स्वच्छता सर्वेक्षण में टॉप, लेकिन है गन्दगी का बॉस

ख़ूब पिलाया देश को चरणामृत उपदेश

September 19, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ऐ फ़क़ीर! अब लौट आ, संकट में है देश।छल-प्रपंच करता रहा, बदला तूने वेश।ठगा सभी को प्रेम से, कोयल-वाणी बोल।पर तू कौआ है दिखा, खुलती तेरी पोल।।भक्त बहुत हैं भीड़ […]

गुड नाईट…टू यू

September 15, 2020 0

उसकी नाईट क्या गुड होगी,जिसको नींद नहीं आती ।विश्लेषण करते- करते,व्यग्र यामिनी कर जाती ।। प्रात- उषा आलस भर देती,पथ पर भी चलना होता ।‘मूरख हिरदय’ तभी जागता,जब सब दुनिया सो जाती ।। नील गगन […]

महीयसी महादेवी वर्मा की कारयित्री और भावयित्री प्रतिभा को हमारा नमन

September 11, 2020 0

● आज (११ सितम्बर) ही की तिथि में महादेवी जी का शरीरान्त हुआ था।— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्रयाग-आगमन के बाद और क्रॉस्थवेट स्कूल इलाहाबाद में प्रवेश लेने के बाद महादेवी जी की साहित्य-साधना अबाध्य […]

पत्थर से जूझता अमलतास लिखता हूँ

August 31, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सदियों से भटकती, इक तलाश लिखता हूँ,हवा, पानी, आँधी और बतास लिखता हूँ।सूख रही ताल-तलय्या, अब दूभर है पानी,इस काइनात१ की, अब ख़लास२ लिखता हूँहमक़दम दग़ा दे गया, कुछ दूर […]

वह वाक़िफ़ है, बस्ती में नामर्द ही रहते हैं

August 30, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय नुमाइश करता और कराता है चालाकी से,पर्दा गिराता और उठवाता है चालाकी से।लोग उसके मुरीद अब भी हैं बनते देखो!कटोरा हाथ में थमवाता है चालाकी से।दर-दर की ठोकरें खाओ तो […]

ज़ाहिर अब हर सम्त है, ज़ालिम है सरकार

August 29, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मन में बैठा चोर है, नहीं कहीं है ठौर।जनता-गठरी काटते, चोरों का है दौर।।दो–नाग विषैला दिख रहा, जड़ी बनी निरुपाय।लौट सँपेरे अब रहे, दिखता नहीं उपाय।।तीन–पानी-पानी हो रहे, यहाँ-वहाँ हैं […]

आज (२८ अगस्त) फ़िराक़ गोरखपुरी की जन्मतिथि पर विशेष

August 28, 2020 0

◆ आज (२८ अगस्त) फ़िराक़ गोरखपुरी की जन्मतिथि है। “ख़बर दो हुस्न को, मैं आ रहा हूँ”– फ़िराक़ गोरखपुरी — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय फ़िराक़ एक फक्कड़ व्यक्तित्व का नाम है। पाँव से सिर तक […]

भोजपूरी के पोंछिटा मत खींच…S..S..S

August 27, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भोजपूरी के हड़ाह लिक्खाड़), परियागराज भोजपूरी ‘चिनियाबादाम’ न हवे ए बाबू कि अँगुठवा दबाई के फोरि देहला आ मुँहवाँ में ढुकाइ लेहल। जेकरा फराकी ठोकला के बदिया……धोवे के सहूर ना […]

चाँद ने हमको पुकारा

August 25, 2020 0

नेपथ्य से जब चेतना ने, वेदना का विष पिलाया।संदली ज़ज्बात लेकर, चाँद ने हमको पुकारा।। अमूर्त थी जो पीर अब तक,मूर्त हो खिंचती लकीरें।वार देने पर तुली वो,निज भ्रमों के सब ज़खीरे। सुरमई आँखों से […]

मन्त्र आह्वान के गुनगुनाते हुए

August 25, 2020 0

नेह की यज्ञवेदी सजाकर प्रिये!सब हविष् के लिए खोजने तन चले।मन्त्र आह्वान के गुनगुनाते हुए,कुछ निमिष के लिए मोहने मन चले।। आस-विश्वास के आसनों के तले,ज्ञान-विज्ञान सारे दबे रह गये।मन को स्थिर किये बैठे विनियोग […]

रंज़ो ग़म दूर फेंक ‘पृथ्वी!’ दूर तू निकल

August 24, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ख़ुद को टटोलकर, टटोलता अब उन्हें,अपनी सदा सुनकर, देता हूँ सदा उन्हें।किस बात पर मुझसे, वे पराये हो गये?पैठकर गहराई में, तोलता हूँ अब उन्हें।एहसास यों ठण्ढा रहा, कुछ सका […]

एक एहसास

August 24, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय उसकी माँग की सिन्दूर हरजाई लगती है,उसके होठों की लाली बहलाई लगती है।थकीं-हारीं, लुटीं-पिटीं नज़रें हैं ख़ामोश,पतझर में खोयी जैसी अमराई लगती है।आँखों की नींद पसरी, ख़यालात सो गये,खोयी-रोयी बिरहिन […]

हरजाई बन रहे रिश्ते आँखों के सामने

August 23, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय उठ रही है हर लहर आँखों के सामने ,गिर रही है हर लहर आँखों के सामने।बेहयाई कर रही हक़ीक़त-अफ़्ज़ाइश,गिर रही है हर हया आँखों के सामने।ज़माने की दुश्वारी से भला […]

चलो! हम वहाँ चलें

August 22, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हवा यहाँ उदास कुछ, धुन्ध आस-पास कुछ। गुब्बार-ही-गुब्बार है; चलो! कहीं दूर चलें। रूप-रंग नहीं निखरे, गेसू सब ओर बिखरे। संयम अब चंचल है; चलो! कहीं दूर चलें। घर-द्वार साँय-साँय, […]

“न ख़ुदा ही मिला, न विसाले सनम!”

August 19, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मुझे ऐसा कोई भी व्यक्ति पसन्द नहीं है, जो कहता कुछ हो और करता कुछ हो। ऐसों से मैं दूरी बना लेता हूँ। अधिकतर ‘लिक्खाड़’ और ‘वाचाल’ लोग ‘महिला- स्वातन्त्र्य’ […]

बिना मुखर व्यक्तित्व बनाये यहाँ हमारी कौन सुनेगा

August 18, 2020 0

जगन्नाथ शुक्लम ✍️ (प्रयागराज) : पैरों तले ज़मीन नहीं है, आसमान में कैसे खिलता?बिना मुखर व्यक्तित्व बनाये, यहाँ हमारी कौन सुनेगा? मानदण्ड की सीढ़ी टूटी,टूटी मानवता की रीढें।आड़े-तिरछे चलने वालों;को ही मिलते ऊँचे पीढे।। दिल […]

चाल, चरित्र औ चेहरा, कैसे-कैसे लोग

August 17, 2020 0

चाल, चरित्र औ चेहरा, कैसे-कैसे लोग ।कथनी-करनी में लगा, जैसे विकृत रोग ।।जैसे विकृत रोग, समझ न आती माया ।भोले- भाले दीखते, तले स्वार्थ की छाया ।।खुद पर संकट जब पड़े, चहें मदद कर जोड़ […]

विप्लव का अब समय है, कफ़न माथ पर बाँध

August 15, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–आज़ादी किस काम की, है ज़बाँ पर ताला।अंग-अंग विष से भरा, मन कितना है काला।।दो–नरक बनाये देश को, लाकर गन्दी नीति।आह बटोरे जा रहे, अजब-ग़ज़ब की रीति।तीन–ख़ुद को अब आज़ाद […]

ख़ुद को अब आज़ाद कर, निकल सड़क की ओर

August 15, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–दिखता देश ग़ुलाम है, हम पर है परहेज़।निजता सबकी है कहाँ, ख़बर सनसनीख़ेज़।।दो–संकट दिखता बाढ़ का, नहीं किसी को होश।“त्राहिमाम्” हर ओर है, जन-जन में आक्रोश।।तीन–प्रश्न ठिठक कर है खड़ा, […]

पीएम केअर फण्ड के कहाँ गये सब नोट?

August 15, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–रोज़गार सब खा गये, नौजवान हलकान।नीति बदलती रोज़ है, अटकी सबकी जान।।दो–हिन्दू भगवा नाम पर, ठगते हैं हर रोज़।जनता मोहित हो रही, तरह-तरह की खोज।।तीन–काग़ज़ पर है दिख रहा, देश […]

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