The Nature of Love
Dr. Raghavendra Kumar Raghav— The human body is composed of the five great elements—earth, water, air, fire, and ether. In the Indian philosophical tradition, these five are not merely components of the body; they are […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav— The human body is composed of the five great elements—earth, water, air, fire, and ether. In the Indian philosophical tradition, these five are not merely components of the body; they are […]
शाश्वत तिवारी– देश के भीतर हो रही शिक्षा, प्रतिष्ठा और आतंक की खतरनाक जुगलबंदी पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह द्वारा ‘वाइट-कॉलर आतंकवाद’ को लेकर व्यक्त की गई चिंता केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि भारत की […]
प्रयागराज। अभिनव वर्ष की पूर्व-संध्या मे ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर से एक राष्ट्रीय आन्तर्जालिक बौद्धिक परिसंवाद-आयोजन किया गया, जिसमे प्रबुद्धजन ने अपनी-अपनी चिन्ता के साथ अपना-अपना विचार और संकल्प सार्वजनिक किया। आशा राठौर (सहायक प्राध्यापक– […]
मेरे दादा (भाई बाबा) उस पीढ़ी के मुखिया और बड़े भाई थे, जिसमें बड़े भाई का सम्मान पिता की तरह होता था। साथ ही बैसवारा की परंपरा कि बड़े भाई को खेती-बाड़ी और घर-दुवार के […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••(शीघ्र ही इसके समस्त पक्षोँ पर विस्तृत विश्लेषण सार्वजनिक करूँगा।) उत्तरप्रदेश का पारा तो गिर रहा है; परन्तु सियासी पारा तेज़ी मे चढ़ता दिख रहा है। हाल ही मे कुन्दरकी के […]
Dr. Raghavendra Kumar Tripathi Raghav– A meaningful understanding of Indian scientific heritage requires a comparative perspective that situates it alongside other global scientific traditions, particularly Western science. Such a comparison does not aim to establish […]
भारतीय परम्परा के आधुनिक नैतिकता से अधिक वैज्ञानिक होने का प्रमाण : नियोग भारतीय वैदिक परंपरा को लेकर आज एक सामान्य प्रवृत्ति दिखाई देती है कि हम उसे या तो आँख मूँदकर पूजते हैं या […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••ख़ाली पदोँ को कब भरवाओगे? महँगाई अपनी चरम सीमा की ओर भाग रही है; नियन्त्रण के लिए कौन-सा मार्ग अपनाये हो? तुम्हारे देश की आर्थिक स्थिति चरमरा चुकी है; रिश्वतख़ोरी, […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• अब तक का सर्वाधिक निर्लज्ज और निखट्टू कप्तान सूर्यकुमार यादव है, जोकि शर्मनाक पराजय के बाद भी च्यूइंगम चबाते हुए, बेशर्म की तरह से दाँत निकाले रहता है। वह अब […]
राघवेन्द्र कुमार राघव– रिश्ते पर धूल जमी हो तोधूल उड़ा दो यारों।दुनिया में ग़म ही तो हैं खुशियों को ढूंढों यारों। सभी चढ़ें हैं वक्त के रथ परयूँ ना उम्र गुजारो।एक बार यदि ये गुजरीतो […]
Dr. Raghavendra Kumar Tripathi Raghav– O’ My Brother! O’ My Dear! You are my heart’s delight.Without you, life would be a dark and endless night. In your eyes, I see wonderful world and a future […]
संविधान-दिवस के अवसर पर विशेष प्रस्तुति विषय-प्रवर्तन करते हुए, जबलपुर उच्च न्यायालय की अधिवक्ता रश्मि मल्होत्रा ने बताया– बेशक, आज संविधान ख़तरे मे है। जिन्हेँ संविधान के ‘स’ की समझ नहीँ और देश के स्वयम्भू […]
राघवेन्द्र कुमार– शक्तिशाली वो कहलाते हैं, जो अपनी ताक़त का इस्तेमाल दूसरों को ऊपर उठाने में करते हैं। यह बात हमें सिखाती है कि असली शक्ति दूसरों पर हावी होने में नहीं, बल्कि उनकी मदद […]
शाश्वत तिवारी– माना कि प्रशांत किशोर बिहार चुनाव में सुपर फ्लॉप साबित हुए हैं। लेकिन गलती क्या है प्रशांत किशोर की ? यही ना कि वो बड़ी-बड़ी बातें कर रहा था। ओवर कॉन्फिडेंस में दिख […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जे० एन० यू०) ब्राह्मण-वर्ग का धुर-विरोधी रहा है, वहाँ छात्रसंघ के चुनाव मे ‘ब्राह्मण’ शीर्ष पर दिख रहा है; और वह भी वामपन्थियोँ के संघटन का […]
– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्रयागराज के डी० एम० श्री मनीषकुमार वर्मा प्रयागराज के बुद्धिजीवि-वर्ग से “अलग से मिलते नहीँ साहेब।” मैने तत्काल प्रतिक्रिया की थी, “आपके डी० एम० गवर्नर हो गये हैँ क्या?” मैने […]
शाश्वत तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार– बिहार में हुए special revision ने साबित कर दिया, कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं को कोई शिकायत नहीं है। चुनाव आयोग को न के बराबर शिकायतें मिलीं, इसीलिए voter list के […]
“बरषा बिगत सरद रितु आई।लछमन देखहु परम सुहाई॥फूले कास सकल महि छाई।जनु बरषाँ कृत प्रगट बुढ़ाई॥”. यानी इंद्रदेव ने विश्राम लेने की घोषणा कर दी है। बारिश बीत चुकी है। अब कुआँर (आश्विन) आ गया […]
बैसवारा में शादी -ब्याह जैसे शुभ अवसरों पर हम परमात्मा, अपने परिवारजनों, रिश्तेदारों और इष्ट मित्रों के अलावा अपने पूर्वजों को भी आमंत्रित करते हैं। मुझे याद है विवाह के एक सप्ताह पहले से ही […]
हमारे समय में यानि 80-90 के दशक तक पढ़ाई का इतना दबाव बच्चों पर नहीं था। विद्यालय जरूर हम नियमित जाते थे लेकिन वहां से घर आने के बाद विद्यालय को लगभग भूल ही जाते […]
शाश्वत तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ— काठमांडू में रिपब्लिक भारत (R BHARAT) के स्टेट हेड और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार राघवेंद्र पांडेय पर हमला केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह भारत की गरिमा […]
1984 की बात है। ‘बड़ा पेड़’ गिरने के बाद धरती हिलकर लगभग शांत हो चुकी थी। मैं पापा के साथ मुंबई घूमने गया था, अपने नाना के घर। चूंकि उन दिनों किसी घर का दामाद […]
‘उत्तरप्रदेश अधीनस्थ चयन आयोग की प्रारम्भिक पात्रता-परीक्षा’ मे पचास से अधिक अशुद्ध शब्दप्रयोग और अन्य व्याकरणात्मक दोष दिखने का दावा•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• प्रश्नपत्र तैयार करनेवाले को ‘भेड़िया’, ‘बन्दरिया’, ‘नवसिखिए’ और ‘महत्त्व’ लिखने भी नहीँ आता!..?अभी हाल मे […]
एक अन्तरंग संस्मरण आज (२७ जुलाई) भ्राताश्री, पूर्व-राष्ट्रपति अबुल कलाम जी की निधनतिथि/का निधनदिनांक (‘दिनाँक’ अशुद्ध है।) है। ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय डॉ० अब्दुल कलाम प्रेय थे तो श्रेय भी। उन्होंने जब राष्ट्रपति-पद की […]
बुढ़ापे में… जब बाल सफेद हो जाएंगे,कमर झुक जाएगी,आंखों पर मोटा चश्मा लग जायेगा,पर सीना तब भी चौड़ा रहेगा। अपने नाती-पोतों और गांव-जंवार वालों कोगर्व से बताया करूंगा— कि जब मैं फौज में ‘जवान’ था,और […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आस्था, श्रद्धा और विश्वास मन-प्रधान होता है, न कि तन-प्रधान। “मन चंगा तो कठौती मे गंगा” को योँ ही नहीँ कहा गया है। इतना ही नहीँ, परम ईश्वरीय शक्ति विष्णु […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• विगत दो दशक से जिस तरह से शिक्षा-परिषदोँ मेँ अधिकतर विद्यार्थियोँ को ८० से १०० प्रतिशत अंक दिये जाते रहे हैँ, उससे उतने अंक पानेवाले वे विद्यार्थी भी आश्चर्यचकित रह […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••• जब गली-गली, कूचे-कूचे ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का गीत ढोल, मजीरा, सारंगी, मृदंग के साथ गाया जा रहा था तब ऐसा लग रहा था, मानो बेटियोँ के लिए शिक्षा ‘स्वर्ग का […]
हजारों सालों से सांप इंसानी सभ्यता का हिस्सा रहे हैं — कभी यह खेतों की मेड़ों पर फुफकारते दिखे हैं तो कभी जंगलों और झाड़ियों में सरसराते नजर आए। पौराणिक कथाओं और लोककथाओं में पूजे […]
कुछ वर्ष पूर्व तक हमारे गांव ‘बरी’ का दक्षिणी और पश्चिमी भाग ज्यादातर ऊसर ही हुआ करता था। इन दो दिशाओं में दूर-दूर तक फैले ऊसर में कुछ भी न उगता था। बाहर से लोग […]
वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के पश्चात वर्तमान संस्थान में जब मैं नया-नया आया, तो हमारी ब्रांच में एक शांत, सौम्य और सुदर्शन व्यक्तित्व के अधिकारी थे। मैंने नोट किया कि जो भी उन्हें मिलने आता […]
——०चिन्तन की एक कड़ी०—— ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कई सहस्र वर्ष से देश के मनीषियोँ ने जो कुछ चिन्तन-मनन-मन्थन किया था, उन सबकी गूढ़ सांस्कृतिक अनुभूति से काव्य का शिष्ट हृदय आर्द्र बना हुआ […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• रुपये फेँके जा रहे हैँ; बहुसंख्यजन अपनी आजीविकावृत्ति (पेंशन) के रुपये कुकुरमुत्ते-से उगे प्रकाशकोँ की जेब मे डालते आ रहे हैँ और पाण्डुलिपियाँ ‘पुस्तक’ के रूप मे सार्वजनिक होती आ […]
विद्यार्थी जीवन में ज्यादातर छात्र जी-जान से कोशिश करते हैं कि वह अपने गुरुजी की ‘गुड बुक’ में किसी तरह जगह बना लें। गुरुजी उसे जानें, सब छात्रों के सामने उसके नाम से पुकारें, हर […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• अपने गाँव मिरीगिरी टोला, बाँसडीह, बलिया (उत्तरप्रदेश) मे अपना एक स्वतन्त्र घर हो, यह ‘मेरी’ इच्छा रही थी; क्योँकि जब मै गाँव मे संयुक्त परिवार के लिए निर्मित घर मे […]
भारत की वायुसेना सदैव अनुशासन, तकनीकी श्रेष्ठता और राष्ट्रसेवा की प्रतिमूर्ति रही है। लेकिन इस गौरवपूर्ण संस्था के भीतर भी कुछ समय पूर्व तक धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जाता […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• अब, जब उत्तरप्रदेश-सरकार को लगने लगा है कि जिन प्राथमिक शालाओँ मे विद्यार्थियोँ की संख्या ५० वा उससे कम है, उसे किसी समीप की पाठशाला मे विलय कर दिया जाये, […]
शरद की ठिठुरन और ग्रीष्म की तपन– ये दोनो अन्तर्विरोधी हैँ। इन दिनो ग्रीष्म-तपन की ही परिचर्चा है। जन-जन ग्रीष्म के कोप से आकुल-व्याकुल है तो दूसरी ओर, सूर्य महाराज जड़-चेतन की धैर्य-परीक्षा कर रहे […]
गर्मी की छुट्टी की लंबी दुपहरियों में हमारा मुख्य एजेंडा होता था घर वालों की नजर बचाकर घर के पास स्थित दनकुंवा तालाब में नहाने जाना। कभी हम इसमें सफल हो जाते तो कभी असफल। […]
पापा पुरुषार्थ में विश्वास रखते थे और अम्मा अनुकंपा में। पापा का विश्वास था कि मनुष्य अपने श्रम से, पौरुष से अपना अभीष्ट लक्ष्य प्राप्त कर सकता है जबकि अम्मा का दृढ़ मत था कि […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• बहुत दूर जाने की बात नहीँ है, बहुसंख्य इलाहाबादी प्रबुद्धजन ही नहीँ जानते कि देश मे सबसे पहले इलाहाबाद आज़ाद हुआ था और एक दिन के लिए देश की राजधानी […]
कुछ लोग गर्मियों की छुट्टियों में जम्मू की सैर करने और मां वैष्णो देवी के दर्शन करने यह सोचकर निकल पड़ते हैं कि एक पंथ दो काज हो जाएगा। माता के दर्शन भी हो जाएंगे […]
नई दिल्ली। राष्ट्रीय गोधन महासंघ द्वारा राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय गोधन समिट 2025 का आयोजन किया गया है। यह समिट 5 नवंबर से 10 नवंबर की तिथियों में मेजर ध्यान चन्द्र स्टेडियम में संपन्न होगी। […]
एक बेबाक संस्मरण ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• जनाब! लखनऊ भी एक शहर है, जो दिल्ली की तरह आलम (सबसे अधिक जाननेवाला) मे इन्तिख़ाब (बहुतोँ मे से कुछ को छाँट लेना) तो नहीँ; लेकिन अपनी […]
ईसा से 2737 साल पहले एक दिन चीन के सम्राट शेन नुंग के सामने रखे गर्म पानी के प्याले में कुछ सूखी पत्तियां आ कर गिरी, जिनसे पानी में रंग आया और जब उन्होंने उसकी […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आज पंचानवे प्रतिशत से अधिक का शोधलेखन ‘दो कौड़ी’ का होता है। यदि निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ (शोधनियमानुसार) उनके शोधकर्म का परीक्षण और मूल्यांकन किया जाये तो बहुसंख्य शोधार्थी […]
यह उन दिनों की बात है जब ‘हॉलीडे होमवर्क’ जैसी क्रूर प्रथा चलन में नहीं आई थी। ‘समर हॉलीडे’ मतलब कॉपी-किताब को बाय-बाय और फुल टू मस्ती को हैलो-हाय। ‘समर हॉलीडे’ मतलब पढ़ाई लिखाई को […]
1992 की हाईस्कूल(10वीं) की परीक्षा में मुझे हिंदी में 58 अंक जबकि बायोलॉजी में 75 (डिस्टिंक्शन) अंक मिले। 1994 में इंटरमीडिएट की परीक्षा में मुझे अंग्रेजी में मात्र 46 अंक जबकि रसायन विज्ञान में 63 […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज मुझे आत्यन्तिक सुख और संतोष का अनुभव हुआ है। मैने विगत दिवस अपने बचपन के एक ऐसे मित्र के विषय मे बताया था, जिसके साथ मैने पहली कक्षा से […]
समय सबको समान रूप से देखता आ रहा है। वह सबकी समस्त नकारात्मक-सकारात्मक गतिविधियोँ का एकमात्र साक्षी रहा है। वह प्रत्येक मनुष्य का मूल्यांकन उसके कर्मो के आधार पर करता आ रहा है। समय कभी […]
आज से करीब 35 वर्ष पहले सबसे छोटे चाचा की शादी के लिए के लिए एक बेहद धार्मिक व्यक्ति आये थे। हालांकि किन्हीं कारणों से वह संबंध तो नहीं हो पाया लेकिन उनके द्वारा दिये […]
“हो रहा है ज़िक्र पैहम आम काआ रहा है फिर से मौसम आम का” ईश्वर ने हमें जो तमाम नेमते दी हैं, उनमें से आम मेरे लिए सबसे मनभावन, स्वादिष्ट और लजीज है। दिल्ली जैसे […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••• मनुष्य ‘मनुष्यता’ की बात तो करता है; किन्तु अपने भीतर की शुष्क मानवीय संवेदना पर दृष्टिपात करने मे क्षम (‘सक्षम’ अशुद्ध है।) नहीँ रहता। यही कारण है कि उसके उपदेश […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• गत रविवार को पत्नीसहित बेटियाँ लखनऊ आयीँ। तीनो की ज़िद थी, ‘लुल्लू माल’ घूमने की। पत्नी ‘इमामबाड़ा’ की रट लगा रखी थीँ। मैने सोचा– भावना का सम्मान करना चाहिए और […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••• अकस्मात् फ़ोन की घण्टी बजी। मैने पूछा, “आप कौन हैँ?”परिचय प्राप्त हुआ, फिर उनका स्वर उभरा,”आपका दर्शन करना चाहता हूँ।” मेरा उत्तर था, “दर्शन तो देवी-देवता का किया जाता है; […]
आपमे यदि प्रतिभा, योग्यता, पात्रता, प्रतिबद्धता, संसार को जीतने की इच्छा (जिगीषा) और सामर्थ्य हो तो आप कभी परमुखापेक्षी (पराश्रित/परजीवी/परावलम्बी नहीँ हो सकते।आपका परम धर्म है, ‘केवल कर्म करते रहना’। आपकी धारणा होनी चाहिए– अभिलषित/अभीप्सित […]
आम तो आम, गुठली बताये पिय का मुकाम! हमारे यहां बैसवारा में बसंत पंचमी के दिन धोबिन एक थाल में आम के बौर (मंजर) , सिंदूर और साथ ही शिव पार्वती और गणेश की मूर्ति […]
राहुल सांकृत्यायन के जन्म-दिनांक ९ अप्रैल पर विशेष प्रस्तुति••••••••••••••••••••••••••••••••••••• विश्व के महानुभवी राहुल सांकृत्यायन के जन्मदिनांक ९ अप्रैल की पूर्व-संध्या मे ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर से एक राष्ट्रस्तरीय आन्तर्जालिक बौद्धिक परिसंवाद का आयोजन ‘सारस्वत सदन’, […]
8 अप्रैल विशेष: शाश्वत तिवारी– 8 अप्रैल 1929 की वह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ थी। भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने न केवल अंग्रेजी सत्ता को चुनौती दी, बल्कि […]
शाश्वत तिवारी– जब-जब जगत को दुःख, अधर्म और अराजकता ने घेरा, तब-तब राम ने अवतार लिया। तुलसीदास ने जब ‘रामचरितमानस’ की रचना की, तब भारत सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक रूप से गहरे संकट में था। […]
व्याकरणवेत्ता एवं भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने हाल ही मे उत्तरप्रदेश लोकसेवा आयोग, प्रयागराज की ओर से सहायक अध्यापक-पद पर चयन किये जाने की परीक्षा-प्रक्रिया के अन्तर्गत ‘स्क्रीन टेस्ट’ मे दीर्घ उत्तरीय प्रश्नो को […]
आचार्य पण्डित पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला••••••••••••••••••••••••••••••••••••• वास्तव मे, इस शब्द की शुद्ध वर्तनी है, ‘पसमान्द:’, जो ‘पसमान्दा’ नाम से प्रचलित है। यह फ़ारसी-भाषा का शब्द है, जो शब्दभेद के विचार से विशेषण-शब्द है। इसका शाब्दिक […]
गुप्ता जी ग्वालियर वाले!! हमारे मित्र गुप्ता जी बहुत ही समझदार और कोमल प्रकृति के व्यक्ति हैं। वह किसी भी कार्य मे महिला-पुरुष का भेदभाव नहीं करते हैं। इसलिए गुप्ताजी सर्दियों के मौसम में लहसुन, […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav In the intricate tapestry of human existence, the relentless pursuit of progress, whether in the realm of the spirit or the tangible world, is a constant and driving force. However, this […]
दारू बैसवारा में बड़ी बदनाम रही है!! हमारे यहां चाहे किसी व्यक्ति में दसियों गुण हों, लेकिन अगर वह दारू पीता हो तो सारे गुण गोबर हो जाएंगे। उसे सिरे से यह कहकर खारिज कर […]
“होली आयी रे कन्हाई,रंग छलके,सुना दे ज़रा बांसुरी।” कहने को तो होली फागुन मास की पुन्नवासी (पूर्णिमा) को मनाई जाती है लेकिन इसके रंग प्रकृति में, माहौल में और तन मन में महीनों पहले से […]
होली पर फिल्माये गए किसी भी गीत का मूल भाव है- मस्ती, धमाल, शोखी, शरारत, प्यार, मनुहार, इनकार और इकरार।होली आने वाली है तो आज होली पर फिल्माए गए तमाम बॉलीवुड गीत देख रहा था। […]
फागुन का अर्थ है मस्ती, मदहोशी, मनुहार और होली का अर्थ है अपने तमाम तनावों, चिंताओं और परेशानियों को एक कोने पर रख कर फाग, भांग और रंगों के सुरूर में डूब जाना। शायद इसीलिए […]
◆ हमारे लेखन के अन्तर्गत पंचमाक्षर मे अनुस्वार का व्यवहार नहीँ है; क्योँकि पंचमाक्षर अनुस्वारयुक्त होता है। उसके तद्भव वा देशज रूप मे आवश्यकतानुसार ध्वनिप्रभाव को न्यून और अधिक करने के लिए अनुनासिक का व्यवहार […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक कथा है, जिसके आधार पर तीर्थराजप्रयाग को तीर्थोँ मे शीर्ष स्थान दिया गया है। वह कथा इसप्रकार है :–एक बार की बात है। ब्रह्मा ने सोचा कि पृथ्वीलोक मे […]
‘धन्धेबाज़ यूट्यूबर अमरनाथ सर’ उर्फ़ अमरनाथ गुप्ता विद्यार्थियोँ के लिए अत्यन्त घातक सिद्ध होता हुआ!– बारह ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• यहाँ यूट्यूबर अमरनाथ गुप्ता के वीडियो के दो स्थिर चित्र हैँ :– पहला, अँगरेज़ी-भाषा […]
शाश्वत तिवारी— कुछ लोग तर्क देते नज़र आ जाएंगे कि ऐसा इसलिए किया जाता है कि ताकि जाने पहचाने चेहरे ज्यादा ताकतवर न बन जाएं, जिससे पार्टी में ऊपर बैठे लोगों को खतरा हो जाए। […]
लड़कों की शादी पूरब में और लड़कियों की शादी पश्चिम में करने की हमारी सदियों पुरानी परंपरा रही है। अतः बैसवारा में बैस लड़कों की शादियां ज्यादातर पूरब यानि प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, जौनपुर के सोमवंशी, कनपुरिया, […]
डॉ० सुधान्शु बाजपेयी– हिंदी और उर्दू दो नहीं एक ही भाषा थी लेकिन हिंदी को हिंदुओं की भाषा और उर्दू को मुसलमानों की भाषा इतनी बार और इतने तरीकों से बताया गया कि इतना बड़ा […]
मुझे नहीं पता कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन में भगदड़ किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है? लेकिन कुछ प्रश्न मेरे दिमाग में कौंध रहे हैं- रेल प्रशासन को, जिम्मेदार लोगों को […]
आजकल के नौजवानों को प्यार बहुत जोर से आता है। रोज डे, प्रोपोज़ डे, किस डे, हग डे से होता हुआ आधुनिक लव कुछ ही दिनों में ओयो रूम तक जा पहुँचता है। हालांकि कार्बाइड […]
अँगरेज़ी मे दो शब्द हैँ :– ‘डिस्गाइज़्ड’ और ‘एक्सटोलिंग वॉइस’। इनको कुछ छद्म यूट्यूबरोँ ने पहन-ओढ़कर बहुरूपिया एवं गिरगिटिया बना लिया है। उन्हीँ मे से प्रमुख है, ख़ुद को ‘सर’ कहनेवाला ‘अमरनाथ सर’ उर्फ़ ‘अमरनाथ […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–नृप निरीह निकृष्ट नटी, नागर नयना नार।नलिन नागरक नागरी, नाशक नारक क्षार।।दो–मुकुर मुकुल मन-मन्त्रणा,काकुल कंक कुलीन।चारु चित्त चातुर चरित, दंशदायिनी दीन।।तीन–मनका मन मनका मती, मन मनका मतभेद।मनोयोग मरघट मरण, मन-मानस […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• इस धूर्त्त को अच्छी तरह से पहचानिए, जो स्वयं को हिन्दीभाषा/सामान्य हिन्दी का ‘सर’ कहता है; परन्तु इसका हिन्दीबोध नितान्त निचले स्तर का है। यह यूट्यूब पर अपनी कक्षा चलाता […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• ऐसे बहुत सारे लोग हैँ, जो वीडियो बनाकर प्रतियोगी विद्यार्थियोँ के लिए हिन्दी-शिक्षण करने का धन्धा शुरू कर चुके हैँ। कुछ ऐसे भी हैँ, जो पहले किसी थोक के भाववाले […]
ये साहिब एक यूट्यूबर हैँ और सार्वजनिक रूप से हिन्दीभाषा और व्याकरण की घुट्टी अपने ही अन्दाज़ मे पिलाते आ रहे हैँ। ये ‘सर’ हैँ। वैसे तो ये विद्यार्थियोँ के बीच ‘अमर नाथ सर’ के […]
शाश्वत तिवारी– बहुत से लोग सोचते हैं कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री भगवा पोशाक पहनते हैं, इसलिए एक “सन्यासी” हैं, लेकिन उनके बारे में जो तथ्य सामने आए हैं वो चौंकाने वाले ओर प्रेरणादाई हैं। सबको […]
हम लोग जिस पीढ़ी के हैं उसमें पिता के सामने तमाम मजबूरियां रहती थी । वह चाहते हुए भी अपने बेटे को सबके सामने दुलार नहीं सकता था, प्यार नहीं कर सकता था। पूरे परिवार, […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक बार अधर्म ने धर्म से कहा, “धर्म भाई! मृत्युलोक मे ऐसा एक भी व्यक्ति नहीँ दिखता, जो तुम्हारे तात्त्विक रहस्य को जान सके; इसका कारण क्या है?” धर्म ने […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आप नीचे दिये गये सारे पोस्टरोँ मे दिखाये गये समाचार-शीर्षकोँ को अच्छी तरह से पढ़ते जाइए। ये ‘रिपब्लिक भारत’ की बेहद निर्लज्ज, निकृष्ट एवं निन्दनीय पत्रकारिता की एक बानगी है। […]
देश के प्रख्यात टी० जी० टी०-पी० जी० टी०-सहायक प्राध्यापक हिन्दीशिक्षाविद्, ‘हिन्दी-संसार’, प्रयागराज नामक शिक्षण-संस्थान के निदेशक एवं परमप्रिय शिष्य डॉ० अशोक स्वामी जी आज (१२ जनवरी) हमारे ‘सारस्वत सदन’ मे आये थे। हमने लगभग एक […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• धिक्कार है, उन माँ-बाप को, जो अपनी बेटियोँ को ‘वस्तु’ समझकर तथाकथित साधुओँ को दान करते आ रहे हैँ। नीचे चित्र मे दिख रही बालिका आगरा की है, जिसका नाम […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• देश को स्वतन्त्रता प्राप्त होने के पश्चात् ‘मीडिया-जगत्’ मे ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी राजनैतिक दल की सरकार ने अपनी ओर से यह मार्गदर्शिका निर्धारित कर दी […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• (यह ललकारभरा खुला संदेश उन सबके लिए है, जो सर्वथा व्यावहारिक ‘जनवरी से दिसम्बर-माह’ को भारतीय संदर्भ मे स्वेच्छा से अपनाते आ रहे हैँ और अपना मूल चरित्र भी प्रकट […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी) हम यहाँ आप सबको ‘अभिनव’ शब्द के अर्थ और उसके प्रयोग के औचित्य को उत्पत्ति-सहित समझायेँगे। इसके अतिरिक्त नव, नया, नवल, नवीन, नूतन इत्यादिक शब्दोँ पर भी […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज वह क्षण है, जो हमे बाध्य कर रहा है, अपने भीतर के सत्य और मिथ्या के साथ संवाद करने के लिए; क्योँकि वर्ष का वर्तमान ‘अतीत’ होनेवाला है; इतिहास […]
स्वर्गीय मनमोहन सिंह के बारे में विचार करने से एक ऐसे व्यक्ति की छवि उभरती है जो टिपिकल मध्यमवर्गीय परिवार का मुखिया है, फैमिली मैन है। जो अपने काम से काम रखता है और अपने […]
अंग्रेजी वाला न्यू ईयर नजदीक आते ही दारू की याद आती है और दारू से याद आता है कि हमारे गांव-घर और समाज में ‘दारू’ की और ‘दारु पीने वाले’ ; दोनों की कभी स्याला […]
पश्चिम मध्य रेल भोपाल में जन सम्पर्क अधिकारी एवं पश्चिम मध्य रेल मुख्यालय जबलपुर में वरिष्ठ जन सम्पर्क अधिकारी रहे वरिष्ठ कवि, लेखक ,साहित्यकार श्री कमल किशोर दुबे को उनकी कृति “चाणक्य नीति दोहावली” के […]
अपवाद को छोड़ दे तो एयरफोर्स में वायु सैनिक के रूप में चयनित होने वाले अधिकतर वह लड़के हैं जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं, पढ़ने-लिखने में ठीक हैं । परंतु उनकी आर्थिक स्थिति उतनी ठीक […]
आज विजय दिवस है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के ग्रैंड अंकल जनरल नियाज़ी को लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा साहब के सामने ढाका के रेस कोर्स ग्राउंड में आत्मसमर्पण दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते […]
Peeyush Kumar, Balamau (Manager, Bank of Baroda) In today’s fast-paced world, the quest for peace has become more important than ever before. Amidst the chaos of daily responsibilities, constant connectivity, and information overload, finding a […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक जाहिल है; गोँडा का रहनेवाला बताया जाता है, जिसका नाम ‘घनश्याम अवस्थी’ है। वह गोँडा के किसी शिक्षालय मे गणित का अध्यापक है। मेरे घर भी आ चुका है। […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• पत्नी और उसके मायकेवालोँ ने दहेज-क़ानून का दुरुपयोग किया। नौ प्रकार के आरोप लगाये गये थे। क़ानूनरक्षिका भी अधिकार का दुरुपयोग करती रही। उस भ्रष्ट-बेईमान-रिश्वतख़ोर महिला न्यायाधीश के विरुद्ध कठोर […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आज भारत मे जिस तरह से धर्म का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, उससे यही प्रतीत होता है, मानो धर्म-जैसा घृणित और अश्लील शब्द कोई हो ही न। इसका मुख्य […]