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सार्वजनिक होतीं ‘आरोपित एकांत’ और ‘जान है तो जहान है’ कृतियाँ

दो पुस्तकें ‘आरोपित एकांत’ और ‘जान है तो जहान है’ क्रमश: गद्य और पद्य-विधाओं के माध्यम से कोरोना के ‘कृष्ण’ और ‘शुक्ल’-पक्षों का जीवन्त चित्रण करती हैं। ये दोनों ही कृतियाँ समय-सत्य हैं, जिनका सामग्री-संकलन और सम्पादक मेरे प्रियवर शिष्य और ओजस्वी साहित्यशिल्पी-मीडियाधर्मी अमित राजपूत जी ने किया है। प्रकारान्तर से मेरे प्रतियोगी विद्यार्थी, तत्कालीन फ़तेहपुर के ज़िलाधिकारी संजीव सिंह (आइ० ए०एस०) के संरक्षण का परिणाम और प्रभाव है कि दोनों कृतियाँ अब सार्वजनिक हो चुकी हैं। इस उपक्रम में प्रेरणा के स्रोत अनुज, वरिष्ठ सम्पादक अरुण पाण्डेय जी की भूमिका श्लाघ्य रही।

प्रियवर सारस्वत हस्ताक्षर अमित राजपूत जी आज (१६ जनवरी) ही मेरे निवासस्थान पर आये और उक्त दोनों पुस्तकें भेंट कीं।

इन कृतियों में समय-सापेक्ष सर्जनात्मक योगदान करनेवाले समस्त फ़तेहपुरी रचनाधर्मी साधुवाद के पात्र हैं।

‘जान है तो जहान है’ का भूमिका-लेखन सार्थक रहा है।

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