‘मन’ किसी भी निर्णय के प्रति ‘शंकालु’ हो सकता है

April 21, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ० पर्याप्त साक्ष्य रहते हुए भी ‘राजेश तलवार और नूपुर तलवार’ दोषमुक्त हो गयीं। ० माले-विस्फोट-प्रकरण के अभियुक्त दोषमुक्त हो गये। ० गुजरात-काण्ड के दोषी मुक्त हो गये। ० जामा मस्जिद-काण्ड के […]

नरेन्द्र मोदी का ‘विकल्प’ यत्र-तत्र-सर्वत्र

April 17, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय दया आती है, ऐसे प्रबुद्ध-वर्ग की मानसिकता पर जो ‘किसी’ का ‘विकल्प’ पूछते हैं। ऐसे लोग मेरे इस प्रश्न का जैसे ही उत्तर देंगे, उनके प्रश्न का उत्तर उन्हें स्वत: प्राप्त हो […]

देश को महागर्त में ले जाते नरेन्द्र मोदी!

April 16, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय नरेन्द्र मोदी ने सत्तासीन होने से पूर्व लोकसभा-चुनाव में गर्जना करते हुए कहा था : संसद् को अपराधी सांसदों से हम मुक्त करेंगे। यथार्थ : आज देश की संसद् में आपराधिक छविवाले […]

नरेन्द्र मोदी ने ‘नारी-सम्मान’ को दरकिनार कर, ‘अम्बेदकर मेमोरियल’ का उद्घाटन किया!

April 14, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज, जब बहुत बड़ी संख्या में देशवासी देश के राजनेताओं-द्वारा किये जा रहे नारीशक्तिमान-मर्दन के विरुद्ध खड़े हुए हैं और सरकार से प्रश्न कर रहे हैं :– देश की बेटियों का शीलहरण […]

एक आस दिखी, तोड़ नहीं सकता जिसे : पुलकित खरे (जिलाधिकारी हरदोई)

April 13, 2018 0

पुलकित खरे (जिलाधिकारी हरदोई) की फ़ेसबुक वॉल से- कुछ दिन मेरे खाते में भी ऐसे होते हैं, जब सर्विस की कुछ मजबूरियाँ परेशान करती हैं, हैरान करती हैं और घुटन की कगार पर ले जाती […]

उत्तरप्रदेश-सरकार बलात्कार के आरोपित विधायक के साथ!

April 12, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय  सामूहिक बलात्कार की पीड़िता चिल्ला-चिल्लाकर बता रही है : मेरे साथ सामूहिक बलात्कार और मेरे पिता की मार-मारकर और शरीर पर पानी डालकर बुरी तरह से घायल कर हत्या करने के लिए […]

बलात्कारी विधायक को उत्तरप्रदेश की सरकार बचाने में क्यों लगी है?

April 11, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय उत्तरप्रदेश की सरकार चलानेवालों को धिक्कारने के लिए कोई शब्द नहीं है! आदित्यनाथ योगी स्वयं को योगी कहते हैं; भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेता नरेन्द्र मोदी “बेटी बचाओ” की जुगाली कर […]

शब्दधर्मी परा-प्राकृतिक शक्ति धारण करता है

April 7, 2018 0

 डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आप यदि वास्तव में, अपनी रचनाशीलता को जीते हैं और भोगते हैं तो आपकी उपयोगिता और महत्ता सार्वकालिक है, क्योंकि ईमानदार शब्दधर्मी की सार्वत्रिक प्रतिष्ठा होती है। निस्सन्देह, वह विनम्र होता है, […]

सन्त, साधु, योगी आदिक राजनीति में लिप्त नहीं होते

April 6, 2018 0

  डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सुर-सुरा-सुन्दरी में निमग्न ‘हिन्दू-संस्कृति’ के पोषण करने के नाम पर ख्यात-सुख्यात-कुख्यात बाबाओं की एक ऐसी श्रृंखला छनक-छनक कर सामने आने लगी है, जो ‘भूमिगत’ शैली में निर्दोष भावना-संवेदना के साथ क्रूर […]

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