अवसरवादियों को पनपने न दें; उखाड़ फेंकें!

September 6, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- ऐसे निकृष्ट लोग, जो हर तरह की कुव्यवस्था के साथ गलबहियाँ करते हैं, जब साहित्य की किसी भी विधा में अथवा विमर्श-वाचन-व्याख्यान अथवा किसी भी प्रकार के लेखन के माध्यम से किसी […]

देश का बुद्धिजीवी-वर्ग और राजनीतिक विपक्षी दल बिना रीढ़ की हड्डी का!

September 5, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय देश की लोकघाती सरकार आर्थिक नीतियों को लागू कर विभिन्न क्षेत्रों में मूल्य-वृद्धि करती जा रही है। पेट्रोल-डीजल के मूल्य आसमान छू रहे हैं; रुपये का लज्जाजनक अवमूल्यन हो चुका है; घृणा […]

हमारे पिछड़ेपन का कारण मुफ्तखोरी

September 2, 2018 0

विजय कुमार (अजुहा, कौशांबी) जानते हैं हमारा देश पिछले साठ सालों मे क्यों पिछड़ता गया क्योंकि पिछली सरकारों ने राज करने के लिए सबसे आसान एजेंडे मुफ्तखोरी को बढ़ावा दिया और यह धीरे-धीरे हमारी मानसिकता […]

प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी! देश को मत बाँटिए

September 1, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय पिछले सवा चार वर्षों में देश की वास्तविक आर्थिक विकास की कितनी दुर्गति हुई है, इस पर तटस्थ रहकर अब विचार करने की आवश्यकता है। १ डॉलर = लगभग ७१ रुपये का […]

आधुनिक युग मे हिन्दी उपेक्षित क्यों ?

August 23, 2018 0

राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित” (कवि, साहित्यकार) हिन्दी हमारी राजभाषा है। ये जन जन की भाषा बने इस हेतु हम सभी प्रयासरत हैं। आज़ादी के 72 वर्षों के बाद भी हिन्दी उपेक्षित है। आधुनिक युग की भाषा […]

अटल जी के ‘अस्थिकलश’ में भरे हैं, चुनावी गणित अपने पक्ष में करने के सूत्र

August 23, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय यहाँ रखे इन सभी कलश में स्मृति-शेष श्रद्धेय अटलबिहारी वाजपेयी जी की अस्थियाँ भरी हुई हैं, ऐसा बताया जाता है। देश के प्रधान चौकीदार को, देश की जनता ने जिस कार्य के […]

‘विश्व हिन्दी-सम्मेलन’ का उतरता मुखौटा और नंगा होता आयोजन का अभिप्राय!

August 23, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कल (२१ अगस्त, २०१८ ईसवी) इलाहाबाद का एक हिन्दी-दैनिक समाचारपत्र देख रहा था। उसमें इलाहाबाद के उन लोग का नाम और चित्र था, जिन्हें मारीशस में सम्पन्न विश्व हिन्दी सम्मेलन में आमन्त्रित […]

लोक-विरुद्ध होता सत्ता-प्रतिष्ठान

August 18, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इतिहास से सीख न लेने पर महान् शक्तियाँ भी पराजित होती रही हैं। एक शक्तिसम्पन्न व्यक्ति जब ‘बलप्रयोग’ करते हुए, अतिरेकता की ओर बढ़ता है तब उसकी बुद्धि किस समय पलटी खा […]

अटलबिहारी जी और नरेन्द्र मोदी जी में ज़मीं-आसमाँ का अन्तर

August 17, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अटलबिहारी वाजपेयी जी और नरेन्द मोदी जी में तुलना-स्तर पर ‘ज़मीन और आसमान’ का अन्तर है। अटल जी में कूट-कूटकर ‘मनुष्यता’ भरी हुई थी। वे सच्चे अर्थ में ‘राष्ट्रवाद’ के पोषक थे। […]

आज सर्वत्र ‘असमाधान’ की हवा क्यों?

August 13, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज घर-परिवार अशान्त लक्षित हो रहे हैं। किसी में भी धैर्य धारण करने की सामर्थ्य लक्षित नहीं हो रही है। सारे ऐश्वर्य-वैभव के भोक्ता हम ही रहें, स्वार्थपरक ऐसा विचार जैसे ही […]

1 2 3 4 5 35
url and counting visits