राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल के दूसरे दिन भी जिले में पीएसयू बैंकों के नहीं खुले ताले

राज चौहान ब्यूरो प्रमुख हरदोई –


दो दिन की राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल के दूसरे दिन भी आज जिले में पीएसयू बैंकों के ताले नहीं खुले। इन दो दिनों में करीब 250 करोड़ का बैंकिंग लेनदेन प्रभावित हुआ। हड़ताली बैंक कर्मियों ने बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा पर इकट्ठे होकर सरकार औऱ बैंक मैनेजमेंट के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी की।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के चेयरमैन मनोज सिंह, संयोजक आर के पाण्डेय, क्षितिज पाठक, अजय मेहरोत्रा, श्याम सुंदर वर्मा व सूर्या बाथम ने जिले में बैंक हड़ताल को पूरी तरह सफ़ल रहने का दावा किया है। आज गुरुवार को भी जिले की सभी 19 पीएसयू बैंकों की 163 शाखाओं में कामकाज पूरी तरह ठप्प रहा।

आर्यावर्त ग्रामीण बैंक और जिला सहकारी बैंक के कर्मचारियों को बैंक यूनियंस ने ही हड़ताल के आह्वाहन से बाहर रखा हुआ था। जिले की 19 पीएसयू बैंकों की 163 बैंक शाखाओं के हड़ताल के चलते 3 प्राइवेट बैंकों की 7 शाखाये ग्राहकों को सेवाएं दे पाने के सक्षम नहीं रही।

स्टेट बैंक में रोजाना लगने वाली क्लीयरिंग के ठप्प होने से आज भी करीब 10 करोड की चेकें फंसी रह गयी।

यूनाइटेड फोरम के नेताओ ने कहा कि जो सरकार और बैंक मैनेजमेंट छह महीने पहले से ही नवम्बर 2017 से देय होने वाले वेतन पुनरीक्षण को समय से देने की बात कर रही थी वह अब छह माह बीत जाने के बाद भी देने से पीछे हट रही है।

यूनियन नेताओं ने कहा कि बैंक मैनेजमेंट अब 2 प्रतिशत वेतनवृद्धि का तुच्छ प्रस्ताव दे रही है जबकि पिछले वेतन पुनरीक्षण में 15 प्रतिशत की वेतनवृद्धि हुयी थी। बैंककर्मियों 2 प्रतिशत का प्रस्ताव कतई स्वीकार नहीं है। अगर बैंक मैनेजमेंट सुधरे वेतनवृद्धि प्रस्ताव के साथ वार्ता के लिए तैयार न हुई तो आंदोलन और गहरायेगा, और भी हड़तालें हो सकती हैं, अनिश्चितकालीन हड़ताल भी हो सकती है।

यूनियन नेताओं ने कहा कि बैंकों को हुए 1 लाख 59 हजार करोड़ परिचालन लाभ में से एक उचित हिस्सा वेतनवृद्धि के रूप में मांगना पूरी तरह जायज है। बैंकों को जो घाटा दिखाया जा रहा है उसका एकमात्र कारण खराब हो रहे कर्जे है और इसके कारण बैंककर्मियों की वेतनवृद्धि को नकारा नहीं जा सकता।

यूनियन नेताओ ने कहा कि बैंकों में व्यवसाय बढ़ रहा है और कार्य भी बढ़ रहा है। पर्याप्त भर्ती न होने से कर्मचारियों पर कार्य का बोझ बढ़ा है। वेतनवृद्धि बढ़ते हुए कार्यभार के अनुरूप होनी चाहिए। कीमतें बढ़ रही है तो वेतन भी बढ़ना चाहिए।

विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से वेद प्रकाश पांडे, राम कुमार मिश्रा, अनूप सिंह, कमलेश कुमार, राजेश शुक्ला, वर्षा मेहरोत्रा, अनामिका सिंह, वंदना यादव, मालती देवी, रचना तिवारी, कौशलेंद्र शुक्ला, प्रशांत, पुनीत, श्याम मोहन बाजपेई, दीपक बाजपेई, आनंद वर्मा, वीर बहादुर सिंह, अजातशत्रु, गौरव, सुशील कुमार, संजय टंडन, आलोक शुक्ल, राजेश कुमार, प्रकाश दुबे, रोचिन सिन्हा, आशीष अवस्थी, प्रदीप, शिवचरन, रोहित, शिव कुमार मौजूद रहे।

url and counting visits