ब्लॉक कोथावां में वोटर लिस्टों की बिक्री के नाम पर हो रही अवैध वसूली

वक़्त-बेवक़्त

February 24, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हमने जब सोचा,चैन से कट जायेगाज़िन्दगी का हर पल।समय ने दस्तक दी;एक गह्वर में डाल दी गयी,बटोरी हुई साँस;फ़ज़ा में उड़ा दी गयीं,मेरी बची-खुची रातें।मैं ठगा-सा देखता रह गयावक़्त की […]

मुट्ठीभर आकाश

February 19, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मुखड़ा मौखिक दिख रहा, दिखता करुणा-रूप।शोकाकुल परिवेश है, बनती मृत्यु अनूप।।दो–मौन निमन्त्रण मौन है, सूनी माँग न देख।सधवा विधवा बन गयी, कैसा विधि का लेख।।तीन :बचपन सिसकी ले रहा, क्रन्दन […]

उनका मिज़ाज

February 19, 2021 0

आकांक्षा मिश्रा, गोंडा गाँवों की गलियों सेनिकलकरशहरों में व्यवस्थित करने की होड़ लिएनिश्चित समय में पहलाउपक्रम रहामन अभी भी सरसों के खेतों में रमा रहामाँ आज उदास सी कमरे मेंअलाव तापती हुईयह कहती रही पिता […]

दिन्ना : जीवन चक्र की पर्णहीन व्यथा का साक्षी

February 16, 2021 0

यह दिन्ना है । जीवन चक्र की पर्णहीन व्यथा इसे ‘दीन’ दर्शाती है । यह धर्मिता विरहिणी की भाँति श्रंगार त्यागी वीत-द्वेष-वृती है । तिक्त शीतकाल में देह की दहन-दाह से रिक्त हो, मधुमास की […]

सरस्वती वन्दना

February 16, 2021 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ ओ वीणापाणि माँ ! ओ पुस्तक धारिणि माँ ! ओ ज्ञान दायिनी माँ ! ओ हंसवाहिनी माँ ! कर तम का संहार ज्ञान की ज्योति देती माँ । ओ वीणापाणि माँ […]

‘बाग़ी बलिया’ से प्रक्षेपित शब्दतीर : सियासत नंगी-जाहिल ज़ाहिर हो चुकी

February 16, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय रिश्तों की अहम्मीयत अब जान जाइए,बुराई में अच्छाई अब पहचान जाइए।निगाहें ग़र तलाशी लेने पे उतर आयें,ज़बाँ को तसल्ली दे मुसकान लाइए।नज़रें इनायत हों तो एक बात मैं कहूँ,अपनी कथनी-करनी […]

बाग़ी बलिया से प्रक्षेपित शब्दतीर : जवाब देते हैं सवाल की तरह

February 16, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अब वे लगने लगे हैं, जंजाल की तरह,चेहरा दिखता, किसी कंगाल की तरह।बातों-ही-बातों में, कुछ राज़ छुपा गये,जवाब देते हैं, किसी सवाल की तरह।आँखों पर है हर्फ़१ की, पर्द:दारी अब,उनकी […]

“सबल पुरुष यदि भीरु बनें तो हमको दे वरदान सखी” : सुभद्रा कुमारी चौहान (पुण्यतिथि विशेष)

February 15, 2021 0

● आज (१५ फ़रवरी) सुभद्रा कुमारी चौहान की पुण्यतिथि है । -डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद्-समीक्षक) सुभद्रा कुमारी चौहान : एक दृष्टि में जन्म— १६ अगस्त, १९०४ ई० को निहालपुर, इलाहाबाद मृत्यु-– १५ फ़रवरी, १९४८ ई० […]

शहीद का भाई को पत्र

February 14, 2021 0

मेरे भाई बहुत दूर चला गया हूँ मै मेरी माँ से तू मेरा एक काम करना , उठना सुबह और रोज मेरी माँ भारती और तिरंगे को सलाम करना, कितना खुश नसीब था मैं माँ […]

नहीं भूलता बचपना

February 13, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी, रीवा नहीं भूल पाता मैं बचपनाछोटी-छोटी बातों पर रोनारोते रोते ही हसने लगनाअपनी बातों पर अडिग रहनाऔर फिर कुछ समय तक खाना नहीं खानानहीं भूल पाता मैं बचपना । हर किसी के साथ […]

तन्हाई

February 11, 2021 0

राहुल पाण्डेय ‘अविचल’ किसको फिक्र है इस जिन्दगी की ,हमने तो तूफानों से टकराना सीखा है ।किसको फिक्र है टपकते आंसुओं की,हमने तो दरिया से मुस्कुराना सीखा है ।रूठ जाए जिसको मुझसे रूठना हो ,हमने […]

युद्ध ही युद्ध है

February 10, 2021 0

आज कौन बुद्ध है,आत्मा से शुद्ध है।हर कोई प्रबुद्ध है,युद्ध ही युद्ध है। हर तरफ प्रवंचना,भंग साधु-साधना।भ्रांतियों के चित्र हैं,कुदृष्टि की भावना।विचित्र मित्र बन्धुता,स्वाभिमान क्रुद्ध है। युद्ध ही युद्ध है…. साधुता निरीह है,दासता सहीह है।शहर […]

ख़ामोशी

February 10, 2021 0

राहुल पाण्डेय ‘अविचल’ : खामोशी भी एक उलझन सी होती है ,जो चुप रहती है मगर सोने नही देती है ।लोग कहते हैं खामोशी गम दूर करती है ,मुझे तो नही लगता कि यह कुछ […]

क्या मैं पागल हूँ?

February 9, 2021 0

राहुल पाण्डेय ‘अविचल’ क्या मैं पागल हूँ?सोचता हूँ जब कभी इस विषय पर लिखने को तो आँखों में आँशू होते हैं,सीने में जलन,चेहरे पर खामोशियाँ और सिकन,माथे पर चिन्ता की लकीरें,फिर भी सोचता हूँ लिख […]

एक अभिव्यक्ति

February 8, 2021 0

★आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय निरभ्र आकाश मेंमखमली वितान के नीचेगोटेदार चादर परविराजमान सितारेवसुन्धरा काश्रृंगार (शृंगार) कर रहे हैं।कुछ ऐसे अबूझ रास्ते हैं,जो पहाड़ों के दामन मेंवर्षों से सुस्ता रहे हैं।मीलों दूर विस्तृतरेत के सागर के […]

वो सपना था

February 6, 2021 0

शितांशु त्रिपाठी पहली पहली बार था उससे पहले घर में मैं मेरे यार था , फिर आया ऐसी दुनिया में जहाँ मेरे लिए अंधकार था, मंजिल कहीं और थी रास्ता कोई और था इसलिए मैं […]

टूटे दिल को जोड़ कर आया हूँ

February 6, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी, सतना खिलौनों की तरह दिल को तोड़ने वालोंदेखो मैं फिर से टूटे दिल को जोड़ कर आया हूँ ।पता नहीं क्यों अब हमारी दिल लगाने कीकिसी से हिम्मत नहीं होतीशायद मैं सारी हदों […]

सरकार बहादुर की चड्ढी सरकती हुई

February 6, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भाइयों-बहनों-मितरों! फोर ट्वेंटी वेब ४२० पर यह खोखलीवाणी का ८४० झूमरी तलय्या का ढपोरशंखी-केन्द्र है। मैं लफ़्फ़ाज पण्डित लफ़्फ़ाजी का पिटारा लेकर ख़ुदा को हाज़िर-नाज़िर जानकर दरवाज़ातोड़ हाज़िर हूँ। जैसा […]

व्यंग्य : नेताओं का बोलबाला

February 5, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी, सतना, हिनौती, मध्य प्रदेश संसद भवन में आजनेताओं का बोलबाला चल रहा है ।अब हमारे देश में सिंधिया जैसेनेताओं का जन्म हो रहा है । कोई खुद को बेच रहा हैतो कोई किसी […]

सेंसेक्स की उठापटक में, रिश्तों का अस्तित्व है नाटा

February 4, 2021 0

जगन्नाथ शुक्ल ‘जगन’, प्रयागराज : ऊँची-ऊँची मीनारों में, पसरा है भीषण सन्नाटा।सेंसेक्स की उठापटक में, रिश्तों का अस्तित्व है नाटा।। गाँव अभी तक करता आशा,बदली संकल्पों की भाषा।शंकाओं के मेघ घनेरे,घटा रहे जीवन-प्रत्याशा। होरी अब […]

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