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सदुपयोग जा सकता है । यह ऐप संस्थान के उपाध्यक्ष आ०प्रदीप कुमार पाण्डेय दीप जी ग़ज़लशाला अधीक्षक सह उपाध्यक्ष महोदय ने अपने तकनीकि ज्ञान से बनाया है । इसकी पूरी की पूरी विधि व्यवस्था लोकतांत्रिक मानकों पर आधारित है । अर्थात् जो जितना योगदान देगा वह उतना ही बड़ा पदाधिकारी बन सकता है, असहयोग और असक्रियता की स्थिति में सक्रिय सदस्यों को अवसर दिया जाता है ।

संस्थान की साझा पुस्तक छंदकलश का विमोचन माननीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह जी के करकमलों संसद भवन में हुआ ।

मुख्यमंत्री माननीय आदित्यनाथ योगी जी ने संस्थान के कार्यों से प्रभावित होकर सचिव महोदय से साहित्यिक परचर्चा की थी । संस्थान को वरिष्ठ साहित्यकार डॉ श्रीनिवास शुक्ल सरस का आशीर्वाद प्राप्त है । पूर्व जिला न्यायाधीशा डॉ मीना भट्ट जी अध्यक्षा लोकायुक्त जबलपुर म०प्र० संस्थान की विधिक सलाहकारा हैं । पूर्व आईपीएस अधिकारी आ०प्रशांत करण जी संस्थान के संयुक्त सचिव हैं । देश के प्रतिष्ठित व्यवसायी, आर्य सिद्धान्तों के सुपोषक, कवि सभा- राष्ट्रीय संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष आ०रामावतार बिंजराजका निश्छल जी का संस्थान को विशेष आशीष और आश्रय प्राप्त है । संस्थान के संरक्षक आचार्य भानुप्रताप वेदालंकार अध्यक्ष आर्य युवक परिषद् म०प्र० के आशीर्वाद से प्रकाशन का संपूर्ण कार्य संपादित होता है ।

संस्थान के कवि और कवयित्रियाँ लखनऊ दूरदर्शन सहित ऑल इंडिया रेडियो में काव्य प्रस्तुति दे चुके हैं । इसके प्रमुख पदाधिकारियों में आ०छाया सक्सेना प्रभु कोषाध्यक्षा, आ०मयंक वैद्य कुशल अलंकरण सचिव, अनुजा दीपाली पाण्डेय अलंकरण अधीक्षिका, आ०प्रदीप कुमार पाण्डेय दीप ग़ज़ल-गुरु सह उपाध्यक्ष, आ०बिजेंद्र सिंह सरल छंदशाला अधीक्षक-समीक्षक-परीक्षक, आ०आशीष पाण्डेय जिद्दी अनुशासन प्रमुख सह कोषाध्यक्ष, आ०कैलाश मंडलोई पंचपरमेश्वर अधीक्षक सह साहित्यालंकरण के जादूगर, आ०किसनलाल अग्रवाल उपाध्यक्ष, आ०राजलक्ष्मी शिवहरे दी आधुनिक उपन्यास सम्राज्ञी, आ०अरुण सिंह प्रसार सचिव, आ०कुमार रोहित-आ०मृदुल तिवारी महक दैनिक कार्यक्रम अधीक्षक, आ०सुचि संदीप दी संचालिका संगम सुवास नारी मंच, आ०तेजराम नायक छंदशाला संचालक, आ०चंद्रपाल सिंह संपादक, आ०इंदु शर्मा प्रवेशाधीक्षिका, आ०राजेश पुरोहित राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी, आ०अर्चना राय फेसबुक नारी मंच अधीक्षिका, आ०कुमुद श्रीवास्तव अलंकरणशाला संरक्षिका, आ०महालक्ष्मी सक्सेना मेधा दी दैनिक कार्यक्रम प्रसारिका, अनुजा सना परवीन दैनिक कार्यक्रम निर्माता, आ०छगनलाल गर्ग सृजनाधीक्षक, आ०हीरालाल यादव गज़लशाला गुरु और तमाम साहित्यसेवी साहित्यकार विविध विभागों-अनुभागों की देखरेख करते हैं । संस्थान में विदेश से भी साहित्यकार और कवि सृजन करते हैं । विशेषतः यह है कि ये समस्त पदाधिकारी और साहित्यकार नौकरीपेशा हैं ।

इस प्रकार जो राष्ट्रवादी हिंदी भक्त साहित्येष्टि के इस यज्ञ में निस्वार्थ भाव से अपने योगदान की आहुति प्रदान करना चाहता है उसका संस्थान स्वागत करता है ।
साहित्य संगम संस्थान की भारत वर्ष के नौ प्रदेशों में प्रांतीय शाखाएँ स्थापित हो चुकी हैं ।

असम -कार्यकारिणी का गठन और मासिक गोष्ठियाँ आरंभ हो चुकी हैं – संयोजिका आ०सुचि संदीप दी ।

झारखंड – कार्यकारिणी का गठन और भव्य काव्य सम्मेलन आयोजित हो चुका है । १९ अगस्त २०१८ को स्थापना दिवस पर संगम सक्रिय पदाधिकारियों/सदस्यों को सम्मानित किया गया । ९ दिसंबर को नवसृजन साहित्य संगम समागम दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम आयोजित हुआ । जिसमें देश के लगभग १० प्रांतों से कवि और साहित्यकार सम्मानित हुए और डं अनामिका अंबर के साथ काव्यपाठ भी किया ।
उत्तर प्रदेश – कार्यकारिणी का गठन हो चुका है । लखनऊ समागम-भव्य काव्य सम्मेलन सहित विशाल गोष्ठी का आयोजन हो चुका है । जिसमें सांसद माननीय कौशल किशोर जी सहित राज्य मंत्री श्रीमती स्वाती सिंह ने शिरकत की थी ।

म०प्र०- काव्यगोष्ठी का आयोजन हो चुका है । साहित्य संघ का भव्य काव्य सम्मेलन आयोजित हो चुका है । संयोजिका आ०छाया सक्सेना प्रभु दी ।

राजस्थान – मासिक काव्यगोष्ठी का आयोजन हो चुका है । संयोजिका – सुनीता विश्नोलिया दी ।

साहित्यक्रांति के महाभियान में संस्थान के युवा अध्यक्ष का देश के प्रत्येक युवा-युवती और साहित्यकार/कवयित्रियों का आह्वान है –
विधा नहीं विकास चाहिए,
सबका ही विश्वास चाहिए ।
‘अयं निजः’ का भाव नही है,
संधि नहीं समास चाहिए ।।

सबका प्रयास । सबका विश्वास । सबका विकास ।

राजेश कुमार शर्मा पुरोहित द्वारा संकलित

(राजवीर सिंह मन्त्र, साहित्य संगम संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष की लेखनी से)