सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

हर सवाल का उत्तर मिलेगा!

विवेकानन्द सिंह (युवा पत्रकार/लेखक)-


यह उत्तर प्रदेश है, यहां आपको बिना पूछे हर सवाल का उत्तर मिल जायेगा। सात चरणों में पूरा होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव के दो चरण के चुनाव संपन्न हो चुके हैं। चुनाव हो चुके इन 140 सीटों को ले कर हर कोई कंफ्यूज़ है। लेकिन एक बात जान लीजिए कि कंफ्यूज़ सिर्फ विश्लेषण करने वाले हैं। वोट डालनेवालों से बात की तो उनका समीकरण साफ़ है, वहां जरा-सा भी कंफ्यूज़न नहीं है। यह राज्य की सत्ता के लिए ठीक है। बॉलीवुड वालों ने भले ही यूपी-बिहार वाले भाई की छवि दुनिया के सामने घोंचू की बना दी हो, लेकिन इन दोनों राज्यों की जनता और नेताओं में पूरे देश की सत्ता को नियंत्रित करने की ताकत है।

मेरे पास यूपी की यादों के नाम पर बस 9 महीने का कानपुर प्रवास दर्ज है। खबरों, किताबों और थोड़ी-बहुत राजनीतिक समझ के हिसाब से कह सकता हूं कि उत्तर प्रदेश में मुख्य लड़ाई भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन के ही बीच है! मेरा मत है कि बसपा को वोट प्रतिशत काफी अच्छे आयेंगे, लेकिन वह उनके ज्यादातर उम्मीदवारों के जीतने से ज्यादा दूसरी पार्टी यानी कहीं भाजपा, कहीं सपा के उम्मीदवार को हराने के काम आएंगी। यह तो आप जानते हैं कि यूपी में बसपा की सरकार मुलायम सिंह को रोकने के लिए बहुजन हिताय की जगह, सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय के फॉर्मूले पर आयी थी। अभी स्थिति इतर है, क्योंकि भाजपा मजबूत हुई है। इस बार सर्वजन का ब्राह्मण चुटकी भर भी बसपा को वोट नहीं करेगा। ऐसे में सिर्फ दलित और थोड़े पिछड़े व मुस्लिम के दम जीत का आंकड़ा छूना बहुत मुश्किल होगा। हां जिनको लगता है कि मुद्दे इन बातों के अलावा और भी हैं तो उस मामले में अखिलेश के हिस्से में ही कई पॉजिटिव हैं। उनकी छवि समाजवादी के साथ-साथ विकासवादी की बनी है।

अब निर्भर यह करता है कि मुस्लिम सपा के साथ कितने जाते हैं और भाजपा कितने पिछड़ों को अपनी तरफ कर पाती है? यहीं लड़ाई की दिलचस्पी बची है और अभी बचे हुए पांच चरणों में काफी कुछ होना बाकी है। भाजपा को पता है कि उनकी टक्कर सपा-कांग्रेस गठबंधन से है, इसलिए वह शो कर रही है कि उन्हें बहन जी टक्कर दे रही हैं, ताकि मुसलिम वोटर भाजपा को रोकने के नाम पर बसपा को वोट दे दे। जाटलैंड यानी पश्चिमी यूपी भाजपा के लिए उम्मीद का लैंड था, जहां उनका प्रदर्शन सोच से काफी औसत रहा, क्योंकि हैंडपंप ने बीजेपी के वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की है। हालत, जिस तरह से चल रहे हैं, उस आधार पर मैं कह सकता हूँ कि अखिलेश अपनी एज बनाये हुए हैं। यह सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए अच्छे संकेत हैं। बाकी तो ई लोकतंत्र है और इहां के मालिक जनता-जनार्दन हैं!