रामलला श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में मन्दिर हेतु हुआ भूमि पूजन

‘नारीभक्षियों’ की उत्पत्ति, लचर क़ानून व्यवस्था का परिणाम

ज्वलन्त विषय-

आरती जायसवाल (साहित्यकार, समीक्षक)

कोरोना काल में भी कानपुर में राजकीय बालिका गृह में
५७ लड़कियां कोरोना पॉजिटिव, २ नाबालिग लड़कियाँ आठ माह की गर्भवती, दोनों लड़कियों में से एक HIV से भी संक्रमित ए क अन्य लड़की हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित पाई गई हैं। उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। वर्तमान में राजकीय बालिका गृह पूरी तरह सील कर दिया गया है।

अब प्रश्न यह उठता है कि कितने बालिका गृह सील किये जाते रहेंगे ? सील करना समस्या का समाधान नहीं है, इनके संचालकों को और समस्त दोषियों को दण्डित किया जाना आवश्यक है।

कुछ वर्ष पूर्व भी मुज्ज़फरपुर का एक ‘बालिका गृह’ ज़बरन नाबालिग लड़कियों से देह-व्यापार करवाने के कारण यों ही सील हो चुका है। एक क़ानूनी प्रक्रिया के तहत एक सील होगा तथा दूसरी क़ानूनी प्रक्रिया द्वारा वे दूसरा खोल लेंगे क्योंकि उन्हें अपराध करना ही है। क्या सरकार अथवा ‘जाँच-कुचक्र’ में उलझा क़ानून इन बच्चीयों की पीड़ा का अनुमान लगा सकता है,अथवा अपराध करने वाले वे नरपिशाच उनकी पीड़ा को महसूस कर सकते हैं?

बालिका गृह में फूलते-फलते बाल/यौन अपराध लचर क़ानून व्यवस्था का परिणाम हैं । जिन बालिका गृहों को अनाथ और विवश बच्चियों की रक्षा हेतु बड़ी संख्या में अनुदान इत्यादि प्राप्त होते हैं, वस्तुतः वे भक्षक की भूमिका में घिनौने अमानवीय अपराधों में लिप्त पाये जा रहे हैं।

‘लड़कियाँ/बेटियाँ मात्र देह नहीं हैं । मन, मष्तिष्क और आत्मा भी हैं’ । नज़र पड़ी नहीं कि कुछ ‘नारीभक्षी’ उन्हें निगलने को आतुर हो उठते हैं । हर प्रकार के उपाय और पैशाचिक व्यवहार करते हुए ये समाज के कुष्ठ के रूप में पनपते हैं। जिन्हें अपने कुकर्मों से भय नहीं लगता वे निस्सन्देह मानव कहलाने योग्य नहीं।

बाल/यौन अपराधों का अड्डा बनते ये बालिका गृह और इन्हें चलाने वाले ‘नारीभक्षियों’ को कठोर दण्ड के साथ-साथ सामाजिक बहिष्कार की भी आवश्यकता है । वे इसी घर-परिवार, समाज का हिस्सा हैं जो रात के अँधेरे में अपराध करते हैं और प्रातः अपनी बनावटी छवि धारण करके समाज में घुल-मिल जाते हैं। अपराधी प्रवृत्ति के लोग को समाज में जीवित रहने के अधिकारों को पूरी तरह समाप्त करना होगा तभी ‘बेटी-बचाओ,बेटी पढ़ाओ’ सही मायनों में सार्थक होगा अन्यथा यह मात्र ढोंग,ढकोसला और जघन्य अपराधों पर लीपा-पोती की भाँति है।

url and counting visits