साधारण परिवार के उपेन्द्र यादव ने यू.पी.एस.आई पद पर चयनित होकर परिवार का नाम किया रोशन

उपेन्द्र यादव

कौन कहता है आसमाँ में छेद नहीं होता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों ।

दुष्यन्त कुमार की इन पँक्तियों को सच कर दिखाया है उपेन्द्र यादव ने । बताते चलें कि सीतापुर जनपद के ब्लाक एलिया में एक अति पिछड़ा गाँव है निबहरी । गाँव के एक अति साधारण परिवार के बेटे ने मुफ़लिसी की बेड़ी को तोड़ते हुए कामयाबी की एक नई इबारत लिखी है । हो सकता है कि आपको पुलिस उप निरीक्षक की परीक्षा बहुत बड़ी न दिखती हो लेकिन उपेन्द्र की परिस्थितियों को देखते हुए यह उपलब्धि असामान्य बन जाती है ।

उपेन्द्र यादव के पिता ओंकार यादव साधारण किसान हैं, जो बमुश्किल परिवार का पेट पालते रहे हैं । कभी-कभी परिवार के सामने रोजमर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने का संकट भी आता रहा है । प्राथमिक शिक्षा गाँव से पूरी करने के बाद सीतापुर के सरकारी स्कूल राजा रघुवर दयाल इण्टर कॉलेज से इण्टरमीडिएट की पढ़ायी पूरी की । तत्पश्चात राजकीय महाविद्यालय सीतापुर से गणित-विज्ञान में स्नातक की उपाधि ली ।

श्री यादव का यह सफ़र बेहद चुनौतियों भरा रहा है । आप तो जानते ही हैं कि स्नातक या परास्नातक के उपरान्त सीधे नौकरी मिलना आज के समय में सम्भव नही हैं । ऐसे में उपेन्द्र ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए लखनऊ का रुख़ किया । लखनऊ आकर एक बार तो उपेन्द्र को ऐसा लगा कि उसने ग़लती कर दी है क्योंकि यहाँ का रहने और खाने की व्यवस्था कर पाना उसके लिए असम्भव सा होने लगा था । ऐसे में उसके कुछ मित्र उसके सहयोग के लिए आगे आए और उसे कुछ बच्चों को ट्यूशन देने का काम दिला दिया । मेधावी उपेन्द्र को मानो पंख लग गए और वह पूरी लगन से पढायी में जुट गया । असफलताओं से जूझते हुए आखिरकार उसने पहली मंज़िल को पा लिया । वर्ष 2017 की यूपीएसआई परीक्षा में सफलता पाकर उसने परिवार के सपने को पूरा किया है । उपेन्द्र उन प्रतियोगियों के लिए नज़ीर है जो परिस्थितियों का रोना रोकर पढ़ायी बीच में ही छोड़ देते हैं । घर-परिवार के साथ ही साथ पड़ोसी और इष्ट-मित्र उपेन्द्र यादव की इस कामयाबी से अति प्रसन्न हैं । खास बात यह है कि वह अपनी नाते-रिश्तेदारी में पहले सरकारी अधिकारी हैं ।

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