अन्तत:, आइ० आइ० टी०-बी० एच० यू०-छात्रा के बलात्कारी गिरिफ़्तार किये गये!..?


निश्चित रूप से उत्तरप्रदेश का आपराधिक आँकड़ा प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। हम इसे पुलिस-प्रशासन की इच्छाशक्ति का अभाव कहें वा सत्तात्मक दबाव कहें, साफ़-साफ़ दोनो का मिला-जुला प्रभाव दिख रहा है।

इसे हम विगत ३१ दिसम्बर को गिरिफ़्तार किये गये सत्तात्मक संरक्षण प्राप्त तीन बलात्कारियों के संदर्भ मे देख-समझ सकते हैं। यदि उन पर सत्ताधारी दल के दिग्गजों का वरद्हस्त नहीं रहता तो वे कब के गिरिफ़्तार किये जा चुके रहते। आरोपी छात्रा की एफ० आइ० आर० तक दर्ज़ नहीं की गयी थी, बल्कि उस पीड़िता के शिकायती पत्र पर २ नवम्बर को दिन मे लंका-थाने मे तीन अज्ञात आरोपितों के विरुद्ध छेड़ख़ानी, धमकाने तथा आइ० टी० एक्ट अन्तर्गत शिकायत दर्ज़ की गयी थी। उस छात्रा ने विवेचक और मजिस्ट्रेट के सामने कहा था कि तीनो आरोपितों ने उसके ‘प्राइवेट पार्ट’ के साथ छेड़ख़ानी की थी; उसे बलपूर्वक निवस्त्र कर वीडियो बनाये थे तथा उस वीडियो को सोसल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफ़ॉर्म पर अपलोड करने की धमकी दी थी। इसी के आधार पर दर्ज़ शिकायत मे सामूहिक दुष्कर्म तथा इलेक्ट्रॉनिक साधनो से यौन-उत्पीड़न की धारा जोड़ी गयी थी; परन्तु अफ़्सोस!

भारतीय जनता पार्टी की आइ० टी० सेल, वाराणसी के जिन तीन पदाधिकारियों ने विगत १ नवम्बर को विलम्ब रात्रि मे १ बजकर ३० मिनट पर आइ० आइ० टी०, बनारस हिन्दू युनिवर्सिटी मे आइ० आइ० टी० की छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किये थे, उन्हें लगभग दो माह बाद गिरफ़्तार किया गया था। जिन बलात्कारियों को गिरिफ़्तार कर न्यायालय मे प्रस्तुत कर, उन्हें न्यायिक अभिरक्षण/हिरासत मे लिया गया है, उनमे कुणाल पांडेय (संयोजक– बी० जे० पी० आइ० टी० सेल, वाराणसी महानगर), सक्षम पटेल (सह-संयोजक– बी० जे० पी० आइ० टी० सेल, वाराणसी महानगर) तथा आनन्द उर्फ़ अभिषेक चौहान (कार्यसमिति-सदस्य– बी० जे० पी० आइ० टी० सेल) सम्मिलित हैं। उन गुण्डों और दरिन्दों को गिरिफ़्तार कर, न्यायालय मे प्रस्तुत किया था, जहाँ उन्हें १४ दिनो की न्यायिक अभिरक्षण मे भेज दिया गया है। उन बलात्कारियों ने बन्दूक की नोक पर उस छात्रा को निर्वस्त्र कराकर, उसके आपत्तिजनक वीडियो बनाये थे। तीनो दरिन्दे सामूहिक बलात्कार करने के बाद निर्द्वन्द्व घूमते रहे; परन्तु विश्वविद्यालयीय विद्यार्थियों के भरपूर विरोध, धरना-प्रदर्शन तथा भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के नेताओं के बढ़ते आक्रोश और विरोध के कारण उन्हें गिरिफ़्तार किया जा सका है।

घटना इस प्रकार है :– आइ० आइ० टी० बनारस हिन्दू युनिवर्सिटी की छात्रा विगत १ नवम्बर को अपने छात्रावास न्यू गर्ल्स हॉस्टल से विलम्ब रात्रि मे डेढ़ बजे के लगभग घूमने के लिए बाहर निकली थी। विश्वविद्यालय-परिसर-स्थित गांधी-स्मृति छात्रावास चौराहे के पास उस छात्रा का एक दोस्त उससे मिलने के लिए पहुँचा था। वहाँ से दोनो कर्मनवीर बाबा मन्दिर पहुँचे थे। उसी बीच बुलेट वाहन से तीन लफंगे उधर से ग़ुज़रते हुए दिखे थे। उन्होंने छात्रा को सुनसान जगह मे देखकर एक भयानक योजना बना डाली थी। उन्होंने मौक़ा देखकर उस युवती के दोस्त को मार भगाया था। वे दरिन्दे उस बेबस छात्रा को अपने वश मे करते हुए, उसे धकेलते हुए, एक कोने मे ले गये थे, जहाँ उन्होंने बन्दूक की नोक पर उसे निर्वस्त्र होने के लिए बाध्य करते हुए, उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किये थे तथा उसके अश्लील वीडियो भी बनाये थे। उन्होंने उस छात्रा का मोबाइल फ़ोन भी छीन लिया था। फिर वे तीनों बलात्कारी उस छात्रा को घटना के बारे मे किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देकर वहाँ से हैदराबाद गेट से निकलकर बाईपास की ओर निकल लिये थे। वे लगभग आधा घण्टा तक बाईपास के आस-पास घूमते रहे। उसके बाद कुणाल ने अपनी बाइक से सक्षम और अभिषेक को उनके घर छोड़ा था। इस प्रकार विलम्ब रात्रि मे ढाई बजे के बाद कुणाल अपने घर पहुँचा था। उसके बाद से पुलिस-प्रशासन की ओर से कोई भी सक्रियता नहीं देखी गयी थी, अन्यथा वे बलात्कारी नवम्बर-माह मे ही कारागार के बैरक मे रहते।

ज़ाहिर है, पुलिस-प्रशासन- द्वारा सरकारी दबाव के कारण उक्त बलात्कारियों को लगभग दो माह-बाद गिरिफ़्तार किया गया है। आश्चर्य का विषय है कि नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र मे लोमहर्षक घटना घटी थी; किन्तु पुलिस-प्रशासन निष्क्रिय बना रहा। योगी-मोदी-सरकार की जमकर छीछालेदर हो चुकी है। राजनीतिक गणित के नकारात्मक समीकरणो को समझते हुए, अन्तत:, पुलिस-प्रशासन को हरी झण्डी दिखाने के बाद गिरिफ़्तारी की गयी है।

ग़ौर करने-लायक़ है कि घटना को अंजाम देने के बाद तीनों दरिन्दों ने जब देखा था कि घटना के विरोध मे आइ० आइ० टी० बी० एच० यू० की छात्र-छात्राओं ने उग्र प्रदर्शन कर दिया था तब वे गिरिफ़्तारी के डर से मध्यप्रदेश चले गये थे, जहाँ उन्होंने हाल ही कराये गये मध्यप्रदेश-विधानसभा-चुनाव मे भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के लिए प्रचार किये थे।

अब भारतीय जनता पार्टी की ओर से कहा जा रहा है कि उन बलात्कारियों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। तीनो बलात्कारियों के भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी सूचित करनेवाली नामपट्टिका भी उनके घर से हटा दी गयी है। उनके पड़ोसियों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं के आदेश से उनकी नाम-पदनामपट्टिका हटा दी गयी है।

बलात्कारियों मे कुणाल पांडेय बृज एन्क्लेव कॉलोनी, सुन्दरपुर, वाराणसी; सक्षम पटेल बजरडीहा, वाराणसी तथा आनन्द उर्फ़ अभिषेक चौहान जिवधीपुर, बजरडीहा के रहनेवाले हैं। उनमे से कुणाल पांडेय सराय सर्जन वार्ड, वाराणसी मे भारतीय जनता पार्टी के पार्षद मदनमोहन तिवारी का दामाद है, जो आइ० टी० सेल के सदस्यों की नियुक्ति करता था। आनन्द उर्फ़ अभिषेक चौहान पर वर्ष २०२२ मे भी भेलुपुर, वाराणसी-थाने मे एक महिला के साथ छेड़ख़ानी का मुक़द्दमा दर्ज़ है।

उपर्युक्त बलात्कारियों के हाथ कितने लम्बे हैं, नीचे दिये गये चित्रों से समझा जा सकता है।

पुलिस-प्रशासन की ओर से कहा गया है कि ३०० से अधिक सी० सी० टी० ह्वी० कैमरों का परीक्षण करने के पश्चात् उक्त तीनो आरोपितों को विगत ४ नवम्बर को ही चिह्नित कर लिया गया था। पुलिस-प्रशासन को सिगरा, वाराणसी-स्थित सिटी कमाण्ड ऐण्ड कण्ट्रोल सेण्टर की सहायता से एक बुलेट बाइक पर सवार तीन युवकों की धुँधली फुटेज मिली थी, जिसके आधार पर पुलिस-प्रशासन लंका की ओर बढ़ते हुए, चेतगंज तक पहुँची थी। चेतगंज मे तीनो आरोपितों की साफ़ फुटेज दिखी थी। जब उस पीड़िता को वह फुटेज दिखायी गयी थी तब उसने तीनो दरिन्दों की पहचान कर ली थी।

यहाँ प्रश्न है, घटना के तीन दिनो बाद जब आरोपितों की पहचान कर ली गयी थी तब उनकी तत्काल गिरिफ़्तारी क्यों नहीं की गयी थी? तीनो बलात्कारियों ने पुलिस-जाँच- पड़ताल मे बताया था कि वे लोग शराब पीकर रात के समय वाराणसी की सड़कों पर निकलते थे और छात्राओं को देखकर उनपर फ़ब्तियाँ कसते थे; अश्लील इशारे करते थे। उन्होंने यह नहीं सोचा था कि आइ० आइ० टी० बी० एच० यू० का प्रकरण इतना तूल पकड़ लेगा। तीनो को लगा था कि वह छात्रा डरकर छात्रावास चली जायेगी और किसी को कुछ नहीं बतायेगी; क्योंकि उन्होंने उस छात्रा के किये गये सामूहिक बलात्कार के कई वीडियो बना लिये थे तथा उसे धमकी दी थी कि यदि वह मुँह खोलेगी तो सारे वीडियो ‘सोशल मीडिया’ के सभी ‘प्लेटफ़ॉर्म’ पर भेज दिये जायेंगे।

अब यहाँ पाँच विन्दुओं पर विचार करने की आवश्यकता है, जो कि अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं :– पहला, जिस छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार करने का आरोप लगाया गया है, उस छात्रा को उसके छात्रावास से विलम्ब रात्रि मे बाहर आने के लिए किसने अनुमति दी थी? दूसरा, उस छात्रा ने क्या बताकर छात्रावास से बाहर जाने की अनुमति ली थी? तीसरा, उस छात्रा ने कितनी अवधि के लिए अनुमति ली थी? चौथा, वह छात्रा जिस छात्र के साथ विलम्ब रात्रि मे लगभग डेढ़ बजे मिलने के लिए गयी थी, वह कौन था? पाँचवाँ, वह छात्रा उस छात्र से इतनी अधिक रात मे मिलने क्यों पहुँची थी?

सम्बद्ध थाने के विवेचना-अधिकारी को जाँच करते समय इन विन्दुओं पर भी ध्यान केन्द्रित करना होगा, ताकि प्रकरण के अन्तर्गत दिख रहे महत्त्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकें।

देर रात तक आवारा और नंगी सड़कों पर यदि कोई युवती किसी युवक के साथ घूमती हुई दिखेगी और मिलेगी तो अनहोनी का घटना, कोई आश्चर्यजनक बात नहीं कही जायेगी।

(सर्वाधिकारी सुरक्षित― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २ जनवरी, २०२४ ईसवी।)