‘पुलवामा’ विस्फोट-काण्ड पर देश की सरकार चुप क्यों है?

भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

★ ‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय

—- डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

पुलवामा-विस्फोट में बड़ी संख्या में हमारे निर्दोष सैनिक मारे गये थे। देश की सरकार निकम्मी निकली, जिसने अभी तक कोई जाँच-समिति नहीं गठित करायी है और यदि करायी थी/है तो उसे देशवासियों को क्यों नहीं बताया गया है? इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि सरकार ‘सच’ जानती है और उस सच को छुपा रही है; क्योंकि उस ‘सच’ के सामने आ जाने से ‘सरकार की घिनौनी चाल’ से हमारे देशवासी घृणा करने लगेंगे। यह भी सच हो सकता है कि पुलवामा की हृदय-विदारक घटना सरकार की सोची-समझी चाल हो। ऐसा इसलिए विचार आया है कि सरकार पुलवामाकाण्ड में निर्ममतापूर्वक मारे गये सैनिकों को ‘शहादत’ का नाम देकर और उन्हें ‘माला’ पहनाकर अपने कर्त्तव्य की इतिश्री कर चुकी है।

अब हम देशवासी वर्तमान सरकार से जानना चाहते हैं :–
१- पुलवामा-विस्फोट कैसे हुआ था?
२- क्या भारत के सैन्य-असैन्य गुप्तचर-अभिकरणों के गुप्तचरों ने पुलवामा में कुछ भीषण घटने की सूचना दी थी और यदि नहीं दी थी तो उस घटना से पूर्व वे क्या कर रहे थे?
३- जितनी मात्रा में ‘आरडीएक्स’ नामक विस्फोटक सामग्री का घटना में प्रयोग किया गया था, उतनी सामग्री पाकिस्तान से भारत की सीमा में लायी नहीं जा सकती। ऐसे में, वह विस्फोटक सामग्री पुलवामा में कैसे आ गयी थी?
४- उस संवेदनशील मार्ग पर वाहनसहित वह कथित आत्मघाती व्यक्ति विस्फोटक पदार्थ लेकर कैसे पहुँच गया था, तब सुरक्षाकर्मी क्या कर रहे थे?
५- उस दुर्दान्त घटना के घटे एक वर्ष एक दिन हो चुके हैं; परन्तु भारत की सरकार अभी तक चुप्पी क्यों साधे हुए है?
६- बन्दी बनाये गये भारत का विश्वासघाती सैन्य अधिकारी ‘देवेन्द्र सिंह’/’देवेन्दर सिंह’/’दविन्दर सिंह’ की पुलवामा विस्फोटक घटना को अंजाम देने/दिलाने में क्या-कोई भूमिका रही है?

(सर्वाधिकार सुरक्षित– डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १६ फ़रवरी, २०२० ईसवी)

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