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भारतीय संस्कृति


हमारे देश भारत की प्राचीन संस्कृति ही भारतीय संस्कृति कही जाती है। भारतीय संस्कृति हमारे ऋषि मुनियों की संस्कृति है। वेद, पुराण, उपनिषद्, ब्राह्मण ग्रन्थ, स्मृतियां, रामायण, महाभारत, गीता हमारे पौराणिक शास्त्र है जो हमें भारतीय संस्कृति सिखाते हैं।

हमारा पहनावा कैसा हो, हमारा रहन सहन कैसा हो, हम में कैसे संस्कार होना चाहिए, ये सब हम हमारी संस्कृति से सीखते हैं?
मुनष्य में दो तरह की प्ररवृत्तियाँ होती हैं। व्यक्तियों में विजातीय प्रवृत्तियाँ काम, क्रोध, लोभ व मोह से होती हैं । किसी व्यक्ति में दया, सहनशीलता, करुणा, परोपकार, सहयोग, सद्भाव व भाईचारे की भावना प्रेम की भावना होती है जो सत्पथ पर चलते है यानि सजातीय वृत्तियाँ होती है।

जिनमे विजातीय वृत्तियाँ होती है उन्हें आसुरी स्वभाव वाला कहते हैं। जिनमे सजातीय वृत्तियाँ होती है वे दैवीय स्वभाव वाले देवता कहलाते हैं।

हमारी संस्कृति हमें दया, करुणा, प्रेम व सहयोग की भावना सिखाते हुए वसुधैव-कुटुम्बकम की भावना सिखाती है। सब विश्व के जन आपस मे भाई। सभी सुखी रहे। निरोग रहें। सभी भाई एक दूसरे के दुख में सहभागी बनें। मदद करे। विपदा काल मे सहायता करें।

हमारी भारतीय संस्कृति हमे सूर्य, चन्द्रमा, तारे, नक्षत्र, पेड़, पौधे, नदी, जल, पक्षी, पहाड़, हर कण की पूजा करने की सीख देती है। हम पीपल वट तुलसी आंवले के वृक्ष की पूजा करते हैं। माँ गंगा यमुना सत्स्वती नर्मदा सरयू शिप्रा मैया की पूजा आरती करते हैं। भारत वह देश है जहां पत्थर पूजे जाते हैं। मूर्ति पूजा की जाती है। मूर्ति की स्थापना कर प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। हम जहाँ सिर झुकाते हैं वे ईश्वर हमारी सुनकर मन्नत पूरी करता है। हमारा देश आपसी भाईचारा कौमी एकता का देश है। हम हर त्योहार सभी धर्मों के साथ साथ उल्लास पूर्वक मनाते हैं।
विविधता में एकता हमारी भारतीय संस्कृति की विशेषता है। भारतीय संस्कृति में विज्ञान आध्यत्म कला कौशल आदि की सीख मिलती है।

धर्म अर्थ काम और मोक्ष ये चार पुरुषार्थ कर मनुष्य हमारी संस्कृति को अंगीकार करता है। अहिंसा जीव दया पशु कल्याण आदि भावनाएं भारतीय संस्कृति में निहित है। आज जब सारा विश्व वैश्विक महामारी से चिंतित है ऐसे समय भारतीय संस्कृति की बातें याद आने लगी है। सेवा कार्य,दया भाव,प्रेम से रहना,आदि।

आज भारतीय संस्कृति के बताए योग प्राणायाम करने से असाध्य रोग बिना इलाज के सही हो रहे हैं। कोरोना जैसी महामारी में योग से लाभ मिल रहा। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है। जो प्रतिदिन योग करते हैं वे स्वस्थ व निरोगी हैं।
तीज त्योहार वाला हमारा देश है। व्रत उपवास का वैज्ञानिक महत्व है।यज्ञ हवन हमारी संस्कृति सिखाती है जिससे वातावरण साफ होता है। विज्ञान भी इस बात को मान चुकी है। कई असाध्य रोग हवन करने से दूर हो जाते हैं।

हमारी भारतीय संस्कृति में अनेक महापुरुषों की शिक्षाओं को शामिल किया गया है। स्वामी दयानंद सरस्वती स्वामी विवेकानंद । रामकृष्ण परमहंस की जीवनियों को पढ़ने से जीवन निर्माण की कला सीखी जा सकती है ।

भारतीय संस्कृति में शिक्षा व्यवस्था गुरुकुलों में होती थी। आश्रम में गुरुकुल होता जहाँ गुरु अपने शिष्यों को अस्त्र व शस्त्र के साथ ही शास्त्र की शिक्षा देते थे। गुरु की आज्ञा का पालन करना सभी शिष्यों को अनिवार्य था। गुरुकुल के कठोर नियम व अनुशासन में रहना पड़ता था।

डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
कवि, साहित्यकार
भवानीमंडी