संजय सिंह, सांसद, आप ने पेयजल एवं स्वच्छता मिशन पर उठाए सवाल! | IV24 News | Lucknow

देश बदल रहा है, नोटबंदी से जनता खुश है

November 24, 2016 0

दिनेश दुबे (सुलतानपुर)- सड़क परिवहन एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गड़करी ने विरोधी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि देश बदल रहा है। नोटबंदी से जनता खुश है। परेशान सिर्फ वे राजनीतिक दल है जिनके […]

भारतीय रेल का ‘ब्लैक संडे’ !

November 21, 2016 0

माधव झा (युवा विचारक)- “यात्रीगण कृपया ध्यान दे गाड़ी संख्या 19314 अपने निर्धारित समय से प्लेटफॉर्म संख्या 4 से रवाना होगी। भारतीय रेल आपकी यात्रा की सुखद कामना करता हैं”। ये पंक्ति भारतीय रेल की […]

सांसत में हैं अर्थव्यवस्था!

November 21, 2016 0

माधव झा (युवा विचारक)- 8 नवंबर 2106 की शाम रात 8 बजे तक सब कुछ यथावत था। सड़कों में भारी ट्रैफिक था, बाज़ार में भीड़ थी, शोरगुल था। इसी बीच रात 8 बजकर 5 मिनट […]

नोट की चोट : नोटबंदी या जुमलाबंदी?

November 19, 2016 0

माधव झा (युवा विचारक)- “मित्रों, मुझे सिर्फ 60 महीने दीजिए. मैं देश की तस्वीर बदलने की हिम्मत रखता हूँ. आपने उन्हें 60 बरस दिए, मुझे सिर्फ 60 महीने दीजिए. देश से भ्रष्टाचार मिटा दूंगा. कालेधन […]

कुछ दिन रहिये न बिना लक्ज़री के !

November 11, 2016 0

प्रभात सिंह (वरिष्ठ पत्रकार)- क्या हुआ, हज़ार पांच सौ के नोट ही तो बंद हुए हैं। ज़िन्दगी थम गयी ? साँसे भी क्या ? पैसों की गर्माहट नहीं महसूस हो रही अब ? उन नोटों […]

कालेधन पर रोक लगाने के निर्णय से मचा कोहराम

November 10, 2016 0

सुधांशु बाजपेयी (युवा विचारक) सीतापुर- प्रधानमंत्री मोदी के कालेधन पर रोक लगाने के निर्णय  से कोहराम मचा हुआ है । पूरे देश में इसके लाभ हानि पर बहस जारी है । इस सब किंतु परंतु के बावजूद यह सभी ने स्वीकार किया कि यह एक ‘साहसिक परंतु सीमित प्रभाव वाला निर्णय’ है। इस तरह का निर्णय जाली करेंसी से निपटने के लिए विकासशील एवं उभरती हुयी अर्थव्यवस्थाओं में अक्सर लिया जाता रहा है, जहां नकद करेंसी का प्रचलन ज्यादा होता है , जबकि विकसित देशों  से आभासी करेंसी का ही प्रचलन ज्यादा होता है । भारत में भी इस तरह की रोक 1948 और 1978 में लग चुकी है। पहली बार नेहरू जी की अंतरिम सरकार में फिर मोरार जी देसाई की सरकार मे कालेधन और भ्रष्टाचार पर अंकुश की बात कहकर ही लगायी गयी थी । तब यह फैसला इसलिए मुश्किल नहीं था क्यों कि तब बड़े नोट केवल बडे कारोबारियों में के पास ही होते थे , परंतु अब बाजार के विस्तार के साथ यह नोट घर घर में है। जिससे आम आदमी को भी परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है । कल आयी खबरों के बीच आम आदमी तमाम दिक्कतों से गुजरता रहा, किसी के यहां शादी है तो कोई बीच सफर में फंसा हुआ है तो किसी के घर में नकद में कुछ गिने चुने नोट ही सौ सौ के है’, वहीं प्राइवेट अस्पतालों ने इलाज से मना कर दिया , मेडिकल स्टोरों , पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियो पर कमीशनबाजी हावी रही। कुलमिलाकर पूरा दिन आर्थिक अराजकता की स्थिति बनी रही। सबसे बडा यक्ष प्रश्न यही है कि इस निर्णय  से कालाधन और भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी तो उत्तर मिलाजुला है। इस निर्णय से सीमित सफलता ही मिलेगी और सरकार की मंशा भी यही है कि शोर और प्रोपेगंडा के बीच इस मसले का चुनावी फायदा उठाया जाये। इस निर्णय की जद में बडी मछलियां नहीं आने वाली हैं । हमारी राय में सरकार का फोकस भी वह नहीं है। तभी तो ललित से लेकर माल्या तक को भगाने सरकारी लापरवाही बखूबी रही , जिस पनामा पर पूरी दुनियां में को हराम मचा हुआ है उस पर हमारी सरकार ने उफ तक न की । यही नहीं अभी अभी जब सर्वोच्च न्यायालय ने लोन डिफाल्टर्स  की जानकारी मांगी तो पता चला कि केवल 57 लोग देश की जनता की गाढी कमाई का 85,000 करोड दबाये बैठे है, इनके नाम सार्वजनिक करने में भी सरकार को शर्म आ रही है तो समझा जा सकता है कि सरकार निषाने पर बडी मछलियां नहीं हैं । सच कहा जाये तो यह अर्थव्यवस्था ही कालेधन से चल रही हैं, गरीबी के बीच में नित नये बनते अमीरी के टापू आपके आसपास भी होंगें, जिनकी प्राणवायु यह कालाधन ही है,और यह धन संपत्ति और कंपनियों में तब्दील हो जाता है, यादव सिंह से लेकर नेता अभिनेता तक इसके उदाहरण हैं जिन पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुकदमा चल रहे हैं । ठेके से लेकर भर्तियों तक कमीशन और रिश्वतखोरी को नैतिक मान्यता मिल चुकी है। हां इस प्रक्रिया से लोगों के घरों और दुकानों में रखा नकद धन जरूर बैंको में आ जायेगा जिससे बैंकों को जहां पिछले दिनों जारी सुस्ती से राहत मिलेगी वहीं फिर बडी मछलियों को लोन देने का प्रबंध हो जायेगा जैसे अभी कुछ दिन पहले अडानी केा दिया गया। बाकी इससे निश्चित तौर पर जाली नोटों और चुनाव में कालेधन के इस्तेमाल से तात्कालिक राहत मिलेगी । साथ ही आयकर चोरी करने वाले मॅझले एवं रियल इस्टेट के कारोबारियों को भी इस जद में लाया जा सकेगा ,जो आयकर बचाने के लिए नकद लेनदेन का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। हम उम्मीद कर सकते हैं कि सरकार के इस फैसले से चुनावों में अपेक्षाकृत कालेधन का इस्तेमाल कम होगा । सरकार के राजकोष में वृद्धि होगी।

ऐ दिल…….. नहीं हैं ‘मुश्किल’

October 24, 2016 0

माधव झा- एक इंसान जो मूर्ख हैं, जिसके पास कुछ भी नहीं हैं। जिस पर वह गर्व कर सके। तो, अंत में वह राष्ट्रवाद की धारदार ‘हथियार’ को अपनाता हैं। अपनी कमी और बुराइयों को […]

वॉर छोड़ ना यार…

October 24, 2016 0

माधव झा- देश की सबसे बड़ी सियासी परिवार के कुनबे की जंग अब खुलकर सामने आ गयी हैं। चाचा, भतीजे की जंग ने इस सूबे की राजनीति में कोहराम मचा दिया हैं। विधानसभा चुनाव से […]

युद्ध की बात करने वाले देशद्रोही हैं

October 20, 2016 0

लेखकः संदीप पाण्डेय -उपाध्यक्ष, सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया)  हमले के जवाब में हुए सर्जिकल धावे के बाद, जिसके बारे में देश को ठीक से बताया नहीं जा रहा, भारत सरकार पाकिस्तान के खिलाफ लगभग विजयी मुद्रा […]

राजनीत के दाँव पर खाकी

August 4, 2016 0

आदित्य त्रिपाठी ‘यादवेन्द्र’- विगत कुछ वर्षों से हमारे देश में सहिष्णुता और असहिष्णुता पर बड़े जोर – शोर से बहस चल रही है । आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश […]

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