सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

देर जरूर है मगर अंधेर नहीं

निर्भया काण्ड में पूरा देश अदालत के फैसले का से इंतजार कर रहा था। राजनीति और स्वार्थ से हटकर सभी ने चारों बलात्कारियों को फांसी की सजा देने का स्वागत किया। सरकार ने इस फैसले को एक नजीर बताया तो महिला, सामाजिक कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि इस फैसले का अपराधी मानसिकता वाले लोगों पर गहरा असर पड़ेगा। उच्चतम न्यायालय ने 2012 के निर्भया दुष्कर्म तथा हत्या मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा चार दोषियों- मुकेश, अक्षय, पवन और विनय को सुनाई गई सजा ए मौत बरकरार रखी है। न्यायमू्र्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन न्‍यायाधीशों की पीठ ने फैसले में कहा कि पीडि़ता के बयान में कोई विरोधाभास नहीं था और इसे उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार सही पाया गया। उच्‍चतम न्यायालय ने कहा कि इस मामले ने देश में शोक की सुनामी पैदा कर दी थी। इन चारों दोषियों ने अपनी अपील में दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय के फैसले को चुनौती दी थी। इस घटना के बाद लोगों में गुस्‍सा और आक्रोश था। छह अभियुक्‍तों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्‍महत्‍या कर ली थी जबकि छठा अभियुक्‍त किशोर था। जिसे तीन साल तक सुधार गृह में रखने की सजा सुनायी गयी थी। 16 दिसंबर, 2012 को पैरामेडिकल छात्रा के साथ एक निजी बस में छह लोगों ने सामूहिक दुष्‍कर्म किया और उसके साथ बर्बरता की। इसके बाद उसे और उसके दोस्‍त को चलती बस से बाहर फेंक दिया।निर्भया के अभिभावकों ने न्‍यायालय के फैसले को ऐतिहासिक बताया है। निर्भया की माता ने कहा कि यह सिर्फ उनके परिवार की नहीं बल्कि देश की हर महिला की जीत है। आज जिस तरह से कोर्ट में जज साहेब ने फैसला पढ़ा। एक-एक चीज को पढ़ा तो मुझे यही महसूस हुआ कि देर जरूर है मगर अंधेर नहीं है। बस कोशिश हम करेंगे तो हमारे जैसे और लोगों को भी इंसाफ जरूर मिलेगा।

देश को झकझोर देने वाले इस मामले का फैसला एक साधारण केस का फैसला नहीं है। पूरे देश की इस फैसले पर नजर थी। ये मामला इसलिए भी अहम था कि क्योंकि इस केस के बाद समाज में गुस्से की जो लहर पैदा हुई उसने सरकार और व्यवस्था को झकझोर कर रखा दिया। हालत ये हुए कि सरकार को तमाम कानूनों में बदलाव करने पडे। कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए सरकार ने इसे नजीर करार दिया है। इस फैसले को सुनने के लिए कोर्ट रुम में कुछ लड़कियां भी मौजूद थीं जिन्होंने फैसले को अपनी जीत बताया । इस पूरे फैसले तक पहुंचने में दिल्ली पुलिस की अहम भूमिका रही है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि फैसला साबित करता है कि दिल्ली पुलिस ने कैसे गंभीरता ने जांच की। निर्भया के पिता ने भी फैसले पर संतुष्टि जताई, उन्होंने कहा कि भले ही फैसला आने में वक्त लगा लेकिन यही फैसला आया है। तमाम राजनीतिक दलों ने भी फैसले का स्वागत किया है । जाहिर है हर तरफ फैसले का स्वागत हो रहा है और अदालत ने वास्तव में फैसले से नजीर स्थापित कर दी है जो आने वाले दिनों में देश के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी