अब ‘सी० बी० आइ०’ को ‘स्वतन्त्र’ अधिकार दिया जाये

October 26, 2018 0

 डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय देश की जिस सी०बी०आइ० को शीर्षस्थ परीक्षण/जाँच-अभिकरण माना जाता है, राजनीतिक षड़यन्त्र के कारण उसकी प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुँचा है। इससे सम्पूर्ण विश्व में एक अविश्वसनीय और शोचनीय सन्देश सम्प्रेषित हुआ […]

प्रयाग तो देश-देशान्तर में परिव्याप्त है, फिर इलाहाबाद तक ही क्यों?

October 15, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘प्रयाग’ अथवा ‘तीर्थराज प्रयाग‘ के सम्बन्ध में पुराणों का मत है कि प्रयाग उसे इसलिए कहा गया है कि वह समस्त तीर्थों में सर्वोत्तम और उत्कृष्ट तीर्थ है। देवताओं की यज्ञभूमि होने […]

पलायनवादी आक्रोश और ‘इन्क़िलाब ज़िन्दाबाद’

October 14, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज जिधर देखिए उधर, ‘पलायनवादी आक्रोश’। चेहरे निस्तेज; हथेलियों की आग बुझी हुई। दिखती है तो पिछवाड़े में बाँस डालकर ख़ुद को सबसे अधिक ऊँचाई पर खड़े रहने की थोथी ख़्वाहिश। यही […]

क्या प्रो. जीडी अग्रवाल (स्वामी सानंद) की मृत्यु को स्वाभाविक मान लिया जाए

October 13, 2018 0

सुधान्शु बाजपेयी (रिसर्च फेलो)- कल सुबह अखबार में प्रो. जीडी अग्रवाल (स्वामी सानंद) की त्रासद मृत्यु की खबर देखी तो ऐसे लिखी गई मानो वह स्वाभाविक मौत मरें हो, बगल में ही *प्रधानमंत्री का बेशर्मी […]

‘विकल्प’ पूछनेवाले देश में ‘भिक्षाशाला’ खुलवाने की प्रतीक्षा में हैं

October 11, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अपना देश बिखरता जा रहा है। केन्द्र और राज्य की सरकारें हमारे युवावर्ग के साथ ग़द्दारी करती आ रही हैं और अपने-अपने तरीक़े से देश के संसाधनों को लूटती जा रही हैं। […]

बैंकों के विलय से नहीं होगा ऋण-वसूली का कोई निदान

October 9, 2018 0

यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस के बैनर तले कर्मचारियों ने किया विरोध-प्रदर्शन   हरदोई। बैंकों की प्रमुख समस्या खराब ऋण हैं। बैंकों का विलय इन खराब ऋणों को वसूल करने का कोई समाधान नहीं है। […]

इलाहाबाद में गांधी जी : यह चिता नहीं, राष्ट्रयज्ञ का ‘हवनकुण्ड’ है!

October 2, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्राय: देखा गया है कि जीवन में ‘आकस्मिक’ और ‘अप्रत्याशित’ की विशेष भूमिका होती है; जैसा कि महात्मा गांधी जी के साथ हुआ था :– जाना कहीं था और चले गये कहीं […]

—–० समय-सापेक्ष चिन्तन ०—– तब ‘रावण’ का भी ‘विकल्प’ पूछा जाता था

September 30, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय रावण का अर्थ है, ‘जो सम्पूर्ण लोक को रुला दे’, जो आज भी प्रासंगिक है। आज का रावण सम्पूर्ण भारतवासियों को रुला रहा है और हमारी आहें उसके ‘दुष्कर्म के घड़े’ में […]

भारत के सैन्यतन्त्र का राजनीतीकरण क्यों?

September 30, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्रश्न हैं– भारतीय सेना के ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का वीडियो ‘सार्वजनिक’ किसने और क्यों किया है? क्या भारतीय सेना के सारे सैनिक और शीर्षस्थ अधिकारी इतने अविश्वसनीय, दुर्बल, शिथिल तथा बौने पड़ चुके […]

अवैध शस्त्र फैक्ट्री का भंडाफोड़ फैक्ट्री संचालक शातिर कारीगर गिरफ्तार

September 30, 2018 0

             हरदोई- पुलिस ने अवैध शस्त्रो के  जखीरे के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है, गिरफ्तार शातिर कारीगर अरसे से शस्त्र फैक्ट्री का संचालन करता […]

आओ! ‘व्यभिचार’ करें

September 28, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय क्या ये न्यायाधीशगण अपनी बहू-बेटियों-पत्नियों को पर-पुरुषों के साथ व्यभिचार करने की आज़ादी देंगे? चौकीदार के राजकाल में जो अब तक नहीं हुआ है, वह सब होगा; देखते रहिए। नैतिकता की पुस्तकों […]

शोध-क्षेत्र में हो रहे ‘क्षरण’ के लिए कौन उत्तरदायी ?

September 22, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय शोधकर्म के निर्देशक और परीक्षक अधिकतर ऐसे लोग ‘बनते’/’बनाये’ जाते हैं, जिनमें शोधविद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने और शोधकार्यों’ के सम्यक् परीक्षण करने की योग्यता नहीं रहती; क्योंकि ऐसे लोग बिना अध्यवसाय और […]

 बी० एड्०, बी० पी० एड्०-टी० ई० टी० आदिक शैक्षिक योग्यतावाले अभ्यर्थी अब कहाँ जायें? 

September 21, 2018 0

 डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री आदित्यनाथ योगी हमारे उक्त अभ्यर्थियों के साथ मिल-बैठकर उनके प्रतिनिधिमण्डल के साथ सकारात्मक संवाद कर, कोई ‘मध्यम मार्ग’ निकालने पर विचार क्यों नहीं करते? हमारा युवावर्ग टूटता जा रहा […]

गम्भीर विषय– नरेन्द्र मोदी को पुन: सत्ता में लाने का औचित्य?

September 19, 2018 0

डॉ. पृथ्वीनाथ पाण्डेय- देशवासी इस विषय पर गम्भीरतापूर्वक विचार करें :– यदि नरेन्द्र मोदी वर्ष २०१४ में चुनाव-पूर्व देश की जनता को दिखाये मीठे सपनों को अपने निर्धारित कार्यकाल में पूरा नहीं कर सकेे और […]

दोनों हाथों से देश को दूह रहीं केन्द्र और राज्य की सरकारें!

September 18, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय वर्ष २०१४ में कच्चे तेल की क़ीमत ११० डॉलर प्रति बैरल थी और तब पेट्रोल की क़ीमत ७० रुपये प्रति लीटर थी। वर्ष २०१७ में कच्चे तेल की क़ीमत ४९.३ डॉलर प्रति […]

प्रत्येक भारतवासी पर कुल कितना क़र्ज़ है, सरकार बताये?

September 16, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय केन्द्र-सरकार को चलानेवाले लोग आम जनता की कमर तोड़ रहे हैं, फिर भी सत्तालोलुपों का जयगान करती अधिकतर जनता थकते-नहीं-थकती। आर्थिक और सामाजिक स्तर पर वर्तमान सरकार पूरी तरह से विफल सिद्ध […]

पारस्परिक समन्वय-सामंजस्य स्थापित कर, हिन्दी राष्ट्रभाषा का सम्मान प्राप्त कर सकती है

September 16, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हम किसी पर कुछ भी थोप नहीं सकते। इसी सन्दर्भ में हमें अपनी हिन्दी-भाषा को भी समझना होगा। इतिहास साक्षी है कि विश्व की भीषण समस्याएँ भी मिल-बैठकर सुलझा ली गयी हैं। […]

कल ढूँढ़ते रह जाओगे, ‘हिन्दी’ नहीं मिलेगी

September 13, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इस ‘मुक्त मीडिया’, जिसे ‘सोसल मीडिया’ कहा जाता है, के माध्यम से ऐसी बड़ी संख्या उनकी है, जो चक्षुसहित रहते हुए भी ‘नेत्ररहित’ लक्षित होते हैं। यत्र-तत्र-सर्वत्र ऐसों की ही उपस्थिति है। […]

खबरदार हिन्दू सो रहे हैं —

September 13, 2018 0

Ram Vashishtha- आपको चार्ली हैब्दो याद हैं या भूल चुके हैं ? दरअसल इस्लाम धर्म के पैगंबर मुहम्मद साहब ने मुसलमानों को चित्र बनाने की मनाही की थी और उनका कोई चित्र उपलब्ध नहीं है […]

देश की जनता किसी भी प्रकार का ‘कर’ (टैक्स) क्यों दे?

September 8, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय धर्म और राजनीति की गलबँहिया का परिणाम— सारे बाबा-बाबियाँ फल-फूल रही हैं। नेतागण आश्रमों में जाकर प्रकारान्तर से ‘वोट की राजनीति’ करते आ रहे हैं। आज राम का प्रभाव इसलिए नहीं दिख […]

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