बी०टी०सी० परीक्षा स्थगित कराने के लिए रचे गये कुचक्र

◆ सरकार की मंशा साफ़-- नौकरी नहीं है

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


बी० टी० सी० परीक्षा इसीलिए निरस्त करायी गयी है, ताकि नौकरी न दी जा सके। इसमें ‘मन्त्री से सन्तरी तक’ की चाल है। यदि नहीं तो दूसरे अथवा तीसरे दिन ही परीक्षाएँ क्यों नहीं करायी गयीं? क्या सम्बन्धित अधिकारियों को नहीं मालूम– सावधानी के लिए ही प्रत्येक विषय के अनेक प्रश्नपत्र बनवाये जाते हैं। ऐसे में, परीक्षा लम्बित करने का उद्देश्य क्या है? यदि कौशाम्बी में प्रश्नपत्रों को परीक्षा से पूर्व ही सार्वजनिक कर दिया गया था तो अभी तक अपराधी क्यों नहीं पकड़े गये? क्या शिक्षाधिकारी, शिक्षामन्त्री तथा मुख्यमन्त्री कानों में ‘महकरानी’ डालकर ‘सुन्दरकाण्ड’ का पाठ कर रहे हैं?
प्रथम दृष्टि में यह सरकार-स्तर पर की-करायी गयी एक साज़िश है, जिससे कि समय बीत जाये और सरकार सफल अभ्यर्थियों को नौकरी देने से बच जाये; क्योंकि इस समय केन्द्र और राज्य-स्तर पर सरकारें सरकारी नौकरी देने से बचती आ रही हैं और अपनी ग़लत नीतियों को प्रभावी बनाकर देश को लूट रही हैं। इसके बाद भी निठल्ले-ठगे और मुँह-पिटाये लोग ‘जय श्री राम’, ‘मोदी-मोदी’ और ‘योगी-योगी’ चाटू औषधि में शहद लगाकर चाट रहे हैं।

मत भूलिए! भुक्खड़ भारतीय जनता पार्टी की जहाँ-जहाँ सरकार है वहाँ-वहाँ के लोग त्रस्त हो चुके हैं; परन्तु उसके बाद भी उस एक अदना और मामूली-से व्यक्ति का विकल्प पूछते हैं। सत्ता का मद होता ही ऐसा कि यदि एक कुत्ता भी प्रधानमन्त्री बन जाये तो उसका चोला ही बदल जाता है और वह इस सत्य को भूल जाता है कि वह कल तक एक कुत्ता था।

पूरी तरह से सुनियोजित ढंग से परीक्षा-प्रश्नपत्रों को सार्वजनिक कराया गया है और अब लीपापोती करने के लिए सभी ने चुप्पी साध रखी है। यदि नहीं तो अधिकारी मौन क्यों हैं?

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; ११ अक्तूबर, २०१८ ईसवी)

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