संजय सिंह, सांसद, आप ने पेयजल एवं स्वच्छता मिशन पर उठाए सवाल! | IV24 News | Lucknow

चिड़िया (बाल कविता)

November 26, 2021 0

चिड़िया उड़तीचू-चू करती,पंख फैलाकरनील गगन मेंउड़ती कभी यहांँकभी वहाँ ।नन्हें-नन्हेंपंखों से भरतीबड़ी-बड़ी उड़ाने ।छूकर क्षितिज कोकभी हँसतीकभी मुस्काती। राजीव डोगरा(भाषा अध्यापक)गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारापता-गांव जनयानकड़पिन कोड -176038कांगड़ा हिमाचल प्रदेश9876777233rajivdogra1@gmail.com

अभिव्यंजना

November 23, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (एक)तेरा चुप भी इक सवाल है,यहाँ अब न कोई मलाल है।यहाँ हर ख़याल है सो रहा,अब यहाँ बोल है न चाल है।(दो)चमकता चाँद-सा बदन,न चुरा अनकहा कथन।पतंगी रूप हम पा […]

तेरा सान्निध्य

November 19, 2021 0

मैं तेरे पास रहूंतेरे साथ रहूंयही काफी है।मंत्रों का बोझतंत्रो का ओजभारी सा लगता है।तेरी गोद मेंममता भरी छाया मेंसोया रहूंयही काफी है।जन्म जन्मांतर की सिद्धियांयुगों-युगों की रिद्धियांअब भारी सी लगती हैतेरा हाथ पकड़ करबस […]

आवर्तन और परावर्तन

November 17, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मृग-मरीचिका-सा लगे, मार्ग दिखे विश्रान्त।पथ का राही सोच मे, चंचल मन अब क्लान्त।।दो–अलख जगाता फिर रहा, मिला नहीं भगवान्।अन्तस्-स्वर से दूर हो, पाता है अपमान।।तीन–युग का लक्षण दिख रहा, दिखे […]

जो कभी झुका नहीं : समयसत्य वृत्तान्त

November 16, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कृति ‘जो झुका नहीं’ संस्मरण-प्रधान है, जिसका नामकरण समयसापेक्षहै। इसके कृतिकार अपने समय के प्रतिष्ठित पत्रकार अग्रज-सम कृष्णमोहन अग्रवाल जी हैं, जो अपने पत्रकारिता के स्वर्णिम काल में ‘के० एम० […]

उस रोज दीवाली होती है

November 15, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी, रीवा दीये जब नफरत के बुझ जाते होजब प्रेम से मीत बुलाते होजब कहीं किसी से बैर ना होसब अपने हो, कोई गैर न होउस रोज दीवाली होती है। गरीबों की थाली में […]

बचपन की कहानी

November 13, 2021 0

आओ तुम्हें सुनाता हूंबचपन की कहानी,वहां भी होती थी दिल्लगीऔर साथ ही होती थीहर दिन एक नई कहानी।रूठना मनानाआए दिन ही चलता था ।पर नहीं थी मन मेंकोई छल कपट की कहानी।हर रोज़ हम सबलड़ते […]

विडम्बना!

November 9, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–सीना ठोंके हर जगह, कितना चतुर-सुजान।‘हिटलर’ बनता देश का, खोता अपनी आन।।दो–बनता कभी फ़क़ीर है, कभी जाति का नीच।चौकीदारी यों करे, जैसे पानी कीच।।तीन–निर्मम-निर्दय रूपमय, मूल भरा पाखण्ड।सम्प्रदाय को बाँटकर, […]

भारतीय क्रिकेट-दल की चिता धूधू कर जलती हुई!

November 7, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘भारतीय क्रिकेट-दल’ पिछले कुछ दिनों से ‘कोमा’ में पड़ा हुआ था; उपचार किया जा रहा था; किन्तु सब व्यर्थ रहा। १० मिनट-पूर्व उसके वर्तमान अस्तित्व का अवसान हो चुका था; […]

दीवाली जगमग हुई, दीये-झालर संग

November 6, 2021 0

दीवाली जगमग हुई, दीये-झालर संग।दिलवालों के माल पर, दिलवाले सबरंग ।। कच्चे,पक्के घर सभी, सजे-धजे बहु-भेष ।उत्साही गलियाँ हुई, मचा-कोलाहल देख ।। दूकानें शोभामती, चमक-दमक पर ध्यान ।वित्तमती हर नायिका, चटक-मटक का मान ।। खील […]

आज़माइश

November 6, 2021 0

रास्ते में कांटे बहुत हैचलो थोड़ी सीसाफ सफाई की जाए।बहुत हो चुकी है मोहब्बतचलो थोड़ी सीनफरत कर,सब की ज़राआजमाइश की जाए। रास्ते में कहने कोअपने बहुत है,चलो किसी अजनबीपत्थर से टकराकर,अपनों के बीच खड़ेपरायो की […]

विषाक्त उत्सवधर्मिता!

November 6, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय दीपवर्तिका की ज्वलनशीलतालोकमानस की सहनशीलतापृथक्-पृथक् पथ पर परिलक्षित होती हैं।दो समानान्तर दूरी पर चलते हुए भीसंवाद करने के लिएकहीं-कोई ठौर नहीं बचता।किस-हेतु लोक दीप जलाता हैख़ुश हो लेता है?दीप-प्रज्वलन के […]

एक दीप मन में भी जलायें

November 3, 2021 0

एक दीप मन में भी जलाएंभरा जो अंधकार चलो उसे भी मिटाएंमंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारे एक साथ बनाएहिंदू, मुस्लिम ,सिख -ईसाई का भेदभाव मिटाएंदिल से हटा दें फरेब की फुलझड़ियांबैर-भाव को भुला बनाएं चलो अपनत्व की […]

दीपावली है हमारा पवित्र त्यौहार

November 2, 2021 0

दिवाली आयी दिवाली आयी,खुशियों की बहार है लायी।हर घर जगमग दीप जलायें,श्रीराम जी की याद दिलायें।दीपावली है हमारा पवित्र त्यौहार,हर घर में है खुशियों का समाहार।राम ने रावण पर विजय है पायी,हर घर से बुराई […]

सरदार देश के हे युगसृष्टा!

November 1, 2021 0

——-राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ जीवट जिनका लाखों जन कोसम्बल देता था।जिनका हुङ्कार रौद्र होकरतूफ़ां बन जाता था। ऐसे वीर शिरोमणि को सिरशत-शत बार नवाता हूँ।सरदार देश के हे युगसृष्टा!मैं तुमको पुनः बुलाता हूँ। कृषक देश […]

एक नयी दीपावली

October 29, 2021 0

छायी हैं नफ़रतें हर जगहआओ मिलकरमोहब्बत काएक नया गीत गाये।छाया है अविश्वास काघना अंधकारयहाँ हर जगह,आओ मिलकरविश्वास का एक नन्हा सादीया जलायें।छाया है मृत्यु कातांडव यहां हर जगह,आओ मिलकरनव जीवन का संचार करें।छाया है महामारी […]

यह जिंदगी भी किसी खेल से कहाँ कम है

October 26, 2021 0

कभी हँसाती है तोकभी रुलाती है।यह जिंदगीसमझ नहीं आती है?कभी खुशियां है तोकभी गम है ।यह जिंदगी भीकिसी.खेल सेकहां कम है।कभी दोस्त हैं तोकभी दुश्मन है ।तो जिंदगी मेंकही ग़म है तोकही हम है।कभी दिल […]

कितना खामोश होता है ठहरा हुआ पानी

October 25, 2021 0

कितना खामोश होता है ठहरा हुआ पानी , बिल्कुल ज़िंदगी की तरह शांत। लहरे पानी में भी उठती हैं, जिंदगी में भी । कुछ किनारे इनके थपेड़ो से टूट जाते हैं , फ़ना हो जाते […]

गुरुदेव ‘आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जी’ की कृति– ‘समग्र सामान्य हिन्दी’ नवम्बर-माह से उपलब्ध

October 24, 2021 0

● राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ चिर-प्रतीक्षित ‘समग्र सामान्य हिन्दी’ की सम्पूर्ण सामग्री मुद्रणार्थ सम्बन्धित मुद्रणालय में प्रेषित की जा चुकी है। अगले सप्ताह तक मुद्रित होकर सप्ताहान्त से नवम्बर के प्रथम सप्ताह तक ‘अमेज़न’, ‘फ़्लिप […]

आगाज़

October 22, 2021 0

इन अंधेरों को बोलिएरोशनी का आगाज़ करें।इन नफरतों को बोलिएमोहब्बत का इजहार करेंइन दुखों को बोलिएसुखों का आगाज़ करें।इन ग़मो को बोलिएइश्क का थोड़ा इजहार करें।इन तारों को बोलिएहमारे चांद का आगाज़ करें।इन परवानों को […]

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