बुद्धिजीवीवर्ग-द्वारा श्रमजीवियों का आत्मिक सम्मान

चित्र-विवरण : नेहरू पहला : नेहरू ग्रामभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० पी० एन० पाण्डेय भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के कोश का लोकार्पण करते हुए; साथ में इलाहाबाद डिग्री कॉलेज के पूर्व-प्राचार्य डॉ० हर्षदेव सिंह और केन्द्रीय विश्वविद्यालय, इलाहाबाद के पूर्व-विधि-प्राध्यापक प्रो० एम० पी० तिवारी।
  • कुलपति ने मज़दूरों को भोजन कराकर अपना जन्मतिथि-समारोह मनाया ।
  • भाषाविद् के कोश का लोकार्पण श्रमिकों की उपस्थिति में हुआ ।

नूतन वर्ष के अवसर पर मेलाक्षेत्र के समीप नवनिर्माणाधीन भवन में शिक्षा और साहित्यजगत् के क्षेत्रों के कल एक साथ दो ऐतिहासिक आयोजन हुए थे। पहला आयोजन नेहरू ग्रामभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० पी०एन० पाण्डेय ने अपनी जन्मतिथि का आयोजन भवन-निर्माण कर रहे मज़दूर और मिस्त्रियों के मध्य मनाया था। दूसरी ओर भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के हिन्दीशब्दकोश का लोकार्पण उन्हीं श्रमिकों की उपस्थिति में हुआ था। इस अवसर पर उक्त सर्वहारावर्ग को भोजन कराया गया। श्रमिकवर्ग ने अपनी मौन और मुखर भावनाओं और कृतज्ञ आँखों से कुलपति प्रो० पाण्डेय को शुभ कामना दी। वह आयोजन वास्तव में एक ऐतिहासिक था, जहाँ अभिजात और सर्वहारा-वर्ग की संवेदना एकाकार हो रही थी।

नेहरू ग्रामभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० पी० एन० पाण्डेय ने डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के कोश-लोकार्पण के अवसर पर कहा, “वास्तव में, आज ऐसे कोश की आवश्यकता है, जो विद्यार्थियों और अध्यापकों के अध्ययन-अध्यापन में आ रही शब्दप्रयोग-सम्बन्धित जटिलताओं को दूर कर सके।”

दूसरा : श्रमिक-वर्ग को भोजन कराते हुए प्रो० पी० एन० पाण्डेय और डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय।

केन्द्रीय विश्वविद्यालय, इलाहाबाद के पूर्व-प्राध्यापक प्रो० एम० पी० तिवारी का मत था, “यह कोश भाषाजगत् में रहकर काम कर रहे प्रत्येक व्यक्ति के लिए लाभप्रद सिद्ध होगा।

इलाहाबाद डिग्री कॉलेज के पूर्व-प्राचार्य डॉ० हर्षदेव सिंह ने बताया, “आज कोश का हम सबके जीवन में अति महत्ता है। कभी-कभी ऐसे शब्द आ जाते हैं, जिनका सामना करना बहु मुश्किल हो जाता है।”

उपस्थित श्रमिकों में से कुछ की ‘लोकार्पण’ के अर्थ, औचित्य तथा अवधारणा को समझने के प्रति गहन जिज्ञासा थी, जिसका उनके भाषिक और बोधस्तर पर आकर कोशकार डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने शमन किया था। उल्लेखनीय है कि दोनों आयोजन अनियोजित और अनौपचारिक थे। उक्त आयोजन में लछमन, मंजु देवी, राहुल, रमपतिया, काकू, ओखरन, बहोरन, गोबरधन, खोखा, अर्जुन, बबलू, टिंकू, शिवबली आदिक श्रमिक उपस्थित थे।

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