सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

भारतीय जनता पार्टी का आंखें चौंधिया देने वाला प्रदर्शन

बृजेश ‘कबीर’
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17वीं विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने आंखें चुंधिया देने वाला ऐसा प्रदर्शन किया कि #सियासी_पण्डितों ने भी दांतों तले उंगली दबा ली। भाजपा ने 08 में रिकॉर्ड 07 सीटों पर केसरिया परचम फ़हरा दिया। 1980 में स्थापना के बाद 1991 की रामलहर में भाजपा ने तत्कालीन 09 में 03 सीटों पर ही कामयाबी हासिल की थी, जो उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। साल 80 के चुनाव में भाजपा को 01, साल 91 में 03, साल 93 में 01, साल 96 में 02 और साल 2002 में 02 सीट पर भाजपा सफल रही थी। 2007 और 2012 में उसका खाता भी नहीं खुला था। साल 85 से पहले कांग्रेस के बाद 2007 में पहली बार बसपा ने हरदोई में ज़बरदस्त प्रदर्शन करते हुए तब की 09 में 08 सीटें झटकी थीं। बाद में सदर में उपचुनाव के बाद सभी 09 सीटों पर वह क़ाबिज़ हुई थी। 2012 में सपा ने 08 में 06 सीटें जीतीं थीं। लेकिन, 2014 के लोकसभा चुनाव में 04 विधानसभा सीटों पर पिछड़ने के बावज़ूद भाजपा का 2017 में शानदार प्रदर्शन विरोधी दलों को ही नहीं, राजनीतिक विश्लेषकों को भी चकित कर रहा है।

17वीं विधानसभा के लिए ज़िले में बनी तस्वीर देखें
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#154_सवायजपुर– भाजपा के माधवेन्द्र प्रताप सिंह ‘रानू’ 27,169 मतों के अंतर से जीते हैं। उन्हें कुल 92,419 मत मिले। सपा के पद्मराग सिंह यादव ‘पम्मू’ को 65,250 मत मिले और रनर रहे। बसपा के डॉ0 अनुपम दुबे को 59,584 मत मिले और सैकेण्ड रनर रहे। रानू को दूसरे प्रयास में कामयाबी मिली। वह 2012 में भी भाजपा से चुनाव मैदान में आए थे और उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था।
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#155_शाहाबाद– भाजपा की रजनी तिवारी 4,208 मतों के अंतर से जीतीं। उन्हें कुल 99294 मत मिले। बसपा के आसिफ़ खां ‘बब्बू’ को 95,086 मत मिले और रनर रहे। सपा के सरताज खां को महज़ 15,532 मत मिले और सैकेण्ड रनर रहे। रजनी परिसीमन से पहले की बिलग्राम सीट से 2008 का उपचुनाव और परिसीमन में नवसृजित सवायजपुर सीट से 2012 का आमचुनाव बसपा के टिकट पर जीतीं थीं। उन्होंने शाहाबाद से जीतकर हैट्रिक बनाई है। सरताज, अपने सिटिंग विधायक बाबू खां की विरासत हासिल करने चुनाव मैदान में उतरे और मतदाताओं ने उन्हें बुरी तरह खारिज़ कर दिया।
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#156_हरदोई– सपा के नितिन अग्रवाल 5,046 मतों के अंतर से जीते। उन्हें 96,877 मत मिले। भाजपा के राजाबक्श सिंह ने बेहद नज़दीकी मुक़ाबले में 91,831 मत पाए और रनर रहे। बसपा के धर्मवीर सिंह ‘पन्ने’ को 30,287 मत मिले और सैकेण्ड रनर रहे। नितिन 2008 का उपचुनाव बसपा और 2012 का आमचुनाव सपा से जीते थे। उन्होंने भी जीत की हैट्रिक बनाई।
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#157_गोपामऊ– भाजपा के श्याम प्रकाश 31525 मतों के अंतर से जीते। उन्हें 87,693 मत मिले। सपा की राजेश्वरी देवी को 56,168 मत मिले और रनर रहीं। बसपा की मीना कुमारी को 49,612 मत मिले और सैकेण्ड रनर रहीं। राजेश्वरी देवी जीत की हैट्रिक लगाने से चूक गईं। वह परिसीमन के पहले की बावन सीट से 2007 में बसपा और परिसीमन के बाद सृजित साण्डी सीट से सपा से जीतीं थीं। श्याम प्रकाश का यह छठा चुनाव था और उन्हें 04 मौकों पर कामयाबी मिली।
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#158_साण्डी– भाजपा के प्रभाष कुमार 20382 मतों के अंतर से जीते। उन्हें 71801 मत मिले। कांग्रेस के ओमेन्द्र वर्मा वर्मा को 51419 मत मिले और रनर रहे।
बसपा के वीरेन्द्र वर्मा को 50443 मत मिले और सैकेण्ड रनर रहे। प्रभाष को चौथे प्रयास में सफलता मिली है। वह जनता दल, बसपा और सपा से किस्मत आज़मा चुके थे, पर कामयाबी भाजपा से मिली।
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#159_बिलग्राम_मल्लावां– भाजपा के आशीष सिंह ‘आशू’ 7,789 मतों के अंतर से जीते। उन्हें 82,810 मत मिले। सपा के सुभाष पाल को 75,021 मत मिले और रनर रहे। बसपा के अनुराग मिश्रा को 51,294 मत मिले और सैकेण्ड रनर रहे। इस सीट पर भाजपा को पहली कामयाबी दिलाकर आशू ने इतिहास रचा है। उन्हें पहली कोशिश में सफलता मिली। हालांकि, इस सीट पर भाजपा नेतृत्व को समीक्षा करने की भी ज़रूरत है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को सबसे बड़ी जीत (53,524 के अंतर से) इसी सीट पर मिली थी, जो विधानसभा चुनाव में 7,789 के अंतर पर पहुंच गया। ईमानदारी से समीक्षा हुई तो सिटिंग सांसद अंजू बाला और उनके पति पूर्व विधायक सतीश वर्मा की भूमिका पर सवाल खड़े होना लाज़िमी होगा।
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#160_बालामऊ– भाजपा के रामपाल वर्मा 22,879 मतों के अंतर से जीते। उन्हें 74,688 मत मिले। बसपा की नीलू सत्यार्थी को 51,809 मत मिले और रनर रहीं। सपा की सुशीला सरोज को 43,204 और सैकेण्ड रनर रहीं। रामपाल वर्मा रिकॉर्ड 08वीं मर्तबा विधानसभा पहुंचे हैं। वह 04 बार कांग्रेस, 01 दफ़ा सपा और 02 मर्तबा बसपा से जीत चुके हैं।
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#161_सण्डीला– भाजपा के राजकुमार अग्रवाल ‘राजिया’ 20,489 मतों के अंतर से जीते। उन्हें 90,223 मत मिले। सपा के अब्दुल मन्नान को 69,734 मत मिले और रनर रहे। बसपा के पवन सिंह को 29,132 मत मिले और रनर रहे। राजिया लोकतान्त्रिक कांग्रेस और सपा से 12 वर्ष विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं।
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भाजपा की अबसे पूर्व की स्थिति
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भाजपा के गठन के बाद 1980 में परमाई लाल ने अहिरोरी सीट पर उसका खाता खोला था। इसके बाद 85 और 89 में पार्टी के लिए सूखा रहा। 1991 की रामलहर में गंगाभक्त सिंह ने शाहाबाद, महावीर सिंह ने सण्डीला और दयाराम वर्मा ने बावन सीट पार्टी की झोली में डाली थी। 93 में सण्डीला से महावीर सिंह ने भाजपा को लगातार दूसरी जीत दर्ज कराई थी। 96 में गंगा सिंह चौहान ने बिलग्राम और छोटेलाल ने बावन सीट भाजपा के खाते में दर्ज कराई थी। 2002 में गंगाभक्त सिंह ने शाहाबाद और अनिल वर्मा ने बावन सीट पर केसरिया परचम फहराया था।