विश्व की राजनीतिक क्षितिज पर देदीप्यमान महानायिका इन्दिरा प्रियदर्शिनी की पुण्यतिथि (३१ अक्तूबर) पर सम्पूर्ण भारतवासियों की श्रद्धाञ्जलि

October 31, 2018 0

विश्व की राजनीतिक क्षितिज पर देदीप्यमान महानायिका इन्दिरा प्रियदर्शिनी की पुण्यतिथि (३१ अक्तूबर) पर सम्पूर्ण भारतवासियों की श्रद्धाञ्जलि :———————— अभूतपूर्व आत्मविश्वास और कठिनतर परिस्थितियों में भी धैर्य खोये बिना स्वविवेक से निर्णय करने की सामर्थ्य […]

अब ‘सी० बी० आइ०’ को ‘स्वतन्त्र’ अधिकार दिया जाये

October 26, 2018 0

 डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय देश की जिस सी०बी०आइ० को शीर्षस्थ परीक्षण/जाँच-अभिकरण माना जाता है, राजनीतिक षड़यन्त्र के कारण उसकी प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुँचा है। इससे सम्पूर्ण विश्व में एक अविश्वसनीय और शोचनीय सन्देश सम्प्रेषित हुआ […]

प्रयाग तो देश-देशान्तर में परिव्याप्त है, फिर इलाहाबाद तक ही क्यों?

October 15, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘प्रयाग’ अथवा ‘तीर्थराज प्रयाग‘ के सम्बन्ध में पुराणों का मत है कि प्रयाग उसे इसलिए कहा गया है कि वह समस्त तीर्थों में सर्वोत्तम और उत्कृष्ट तीर्थ है। देवताओं की यज्ञभूमि होने […]

पलायनवादी आक्रोश और ‘इन्क़िलाब ज़िन्दाबाद’

October 14, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज जिधर देखिए उधर, ‘पलायनवादी आक्रोश’। चेहरे निस्तेज; हथेलियों की आग बुझी हुई। दिखती है तो पिछवाड़े में बाँस डालकर ख़ुद को सबसे अधिक ऊँचाई पर खड़े रहने की थोथी ख़्वाहिश। यही […]

क्या प्रो. जीडी अग्रवाल (स्वामी सानंद) की मृत्यु को स्वाभाविक मान लिया जाए

October 13, 2018 0

सुधान्शु बाजपेयी (रिसर्च फेलो)- कल सुबह अखबार में प्रो. जीडी अग्रवाल (स्वामी सानंद) की त्रासद मृत्यु की खबर देखी तो ऐसे लिखी गई मानो वह स्वाभाविक मौत मरें हो, बगल में ही *प्रधानमंत्री का बेशर्मी […]

‘विकल्प’ पूछनेवाले देश में ‘भिक्षाशाला’ खुलवाने की प्रतीक्षा में हैं

October 11, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अपना देश बिखरता जा रहा है। केन्द्र और राज्य की सरकारें हमारे युवावर्ग के साथ ग़द्दारी करती आ रही हैं और अपने-अपने तरीक़े से देश के संसाधनों को लूटती जा रही हैं। […]

बैंकों के विलय से नहीं होगा ऋण-वसूली का कोई निदान

October 9, 2018 0

यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस के बैनर तले कर्मचारियों ने किया विरोध-प्रदर्शन   हरदोई। बैंकों की प्रमुख समस्या खराब ऋण हैं। बैंकों का विलय इन खराब ऋणों को वसूल करने का कोई समाधान नहीं है। […]

इलाहाबाद में गांधी जी : यह चिता नहीं, राष्ट्रयज्ञ का ‘हवनकुण्ड’ है!

October 2, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्राय: देखा गया है कि जीवन में ‘आकस्मिक’ और ‘अप्रत्याशित’ की विशेष भूमिका होती है; जैसा कि महात्मा गांधी जी के साथ हुआ था :– जाना कहीं था और चले गये कहीं […]

—–० समय-सापेक्ष चिन्तन ०—– तब ‘रावण’ का भी ‘विकल्प’ पूछा जाता था

September 30, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय रावण का अर्थ है, ‘जो सम्पूर्ण लोक को रुला दे’, जो आज भी प्रासंगिक है। आज का रावण सम्पूर्ण भारतवासियों को रुला रहा है और हमारी आहें उसके ‘दुष्कर्म के घड़े’ में […]

भारत के सैन्यतन्त्र का राजनीतीकरण क्यों?

September 30, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्रश्न हैं– भारतीय सेना के ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का वीडियो ‘सार्वजनिक’ किसने और क्यों किया है? क्या भारतीय सेना के सारे सैनिक और शीर्षस्थ अधिकारी इतने अविश्वसनीय, दुर्बल, शिथिल तथा बौने पड़ चुके […]

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