रामलला श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में मन्दिर हेतु हुआ भूमि पूजन

वैश्विक सामरिक मानचित्र पर क्रान्तिधर्मी ‘बलिया’ रेखांकित होता हुआ

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

“इंक़िलाब ज़िन्दाबाद” का उद्घोष बलिया की धरती से अब भी उठ रहा है। चित्तू पाण्डेय, मंगल पाण्डेय, रामदहिन ओझा आदिक ऐसे वीर सपूत थे, जिन्होंने अँगरेज़ों के दाँत खट्टे कर दिये थे। देश को आज़ादी मिलने के दो दिनों पहले ही ख़ुद को आज़ाद करनेवाला बलिया २९ जुलाई, २०२० ई० की तारीख़ में वैश्विक सामरिक मानचित्र पर स्वाभिमानपूर्वक अपना नाम अंकित करा चुका है और इसका श्रेय जाता है, बलिया ज़िले के बाँसडीह-तहसीलान्तर्गत ‘बँकवा’ नामक गाँव के निवासी और वर्तमान में भारतीय वायुसेना के विंग कमाण्डर मनीष सिंह को। यह वही बँकवा गाँव है, जो मेरे गाँव बाँसडीह से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर है और जब भी गाँव जाता हूँ तब उधर भी मेरी बाइक चल पड़ती है।

छ: माह तक फ्रांस में सामरिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद २९ जुलाई को जब अपने अन्य विंग कमाण्डर पॉयलटों के साथ मनीष सिंह-द्वारा फ्रांस से भारत चिर-प्रतीक्षित ‘राफेल’ नामक युद्धक विमान लाये जा रहे थे तब बलिया ज़िला एक और स्वर्णिम इतिहास का अध्याय लिखने के लिए बढ़ चुका था; अन्तत:, उत्तरप्रदेश का बलिया ज़िला का बाँसडीह, जिसके अन्तर्गत मेरा गाँव ‘बाँसडीह’ आता है, सामरिक इतिहास-सिद्ध हो चुका है।

मुझे गर्व है, अपने बलिया के साहसिक पुरुष विंग कमाण्डर मनीष सिंह पर। इसके अतिरिक्त हरदोई (उत्तरप्रदेश) के निवासी और भारतीय वायुसेना के विंग कमाण्डर अभिषेक त्रिपाठी-सहित समस्त विंग कमाण्डरों पर हम भारतवासियों को गर्व है।

(सर्वाधिक सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ३० जुलाई, २०२० ईसवी)

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