आज सर्वत्र ‘असमाधान’ की हवा क्यों?

August 13, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज घर-परिवार अशान्त लक्षित हो रहे हैं। किसी में भी धैर्य धारण करने की सामर्थ्य लक्षित नहीं हो रही है। सारे ऐश्वर्य-वैभव के भोक्ता हम ही रहें, स्वार्थपरक ऐसा विचार जैसे ही […]

दोगलों’ की कोई ‘जाति’ नहीं होती

August 11, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय दो ही जातियाँ हैं :— पहली, महिला (प्रकृति) की और दूसरी, पुरुष की; परन्तु ‘दोगलों’ की कोई जाति नहीं होती, जो ‘रंग और रूप’ बदलने में माहिर होते हैं। जैसे हाथी के […]

आश्रयगृहों को खोले जाने के वास्तविक उद्देश्य पर कोई बात नहीं कर रहा

August 9, 2018 0

विजय कुमार – कल के समाचार पत्र में एक खबर पढ़ी कि हमारी महिला एवं बाल विकास मंत्री माननीया श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी जी ने देवरिया की शर्मनाक घटना के संबंध मे टिप्पणी की कि […]

“पत्रकारों को क्या ‘पार्टी’ बनना चाहिए”

August 8, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज एक विचित्र-सा सम्प्रेषण देखा, जो दैनिक जागरण, इलाहाबाद में महाप्रबन्धक रह चुके श्रीवास्तव जी का है, जिसका शीर्षक उपर्युक्त है। वे क्या कहना चाहते हैं, कुछ सुस्पष्ट नहीं है। बहरहाल, मैंने […]

उत्तरप्रदेश-शासन प्राथमिक अध्यापक-पद पर नियुक्ति के लिए कब गम्भीर होगा?

August 6, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय उत्तरप्रदेश में १० लाख सरकारी पद रिक्त हैं, जिनमें से २ लाख २४ हज़ार ३२७ स्थान मात्र प्राथमिक शालाओं में रिक्त पड़े हैं। वस्तुस्थिति यह है कि महीनों से लखनऊ में बी०एड्०-टेट […]

सभी राजनीतिक दल संवेदनहीन; एकमात्र विकल्प ‘नोटा’

August 5, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इन दिनों देश के अधिकतर राज्यों में आवृष्टि (बाढ़) से जड़-चेतन गम्भीरावस्था में हैं। केन्द्र-राज्य की सरकारों के मठाधीश निष्क्रिय दिख रहे हैं; वहीं विपक्षी दलों के ठीकेदारों की ज़बान पर ताले […]

सिने-संसार का निराला व्यक्तित्व : आभास कुमार गांगुली उर्फ़ किशोर कुमार

August 4, 2018 0

आज (४ अगस्त), जिनकी जन्मतिथि है :—- डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ० ”ज़िन्दगी का ये सफ़र है ये कैसा सफ़र, कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं।” उनका नाम था ‘आभास कुमार गांगुली’। १९४६ ईसवी में ‘शिकारी’ […]

गुरु-शिष्य-सम्बन्ध : अब समाप्ति की ओर!

August 4, 2018 0

———० खरी-खोटी ०——– डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अतीव तीव्र गति में गुरु-शिष्य-सम्बन्ध क्षरण को प्राप्त हो रहा है; कारण के मूल में आन्तरिक और बाह्य परिवेश हैं। अब घर-परिवार के भी सम्बन्ध तिक्त होते जा रहे […]

दो हज़ार रुपये दीजिए और तुलसी, कबीर, मीराँ, प्रेमचन्द, महादेवी, निराला, अज्ञेय, मुक्तिबोध इत्यादिक को अपने ‘घर’ ले आइए!

July 31, 2018 0

– डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आपकी लेखनी यदि ‘पराधीनता’ की ओर बढ़ने के लिए मचल रही हो तो उसे पहले दुलराइए-पुचकारिए- समझाइए; उसके बाद भी उस धृष्ट की अक्खड़पना दूर न हो तो झट उस लेखनी […]

किसी पर भी “वन्दे मातरम्” कहने का दबाव क्यों?

July 28, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कोई यदि कहता है— हमारा धर्म कहता है कि हम ‘अल्लाह’ के अलावा और किसी की पूजा नहीं कर सकते; परन्तु वह व्यक्ति इस धरती माँ के साथ बेइन्तिहाँ मुहब्बत करता है। […]

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