शोध-क्षेत्र में हो रहे ‘क्षरण’ के लिए कौन उत्तरदायी ?

September 22, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय शोधकर्म के निर्देशक और परीक्षक अधिकतर ऐसे लोग ‘बनते’/’बनाये’ जाते हैं, जिनमें शोधविद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने और शोधकार्यों’ के सम्यक् परीक्षण करने की योग्यता नहीं रहती; क्योंकि ऐसे लोग बिना अध्यवसाय और […]

 बी० एड्०, बी० पी० एड्०-टी० ई० टी० आदिक शैक्षिक योग्यतावाले अभ्यर्थी अब कहाँ जायें? 

September 21, 2018 0

 डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री आदित्यनाथ योगी हमारे उक्त अभ्यर्थियों के साथ मिल-बैठकर उनके प्रतिनिधिमण्डल के साथ सकारात्मक संवाद कर, कोई ‘मध्यम मार्ग’ निकालने पर विचार क्यों नहीं करते? हमारा युवावर्ग टूटता जा रहा […]

गम्भीर विषय– नरेन्द्र मोदी को पुन: सत्ता में लाने का औचित्य?

September 19, 2018 0

डॉ. पृथ्वीनाथ पाण्डेय- देशवासी इस विषय पर गम्भीरतापूर्वक विचार करें :– यदि नरेन्द्र मोदी वर्ष २०१४ में चुनाव-पूर्व देश की जनता को दिखाये मीठे सपनों को अपने निर्धारित कार्यकाल में पूरा नहीं कर सकेे और […]

दोनों हाथों से देश को दूह रहीं केन्द्र और राज्य की सरकारें!

September 18, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय वर्ष २०१४ में कच्चे तेल की क़ीमत ११० डॉलर प्रति बैरल थी और तब पेट्रोल की क़ीमत ७० रुपये प्रति लीटर थी। वर्ष २०१७ में कच्चे तेल की क़ीमत ४९.३ डॉलर प्रति […]

प्रत्येक भारतवासी पर कुल कितना क़र्ज़ है, सरकार बताये?

September 16, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय केन्द्र-सरकार को चलानेवाले लोग आम जनता की कमर तोड़ रहे हैं, फिर भी सत्तालोलुपों का जयगान करती अधिकतर जनता थकते-नहीं-थकती। आर्थिक और सामाजिक स्तर पर वर्तमान सरकार पूरी तरह से विफल सिद्ध […]

पारस्परिक समन्वय-सामंजस्य स्थापित कर, हिन्दी राष्ट्रभाषा का सम्मान प्राप्त कर सकती है

September 16, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हम किसी पर कुछ भी थोप नहीं सकते। इसी सन्दर्भ में हमें अपनी हिन्दी-भाषा को भी समझना होगा। इतिहास साक्षी है कि विश्व की भीषण समस्याएँ भी मिल-बैठकर सुलझा ली गयी हैं। […]

कल ढूँढ़ते रह जाओगे, ‘हिन्दी’ नहीं मिलेगी

September 13, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इस ‘मुक्त मीडिया’, जिसे ‘सोसल मीडिया’ कहा जाता है, के माध्यम से ऐसी बड़ी संख्या उनकी है, जो चक्षुसहित रहते हुए भी ‘नेत्ररहित’ लक्षित होते हैं। यत्र-तत्र-सर्वत्र ऐसों की ही उपस्थिति है। […]

खबरदार हिन्दू सो रहे हैं —

September 13, 2018 0

Ram Vashishtha- आपको चार्ली हैब्दो याद हैं या भूल चुके हैं ? दरअसल इस्लाम धर्म के पैगंबर मुहम्मद साहब ने मुसलमानों को चित्र बनाने की मनाही की थी और उनका कोई चित्र उपलब्ध नहीं है […]

देश की जनता किसी भी प्रकार का ‘कर’ (टैक्स) क्यों दे?

September 8, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय धर्म और राजनीति की गलबँहिया का परिणाम— सारे बाबा-बाबियाँ फल-फूल रही हैं। नेतागण आश्रमों में जाकर प्रकारान्तर से ‘वोट की राजनीति’ करते आ रहे हैं। आज राम का प्रभाव इसलिए नहीं दिख […]

विचार हमारा शस्त्र है और शास्त्र भी, विचार को गोलियों से नहीं दबाया जा सकता

September 7, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हमारे पास ‘विचार’ है, जो हमारी उष्मा है और ऊर्जा भी; वही हमारा शस्त्र है और शास्त्र भी। हम व्यक्ति-विशेष के समर्थक और विरोधी नहीं हैं, प्रत्युत हम गुण-अवगुण के आधार पर […]

अवसरवादियों को पनपने न दें; उखाड़ फेंकें!

September 6, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- ऐसे निकृष्ट लोग, जो हर तरह की कुव्यवस्था के साथ गलबहियाँ करते हैं, जब साहित्य की किसी भी विधा में अथवा विमर्श-वाचन-व्याख्यान अथवा किसी भी प्रकार के लेखन के माध्यम से किसी […]

देश का बुद्धिजीवी-वर्ग और राजनीतिक विपक्षी दल बिना रीढ़ की हड्डी का!

September 5, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय देश की लोकघाती सरकार आर्थिक नीतियों को लागू कर विभिन्न क्षेत्रों में मूल्य-वृद्धि करती जा रही है। पेट्रोल-डीजल के मूल्य आसमान छू रहे हैं; रुपये का लज्जाजनक अवमूल्यन हो चुका है; घृणा […]

हमारे पिछड़ेपन का कारण मुफ्तखोरी

September 2, 2018 0

विजय कुमार (अजुहा, कौशांबी) जानते हैं हमारा देश पिछले साठ सालों मे क्यों पिछड़ता गया क्योंकि पिछली सरकारों ने राज करने के लिए सबसे आसान एजेंडे मुफ्तखोरी को बढ़ावा दिया और यह धीरे-धीरे हमारी मानसिकता […]

प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी! देश को मत बाँटिए

September 1, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय पिछले सवा चार वर्षों में देश की वास्तविक आर्थिक विकास की कितनी दुर्गति हुई है, इस पर तटस्थ रहकर अब विचार करने की आवश्यकता है। १ डॉलर = लगभग ७१ रुपये का […]

आधुनिक युग मे हिन्दी उपेक्षित क्यों ?

August 23, 2018 0

राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित” (कवि, साहित्यकार) हिन्दी हमारी राजभाषा है। ये जन जन की भाषा बने इस हेतु हम सभी प्रयासरत हैं। आज़ादी के 72 वर्षों के बाद भी हिन्दी उपेक्षित है। आधुनिक युग की भाषा […]

अटल जी के ‘अस्थिकलश’ में भरे हैं, चुनावी गणित अपने पक्ष में करने के सूत्र

August 23, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय यहाँ रखे इन सभी कलश में स्मृति-शेष श्रद्धेय अटलबिहारी वाजपेयी जी की अस्थियाँ भरी हुई हैं, ऐसा बताया जाता है। देश के प्रधान चौकीदार को, देश की जनता ने जिस कार्य के […]

‘विश्व हिन्दी-सम्मेलन’ का उतरता मुखौटा और नंगा होता आयोजन का अभिप्राय!

August 23, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कल (२१ अगस्त, २०१८ ईसवी) इलाहाबाद का एक हिन्दी-दैनिक समाचारपत्र देख रहा था। उसमें इलाहाबाद के उन लोग का नाम और चित्र था, जिन्हें मारीशस में सम्पन्न विश्व हिन्दी सम्मेलन में आमन्त्रित […]

लोक-विरुद्ध होता सत्ता-प्रतिष्ठान

August 18, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इतिहास से सीख न लेने पर महान् शक्तियाँ भी पराजित होती रही हैं। एक शक्तिसम्पन्न व्यक्ति जब ‘बलप्रयोग’ करते हुए, अतिरेकता की ओर बढ़ता है तब उसकी बुद्धि किस समय पलटी खा […]

अटलबिहारी जी और नरेन्द्र मोदी जी में ज़मीं-आसमाँ का अन्तर

August 17, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अटलबिहारी वाजपेयी जी और नरेन्द मोदी जी में तुलना-स्तर पर ‘ज़मीन और आसमान’ का अन्तर है। अटल जी में कूट-कूटकर ‘मनुष्यता’ भरी हुई थी। वे सच्चे अर्थ में ‘राष्ट्रवाद’ के पोषक थे। […]

आज सर्वत्र ‘असमाधान’ की हवा क्यों?

August 13, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज घर-परिवार अशान्त लक्षित हो रहे हैं। किसी में भी धैर्य धारण करने की सामर्थ्य लक्षित नहीं हो रही है। सारे ऐश्वर्य-वैभव के भोक्ता हम ही रहें, स्वार्थपरक ऐसा विचार जैसे ही […]

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