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छत्तीसगढ़ इकाई का वार्षिकोत्सव काव्यपाठ और पुस्तक विमोचन के साथ मनाया गया

हिंदी के प्रचार प्रसार तथा हिंदी भाषा के विकास के लिए समर्पित तथा जय हिंद, जय हिंदी का ध्येय वाक्य रखने वाली, राष्ट्रीय पंजीकृत संस्थान साहित्य संगम संस्थान छत्तीसगढ़ इकाई का प्रथम स्थापना दिवस समारोह दिनांक 22.11.2021 दिन सोमवार को धूमधाम से मनाया गया।

संस्थान की मुख्य इकाई मीडिया प्रमुख तथा साहित्य संगम संस्थान छत्तीसगढ़ इकाई की सचिव सह प्रमाणन अधिकारी भारती यादव ‘मेधा’ ने बताया कि स्थापना दिवस समारोह में देश के विविध प्रांतों के जाने-माने साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। स्थापना दिवस समारोह में राजवीर सिंह मंत्र द्वारा गीत कमल पुस्तक, कुमार रोहित रोज़ द्वारा नवरात्रि विशेषांक पुस्तक तथा नीलम डिमरी द्वारा चंडीगढ़ चंद्रिका पत्रिका का विमोचन किया गया।

वरिष्ठ साहित्यकार, प्रशासनिक पद अनुभव प्राप्त, गुरु घासीदास शोध पीठ पं. रविशंकर शुक्ल वि. वि. रायपुर के पूर्व अध्यक्ष तथा वार्षिकोत्सव कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. जे. आर. सोनी ने हिंदी के विकास तथा प्रचार की बात कहते हुए संस्थान द्वारा हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए किये जा रहे कार्यो की सराहना की। भारत एक्सीलेंसी अवार्ड सम्मानित, लोक साहित्य विशेषज्ञ करीब सौ से अधिक पुस्तकों की समीक्षा करने वाली छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला साहित्यकार तथा समाज सेविका व स्थापना दिवस समारोह की विशिष्ट अतिथि डॉ. मृणालिका ओझा ने अपने जोश पूर्ण उद्बोधन में कहा कि किसी भी राष्ट्र की भाषा उसकी आंचलिक भाषाओं से ही सशक्त समृद्ध होती है। विदेशी भाषा का अधिक प्रयोग अपनी भाषा को जीर्ण करता है। अत: हिंदी का प्रयोग व विकास को बढ़ावा देना चाहिए।

साहित्यकार, कवियित्री तथा आज के समारोह की अध्यक्षता कर रहीं डॉ. मुक्ता कौशिक ने अपने उद्बोधन में साहित्य संगम संस्थान को साहित्य का वि वि कहते हुए हिंदी के विकास में इसके योगदान की सराहना की। वार्षिकोत्सव समारोह के इस काव्य पाठ से सराबोर रंगारंग कार्यक्रम का संचालन चन्द्र मुखी मेहता सदा जी तथा भारती यादव ‘मेधा’ जी द्वारा बेहतरीन अंदाज़ में किया गया। कार्यक्रम में स्वागत गीत सरोज सिंह ठाकुर, सरस्वती वंदना भारती यादव ‘मेधा’, गणेश वंदना लता खरे, गुरु वंदना तेजराम नायक तथा संगम गान मनोज कुमार चन्द्र वंशी द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम हेतु अलंकरण बनाने में संगीता मिश्रा ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। मिथिलेश सिंह मिलिंद, कविराज तरुण सक्षम जी तथा छाया सक्सेना प्रभु अपने जोशपूर्ण उद्बोधन से कार्यक्रम की भव्यता में चार चांद लगा दिये। साहित्य संगम संस्थान से जुड़े हुए सभी वरिष्ठ, कनिष्ठ रचनाकारों ने समारोह में शामिल होकर अपनी काव्य प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम का समापन सम्मान पत्र वितरण और धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।