कोथावाँ प्रा०वि० का हाल, बच्चों को दूध और फल नहीं दे रहे जिम्मेदार

ससुरालियों से न्याय पाने के लिए दर-दर भटक रही विवाहिता, जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक लगा चुकी है गुहार

बघौली थाना क्षेत्रांतर्गत ग्रामसभा करीमनगर सैदापुर मजरा मसीत निवासिनी प्रीति शर्मा पुत्री सियाराम शर्मा ने अधिकारियों पर समुचित कार्रवाई करने का आरोप लगाया है । उसका कहना है कि वह जिले से लेकर लखनऊ तक के अधिकारियों के दर पर लगभग आठ महीनों से माथा रगड़ रही है लेकिन उसे कहीं न्याय नहीं मिला । पीड़िता को न्याय दिलाने की बात तो दूर कोई भी अधिकारी उसकी बात तक सुनने के लिए तैयार नहीं है ।

पीड़िता ने बताया कि उसकी शादी 17 फरवरी 2018 को देहात कोतवाली के अंतर्गत गांव कौढ़ा निवासी रघुवेद शर्मा पुत्र राम अवतार शर्मा के साथ हुई थी। उसने बताया कि उसके पिता द्वारा दहेज में सभी वस्तुएं चेन, फ्रिज़ कूलर व अन्य सामान दिया गया था । लेकिन शादी के तीन महीने बीत जाने के बाद ससुरालीजन उसे उसके पिता की जायदाद में हिस्सा मांगने के लिए मजबूर करने लगे । जब पीड़िता के परिजन उनकी मांगे पूरी नहीं कर पाए तो उन्होंने उसे प्रताड़ित करके घर से निकाल दिया । पीड़िता ने बताया कि उसके ससुरालीजन उसके पिता की जायदाद का आधा हिस्सा मांग रहे थे । लेकिन पीड़िता के मायके वाले अपनी मजबूरियों का हवाला देते हुए उनको अपनी जायदाद में हिस्सा देने के लिए तैयार नहीं हुए ।

पीड़िता के परिजनों का कहना है कि उन्हें अभी एक छोटी बेटी की भी शादी करनी है । उसकी शादी हो जाने के बाद यह लोग अपनी संपत्ति में दोनों बेटियों को आधा-आधा हिस्सा दे देंगे । लेकिन पीड़िता के ससुरालीजन यह बात मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है ।

घर से निकाले जाने के बाद पीड़िता ने एक बच्ची को जन्म दिया जिसकी अस्पताल में ही मौत हो गई । पीड़िता ने बताया कि वह लगभग आठ महीने से जिले से लेकर लखनऊ तक के सभी अधिकारियों के पास न्याय के लिए गुहार लगाती फिर रही है । पीड़िता ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, महिला थाना, आशा ज्योति केंद्र और महिला हेल्पलाइन आदि पर शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई । इसके बाद पीड़िता ने लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर अपने लिए न्याय की गुहार लगाई लेकिन वहां भी उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई । जिससे पीड़िता को अपना भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है, जबकि सरकार द्वारा बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं । अधिकारी सरकारी नियम और कानून को ताक पर रखकर उनके आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं ।

पीड़िता का कहना है कि वह अपने ससुरालीजनों के साथ रहना चाहती है लेकिन ससुराल वाले उसे अपने साथ नहीं रखना चाहते हैं । जिसका मुख्य कारण पीड़िता के पिता द्वारा अपनी संपत्ति में हिस्सा न देना है । पीड़िता के कोई भाई नहीं है सिर्फ एक छोटी बहन है, जिसकी अभी शादी नहीं हुई है । पीड़िता का पति शाहजहांपुर में किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है जिससे वह पीड़िता को अपने मां-बाप के पास ही गांव पर रहने के लिए मजबूर करता था । पति की गैरमौजूदगी में पीड़िता के सास ससुर पीड़िता पर अपने पिता से आधी संपत्ति को उनके नाम करने के लिए दबाव बनाते रहते थे । लेकिन जब पीड़िता के परिजनों ने आधी संपत्ति देने से मना कर दिया तो उसके ससुराली जनों ने उसे और भी प्रताड़ित करना शुरू कर दिया । जिसकी सूचना पीड़िता ने अपने पिता सियाराम को दी । मामले की सूचना पाकर सियाराम अपने ग्राम प्रधान रईस अहमद को लेकर अपनी पुत्री की ससुराल पहुंचे लेकिन वहां लाख मिन्नतें करने के बाद भी ससुरालीजनों का दिल नहीं पसीजा । तब सियाराम अपनी पुत्री को अपने साथ अपने गांव ले आए ।

अब देखने वाली बात यह है क्या पीड़िता को कभी इंसाफ मिल पाएगा या पीड़िता इसी तरह दर-दर की ठोकरें खाती रहेगी ?

रिपोर्ट : राहुल मिश्र