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बाबा रामदेव : एक घपलेबाज़ और पलटीमार बनिया

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— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

इसमें कोई दो राय नहीं कि ‘योग’ की आड़ में बाबा रामदेव ने जो कलाकारी दिखायी है, उससे विश्व के सभी सम्बन्धित लोग हतप्रभ हो चुके हैं। ‘पतंजलि’ ने जिस तेज़ी में भौतिकवादिता को ओढ़ा और उसे अधिकांश विश्व को सिखाया, वह आश्चर्यजनक तो है ही, बाबा रामदेव और उनके शिष्य बालकृष्ण के शातिर दिमाग़ की विजय भी है।

बाबा रामदेव समय की हर चाल को बाख़ूबी समझते हैं और समय के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए, अपनी मंज़िल की ओर कैसे बढ़ा जाये, इसकी गणित भी जानते-समझते हैं।
उधर सारा विश्व कोरोना की दवा सामने आने की राह देख रहा था; विज्ञानी दवा बनाने की दिशा में क्रियाशील था; परन्तु अभी सफलता मिलने में देर है, इस सूचना को सारा विश्व सुन-देख रहा था; इधर बाबा रामदेव ने चमत्कार कर दिखाया और अचानक कोरोनारोधक दवा बनाने की घोषणा भी कर दी थी। जब बाबा रामदेव ने कोरोना की दवा नहीं निकाली है तब उस दवा का नाम ‘कोरोलिन’ क्यों रखा और यह सार्वजनिक रूप से सूचना क्यों प्रसारित कर दी थी कि बाबा रामदेव की फैक्टरी में कोरोना-रोधक दवा बना ली गयी है, जिसका नाम ‘कोरोलिन’ है। जब आधिकारिक रूप में उसका प्रमाण माँगा गया तब बाबा रामदेव की ‘भगही’ ढीली होने लगी, फिर उन्होंने यह भी सार्वजनिक किया– हमने कोरोना की दवा नहीं बनायी है, बल्कि रोगप्रतिरोधक शक्ति बढ़ानेवाली दवा बनायी है।

मैंने कुछ ही दिनों पूर्व ही इस तथ्य का उद्घाटन किया था कि कुछ रोगप्रतिरोधक गोलियों के साथ जोड़-घटाना कर, बाबा रामदेव कोरोनारोधक दवा ‘कोरोलिन’ का नाम देकर ठगी का जाल बिछा रहे हैं।

अब, जब उनकी ‘कोरोना के नाम पर लूट’ करने की मंशा ज़ाहिर हो चुकी है तब बाबा रामदेव ‘पलटी’ मार रहे हैं।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २६ जून, २०२० ईसवी)

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