संजय सिंह, सांसद, आप ने पेयजल एवं स्वच्छता मिशन पर उठाए सवाल! | IV24 News | Lucknow

“सबल पुरुष यदि भीरु बनें तो हमको दे वरदान सखी” : सुभद्रा कुमारी चौहान (पुण्यतिथि विशेष)

February 15, 2021 0

● आज (१५ फ़रवरी) सुभद्रा कुमारी चौहान की पुण्यतिथि है । -डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद्-समीक्षक) सुभद्रा कुमारी चौहान : एक दृष्टि में जन्म— १६ अगस्त, १९०४ ई० को निहालपुर, इलाहाबाद मृत्यु-– १५ फ़रवरी, १९४८ ई० […]

स्वरक्तै: स्वराष्ट्रं रक्षेत् : चौरी चौरा आंदोलन के 100 वर्ष

February 4, 2021 0

डॉ० निर्मल पाण्डेय (इतिहास-व्याख्याता) : चौरी चौरा की घटना सौ सालों बाद आज भी इतिहास में अपने सही स्थान की बाट जोह रही है। 1922 में घटी इस घटना के साथ तत्कालीन ब्रिटिश सत्ता के […]

‘आवाज उठाने की स्वतंत्रता’ ही आज के समय में ‘गाँधीजी’ का जंतर है

January 30, 2021 0

डॉ० निर्मल पाण्डेय (इतिहास-व्याख्याता/लेखक) विद्रोह दरअसल ‘विरोध की वृत्ति/प्रवृत्ति’ की उन्नत अभिव्यक्ति है। विरोध करना सही मायनों में हमारे-आपके जीवित होने का प्रमाण है। और जो व्यवस्था ‘बिना किसी तर्क’, ‘बिना किसी बहस’ के विरोध […]

आज यदि ‘गांधी’ होते तो?

January 30, 2021 0

‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज का राष्ट्रीय आन्तर्जालिक बौद्धिक परिसंवाद बौद्धिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक, सामाजिक तथा साहित्यिक मंच ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज के तत्त्वावधान आज (३० जनवरी) एक राष्ट्रीय आन्तर्जालिक बौद्धिक परिसंवाद ‘काश! आज ‘गांधी’ होते’ विषय पर आयोजन किया गया, […]

शहरों में बिक रहा ज़ह्र, सरकार की अहम भूमिका

January 26, 2021 0

एक तरफ सरकार नशा मुक्त भारत का दिखावा करता है वहीं दूसरी तरफ नशा रूपी ज़हर को बेचने के लिए लाखों रूपए लेकर लाइसेंस देकर नशे को वैध बनवाकर बेंचने को प्रेरित भी कर रहा […]

संप्रभुता-रक्षा हेतु सतत संघर्षरत अपराजेय योद्धा महाराणा प्रताप को स्मरणांजलि

January 19, 2021 0

डॉ० निर्मल पाण्डेय (इतिहास-व्याख्याता/लेखक) : ‘आपने कभी अपने घोड़े पर मुग़लिया सल्तनत का शाही दाग़ नहीं लगने दिया, आपने अपनी पगड़ी कभी नहीं झुकायी, ना ही आपने अपने घोड़े पर शाही मोहर नहीं लगने दी। […]

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद: वैश्विक दायित्व को निभाने के लिए तैयार ‘न्यू इंडिया’

January 9, 2021 0

1 जनवरी 2021 से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के गलियारे में भारतीय तिरंगा एक बार फिर से लहराने लगा है। इसके साथ ही सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के रूप में भारत ने अपना आठवां […]

वे किसान नहीं, धूर्त्त और मक्कार हैं, पहचानिए!

January 4, 2021 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय उत्तरप्रदेश, उत्तराखण्ड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखण्ड तथा राजस्थान के किसान ‘रजाई’ में क्यों दुबके हुए हैं? लज्जा नहीं आती, सिंघु बॉर्डर पर पंजाब-हरियाणा के बूढ़े-बच्चे-जवान, महिलाएँ एक पैर पर खड़ी […]

देश के प्रबुद्ध-वर्ग की नववर्ष में हिन्दी-भाषा की शुद्धता के प्रति आग्रह की अभिव्यक्ति

December 31, 2020 0

नववर्ष में हिन्दीभाषा की शुद्धता के प्रति समाज को हमारे साहित्यकार, अध्यापक तथा पत्रकार-वर्ग जागरूक करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसका लक्षण उस समय दिखा जिस समय ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर से नववर्ष की पूर्व-सन्ध्या […]

द्विदिवसीय आन्तर्जालिक अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न : डॉ. निशंक एक ऊर्जावान साहित्यकार

December 25, 2020 0

‘सिदो कान्हु मुर्मु विश्वविद्यालय’, दुमका (झारखंड) की ओर से ‘वातायन’ अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मान 2020 के संदर्भ में डॉ. निशंक का रचना-संसार’ विषय पर द्विदिवसीय आन्तर्जालिक (ऑन-लाइन) अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी (23-24 दिसम्बर) प्रयागराज के शंकराचार्य आश्रम में […]

प्रयोजनमूलक हिंदी के परिप्रेक्ष्य में प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित के प्रदेय पर अन्तर्जालीय अनुष्ठान आयोजित

December 25, 2020 0

भाषा शिक्षण संस्थान हाजीनगर (कलकत्ता), अन्तरराष्ट्रीय भाषा संस्थान सूरत द्वारा प्रायोजित और लखनऊ विश्वविद्यालय तथा ‘इंदु संचेतना’एवं भाखा के संयुक्त तत्त्वावधान में प्रयोजनमूलक हिंदी के परिप्रेक्ष्य में प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित के प्रदेय पर अन्तर्जालीय […]

व्याकरणाचार्य कामता प्रसाद गुरु पाणिनि-परम्परा के धारक थे

December 24, 2020 0

● आज (२४ दिसम्बर) व्याकरणाचार्य पं० कामता प्रसाद गुरु की १४६ वीं जन्मतिथि है। व्याकरणाचार्य पं० कामता प्रसाद गुरु की एक सौ छियालीसवीं जन्मतिथि के अवसर पर ‘सर्जनपीठ’ प्रयागराज की ओर से २४ दिसम्बर को […]

डॉ. निशंक की कृतियों में जीवन बोलता है

December 23, 2020 0

‘सिदो कान्हु मुर्मु विश्वविद्यालय’, दुमका (झारखंड) की ओर से ‘वातायन’ अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मान 2020 के संदर्भ में डॉ. निशंक का रचना-संसार’ विषय पर द्विदिवसीय ऑन-लाइन अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 23 दिसम्बर को अपराह्न 4- बजे से आयोजित […]

उत्तरप्रदेश की सरकारी प्राथमिक शालाओं में ‘ऑन-लाइन’ पढ़ाई का सच

December 19, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सरकारी प्राथमिक शालाओं में ‘ऑन-लाइन’ पढ़ाई के नाम पर बच्चों के साथ छलावा किया जा रहा है; क्योंकि ऐसी पाठशालाओं में अधिकतर वे बच्चे पढ़ रहे हैं, जिनके माँ-बाप किसी […]

सिर्फ द्विपक्षीय व्यापार ही नहीं, सभी क्षेत्र में मजबूत हो रहे भारत-बांग्लादेश के सम्बन्ध

December 8, 2020 0

शान्तनु त्रिपाठी (स्वतन्त्र पत्रकार) बीते 6 दिसंबर को भारत और बांग्लादेश ने अपने द्विपक्षीय संबंधों की 49वीं वर्षगांठ मनाई। यह वही दिन है, जब वर्ष 1971 में भारत ने बांग्लादेश को एक संप्रभु राष्ट्र के […]

किसान-क्रान्ति ‘ऐतिहासिक’ मोड़ पर

December 5, 2020 0

‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज यदि किसान-आन्दोलन-वार्त्ता का पाँचवाँ दौर परिणामरहित रहा। ऐसे में, सरकार को चाहिए कि वह किसानों के लिए बनाये गये अधिनियम को निरस्त कर, […]

‘स्वतन्त्र’ हिन्दी-व्याकरणलेखन की आवश्यकता

November 26, 2020 0

—- आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हमारे हिन्दीशब्दकोशकारवृन्द ने हिन्दीशब्दकोश के नाम पर उसे ‘कबाड़ख़ाना’ बनाया है। इसका मुख्य कारण है कि उन्होंने उद्देश्यपरक कोश तैयार नहीं किये हैं। उद्देश्यपरक का प्रश्न इसलिए कि कौन-सा शब्द […]

प्रतीक्षा है, कलियुग में ‘महाभारत’ होने की

November 17, 2020 0

‘मुक्त मीडिया’ का आज का सम्पादकीय — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय देश के स्नातक-उपाधि-प्राप्त समस्त अनियोजित (बेरोज़गार) युवाओं के लिए सरकार प्रति युवा १० हज़ार रुपये प्रतिमाह ‘मानधन’ देने की व्यवस्था करे, अन्यथा युवावर्ग दिग्भ्रमित […]

परीक्षा नियामक प्राधिकारी, उत्तरप्रदेश के हिन्दी-प्रश्नपत्र में लज्जाजनक अशुद्धियाँ!..?

November 9, 2020 0

● भाषाविद्-समीक्षक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने चिन्ता जतायी परीक्षा नियामक प्राधिकारी, उत्तरप्रदेश की ओर से 6 अक्तूबर को करायी गयी द्वितीय सेमेस्टर– 2020 के हिन्दी-विषय की परीक्षा; प्रश्न-पुस्तिका ‘।।-6’ में ऐसी-ऐसी अशुद्धियाँ देखने को […]

साहित्य किसी की भी ‘सम्पदा’ नहीं

November 6, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय साहित्य सभी के लिए है। साहित्य के साथ दलित-पतित, अगड़ा-पिछड़ा लगाकर साहित्य को कतिपय लोग एक खाँचे तक सीमित रखना चाहते हैं। अरे! साहित्य को ‘साहित्य’ ही रहने दो, उसका […]

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