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उत्तरप्रदेश में पहले ‘साँपनाथ’, अब ‘नागनाथ’!

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


आदित्यनाथ योगी और पिछली सरकार चलानेवालों में अन्तर ही क्या है?
उत्तरप्रदेश की वर्तमान सरकार चलानेवाले अपने चरित्र को किस रंग में रँगेंगे?
० ब०स०पा०-प्रमुख मायावती ने सत्ता में आने के बाद उत्तरप्रदेश के भवनों, पार्कों तथा कई स्थानों को अपने दल के झण्डे ‘नीले रंग’ में रँगवाकर राज्य की जनता के धन का दुरुपयोग किया था।
० स०पा०-प्रमुख अखिलेश यादव ने सत्ता में आने के बाद उत्तरप्रदेश की सरकारी बसों, एम्बुलेंस वाहनों, भवनों आदिक अपने दल के झण्डे ‘लाल और हरे रंग’ में रँगवाकर राज्य की जनता के धन का दुरुपयोग किया था।
० और अब भा०ज०पा०-प्रमुख आदित्यनाथ योगी सत्ता में आने के बाद और भी बढ़चढ़कर ‘रंग’ की राजनीति कर रहे हैं। उत्तरप्रदेश-शासन ने तो राज्य के सारे प्रतीकों को ‘भगवा’ रंग में रँगवा दिया है। ‘एनेक्सी’, ‘विधानसभा’, ‘मुख्य मन्त्री-आवास’, ‘मुख्य मन्त्री-कार्यालय’, सरकारी बसें, एम्बुलेंस वाहनों, राज्य-सरकार की ऋणराशि से प्राप्त ऑटो रिक्शा, पार्क आदिक ‘भगवा’ रंग में रँग गये हैं। इन अर्थहीन कार्यों में राज्य की धनराशि का निरंकुश होकर अपव्यय कराया जा रहा है, जो अति निन्दनीय और आपत्तिजनक है।
प्रश्न है, ‘एनेक्सी’, ‘विधानसभा’, ‘मुख्य मन्त्री-कार्यालय’ ‘सरकारी कार्यक्रमों के पण्डाल’ ‘राज्य की सूचना डायरी’ इत्यादिक को ‘भगवा’ रंग में रँगवाने के लिए उत्तरप्रदेश के मुख्य मन्त्री आदित्यनाथ योगी को संवैधानिक अधिकार है?
उत्तर है, कदापि नहीं है। उत्तरप्रदेश के प्रतीक-चिह्न ‘भारतीय जनता पार्टी’ की सम्पत्ति नहीं है। इस विषय को न्यायालय में ले जाने की आवश्यकता है, अन्यथा उत्तरप्रदेश की धर्मान्ध सरकार राज्य की जनता के करों का मुक्त और अनियन्त्रित होकर दुरुपयोग करती रहेगी।
आज भारतीय जनता पार्टी शासन-स्तर पर सब कुछ ‘भगवा’ रंग में रँगवाने की तैयारी कर ली गयी है।
अब उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री आदित्यनाथ योगी से कुछ प्रश्न हैं :——-
१- उत्तरप्रदेश का मुख्य मन्त्री बँटा हुआ है क्या?
२- ‘मुख्य मन्त्री’-कार्यालय, ‘एनेक्सी’, ‘विधानसभा-भवन’, ‘शासकीय बसें’, ‘एम्बुलेंस’, उत्तरप्रदेश के प्रतीक-चिह्न आदिक ‘भारतीय जनता पार्टी’ की धनराशि से बनाये गये हैं क्या?
३- उत्तरप्रदेश के वर्तमान शासन के पतन के बाद जब दूसरे दल की सरकार गठित होगी तब वह भी अपना रंग दिखायेगा और आपके ‘भगवा’ रंग मिटाकर अपना रंग दिखायेगा। इन सारे कामों में जो धनराशि व्यय होगी, वह इस राज्य के जनसामान्य की होगी। ‘रंग’ मिटाने और चढ़ाने में राज्य की जनता को कब तक आप लोग लूटते रहेंगे?
४- आपने अभी तक जनसामान्य के हित में ऐसा एक भी काम किया हो तो बता दीजिए?
५- आप ‘अतिवाद’ का परिचय देकर कौन-सा सन्देश देना चाहते हैं?
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय; १ नवम्बर, २०१७ ई०)