विश्व को शांति और विश्वबंधुत्व का पाठ वही धर्म पढ़ा सकता है, जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम् ‘ की बात करता हो

November 17, 2017 0

दिवाकर दत्त त्रिपाठी- आज पूरी दूनिया में शांति और सेवा की आड़ में धर्मपरिवर्तन करने वाले ईसाई ,कभी जेहादी आतंकवादियों से भी बर्बर थे । हिटलर के नेतृत्व में इन्होंने लगभग 60 लाख यहूदियों और […]

जीवन मूल्य : मानव तुम लोलुपता छोड़ों , कुछ धर्मशील ही बन जाओ

October 29, 2017 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद पथ प्रवीण होता अनुरागी, जो संघर्ष निरन्तर करता है। पथ पार चला जाता बैरागी, जो ध्यान समर्पित रखता है।। चलो ‘जगन उस पार चले , इस पार नहीं कुछ रखा है। केवल […]

‘छठि’ याद अवला से अँखिया में बचपन जीये लागल!

October 27, 2017 0

डाकेटर पिरीथिबीनाथ पाँड़े (डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय)- ‘छठि’ के नउवा सुनि के आपन गाँव, घर, दुआरि आ पोखरा याद आवे लागल। मुँड़ी पर फल-फूल, सिंघाड़ा, ठेकुआ, पूआ-पूड़ी, भीगल चाना, उखि के गेंड़, पटउरा, बताशा, लचिदाना, हलुआ […]

जो राष्ट्रगान का सम्मान नहीं करते बल्कि विरोध करते हैं वे राष्ट्रद्रोही हैं

October 26, 2017 0

 राजेंद्र, विश्व संवाद केन्द्र लखनऊ- राष्ट्रगान पर बहस करना अत्यंत मूर्खता है, समाज में कम से कम दो किस्म के लोग हैं जिसमें एक वे लोग हैं जो अपने माता-पिता को ईश्वर मानते हैं उनकी […]

प्राइमरी पाठशाला में पहुंची डीएम तो क्लास में सोते मिले बच्चे 

October 25, 2017 0

         थाने में डीएम, निरीक्षण में डीएम, समाधान दिवस में डीएम, रात्रि निरीक्षण में डीएम, लगभग 5 माह पूर्व योगी राज में हरदोई आयीं डीएम शुभ्रा सक्सेना का ध्यान शिक्षा के क्षेत्र […]

“ज्ञान पाने के लिए झुकना ही पड़ता है, शिष्यत्व का भाव सब कुछ देने में समर्थ है”

October 21, 2017 0

आप यह बात ध्यान रखना कि ईश्वरीय दिव्य ज्ञान को यदि कोई प्राप्त करना चाहता है , तो उसे शिष्य बनना ही पड़ेगा। बिना गहरे शिष्यत्व भाव के आए ज्ञान की प्राप्ति सम्भव नहीं। इस […]

दीपावली की स्निग्धिता में, नव दीप फिर से जल उठे

October 20, 2017 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद- दीपावली की स्निग्धिता में, नव दीप फिर से जल उठे। आशा और विश्वास के , नव पुष्प फिर से खिल उठे।। चहुँओर ओर हैं दुश्वारियाँ, जीवन में हैं कठिनाइयाँ। अंधकार और प्रकाश […]

“आपके मन के भावों को जानवर तक समझ जाते हैं, अंतर्मन को स्वच्छ बनाइए” 

October 19, 2017 0

देखिए! आप अपने मन के भावों को छुपा तो सकते हैं, लेकिन यदि आप यह मान लें कि सामने वाला कुछ समझ नहीं पा रहा है और वह अनजान है, तो आप ग़लती पर हैं, […]

‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ में कुछ अरबी-फ़ारसी के शब्दों की जानकारी

October 16, 2017 1

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- आप उन शब्दों पर ग़ौर करें, जिनके लिखने-बोलने में आंशिक चूक हो जाने पर अर्थ का ‘अनर्थ’ हो जाता है | निम्नांकित अरबी-फ़ारसी के शब्दों में नुक़्त: लगाने और न लगाने से […]

स्वतंत्र मुक्तक : हर एक मन में इक नई जंग

October 16, 2017 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद अब तो चरागों को तेल नहीं मिलते अब तो मिट्टी के वो ढ़ेर नहीं मिलते। बचपन कॉन्वेंट के बस्तों से बदल गया, अब तो ख़ुशी के दो बोल नहीं मिलते।। ————————————————- फ़रेब […]

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