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समाजवादी सरकार को हाईकोर्ट का हाई वोल्टेज करन्ट

अंतर्ध्वनि एन इनर वॉइस


22 दिसम्बर 2016 को अखिलेश कैबिनेट के इस फैसले में भले ढेरों पेंच थे, मगर चुनावी ड्योढ़ी पर खड़ी सरकार ने 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा देने का निर्णय लिया था। अधिसूचना के साथ ही इन जातियों को प्रदेश में एससी का सर्टिफिकेट जारी होना शुरू हो गया था। लेकिन, आज इलाहबाद हाईकोर्ट ने 17 पिछड़ी जातियों को एससी का प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। विधानसभा चुनाव के बीच हाईकोर्ट का फैसला समाजवादी पार्टी के लिए बड़ा झटका है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में 22 दिसम्बर 2016 को कैबिनेट बैठक में 17 अति पिछड़ी जातियों को एससी का दर्जा देने का फैसला लिया था। इस निर्णय को लेकर तकनीकी पेंच तलाशे जा रहे थे, पर समाजवादी सरकार ने इन जातियों की तकरीबन 13.50% प्रतिशत आबादी को अपने पाले में करने का चुनावी दांव चल दिया था। प्रस्ताव में कहा गया था कि ये 17 जातियां मूलरूप से केवल 05 जातियां हैं। इनका खानपान और रहन-सहन एक जैसा है। इनकी आर्थिक स्थिति भी दयनीय है। विधि विशेषज्ञों अनुसार इन जातियों को अनुसूचित जाति के रूप में ‘परिभाषित’ करके व कार्मिक की अधिसूचना में एक बिन्दु जोड़कर एससी को उपलब्ध करायी जाने वाली सुविधा दी जा सकती थी।

केन्द्र कर चुका था इन्कार


2012 में प्रदेश सरकार के समाज कल्याण मंत्री अवधेश प्रसाद की अध्यक्षता में 06 जुलाई 2012 को 05 मंत्रियों की उपसमिति से 17 पिछड़ी जातियों पर रिपोर्ट मांगी थी। समिति ने फरवरी, 2013 में सरकार को सौंपी रिपोर्ट में कहा था कि इन 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति के रूप में परिभाषित कर लिया जाए। साथ ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा किये गए सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक अध्ययन की रिपोर्ट 18 बिंदुओं के साथ केन्द्र सरकार को भेजी जाए। अखिलेश कैबिनेट ने 28 फरवरी 2013 को संस्तुति पर अपनी मंजूरी देकर केन्द्र सरकार को भेज दिया था। केन्द्र सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 22 जुलाई 2015 को भेजे पत्र में इन जातियों को अनुसूचित जाति के रूप में स्वीकार करने योग्य नहीं पाया था। अब अखिलेश यादव कैबिनेट ने इन जातियों को एसपी के रूप में परिभाषित कर उसका लाभ देने का फैसला लिया था।

सामाजिक न्याय समिति में आबादी


राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में हुकुम सिंह की अध्यक्षता में गठित सामाजिक न्याय समिति के आंकड़े कहते हैं कि प्रदेश में केवट, मल्लाह, मछुआ, निषाद की आबादी 4.33 फीसद, कुम्हार, प्रजापति 3.24 फीसद, भर, राजभर 2.44 फीसद, कहार-कश्यप, धीमर, बाथम, तुरहा, बिंद, गोड़िया की आबादी 3.31 फीसद के करीब है।

2004 में मुलायम का था प्रस्ताव


2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इन 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का प्रस्ताव पास कर मंजूरी के लिए केन्द्र सरकार को भेजा था, लेकिन तब भी उसे नामंजूर कर दिया गया था। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में समाजवादी पार्टी ने इन जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाने का वादा किया था। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 15 फरवरी 2013 को 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा था, जिसे रजिस्ट्रार जनरल ऑफ़ इंडिया (आरजीआइ) ने निरस्त कर दिया था। इसके बाद मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी ने 17 जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाने के लिए प्रदेश में रैलियां आयोजित कीं और जिलों से प्रस्ताव पास कराकर केन्द्र सरकार को भेजा। बात नहीं बनी तो पिछले साल दिसम्बर में अखिलेश सरकार ने इन अति पिछड़ी जातियों को एससी में अधिसूचित कर इन्हें प्रमाणपत्र देने की अधिसूचना जारी कर दी थी।