क्रान्ति को जन्म दे, ऐसी ‘जननी’ हमें चाहिए

August 15, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सुगबुगाहट हो तो, अब आग उठनी चाहिए, हो कहीं भी आग तो, आग लगनी चाहिए। बहुत सोये हो तुम! अब जग जाने को सोचो, उठाओ अब मशाल, लपट उठनी चाहिए। बूढ़ा भारत […]

सत्ता चरित्र है बड़ा विचित्र

August 15, 2018 0

दीप कुमार तिवारी, करौंदी कला, सुलतानपुर 7537807761 सत्ता चरित्र है बड़ा विचित्र सत्ता चरित्र, उजले चेहरे धुंधले होते हम आम सुधी जन, लाख जतन कर सच्चाई को समझ ना पाते हाथ रगड़ते फिर पछताते ।। […]

गिरती है सीमा पर लाशें

August 14, 2018 0

 प्रदीप कुमार तिवारी, करौंदी कला, सुलतानपुर 7537807761 गिरती है सीमा पर लाशें चैन से हम तुम सोतें हैं। भूख से व्याकुल बच्चे उस दिन, सैनिक के घर रोते हैं।। हम शहीद कह के उनको, काम […]

सवर्णों देश खाली करो, तुम दबंग हो

August 14, 2018 0

सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ (पत्रकार, बघौली, हरदोई) ऊँश्री गुरूवे नमः गुरू सर्वोपरि 15 अगस्त 2018 स्वतन्त्रता दिवस अमर रहे ! राष्ट्रीय पर्व के अवसर मौलिक मनभावों के पुष्प आदर श्रद्धा से सादर समर्पित हैं। (1) देश […]

अब रोना आता है मुझको, बच्चियाँ लाचार, कौन देखता है

August 10, 2018 0

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ छोटे से दिमाग़ में बसा ली है दुनियाँ चारों और कौन देखता है चौतीस हो गयीं बर्बाद मुजफ्फरपुर कौन देखता है ।   उन्नाव, सूरत, मणिपुर, दिल्ली कौनसा हिस्सा बचा मेरे हिन्दुस्तान अब रोना आता है मुझको बच्चियाँ लाचार, कौन देखता है ।   जब तक बीते न ख़ुद पे बड़े व्यस्त हैं हम चलो प्रार्थना ही करलें पुकारें बेटियाँ कौन देखता है  । Post Views: 15

चैन से जीना सीख लिया

August 9, 2018 0

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ गले लगते दोस्त बोला क्या छोड़ दिया चैन से जीना सीख लिया सारा दिन फेसबुक पर रहना छोड़ दिया चैन से जीना सीख लिया । व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी हर रोज नए पचड़े सर दर्द […]

वक़्त का मिज़ाज बहुत गरम है यहाँ

August 7, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय किसी की बात पर न जाइए हुज़ूर ! किसी की बात पर न आइए हुज़ूर ! दीगर बात है कोई बात ही नहीं, भरा हो पेट तो मत खाइए हुज़ूर ! ज़ख़्मों […]

अच्छे  परिणाम व्यस्तता  के

August 6, 2018 0

बृजेश पाण्डेय बृजकिशोर ‘विभात’ आज की आपाधापी में  व्यक्ति,  व्यक्ति  से छूट गया। निज कर्मों में तल्लीन हो अधिक व्यस्त लवलीन भया। समय नहीं दे  सकता  है, दो – चार प्रेम  के  शब्दों का। आधुनिकता […]

कुछ ख़्वाब बुन लेना

August 6, 2018 0

 डॉ रूपेश जैन ‘राहत’, ज्ञानबाग़ कॉलोनी, हैदराबाद कुछ ख़्वाब बुन लेना जीना आसान हो जायेगा दिल की सुन लेना तेरा इक मक़ाम हो जायेगा । मुद्दत लगती है दिलकश फ़साना बन जाने को हिम्मत रख […]

मैं क्या मेरी आरज़ू क्या

August 5, 2018 0

‘डॉ रूपेश जैन ‘राहत’, ज्ञानबाग़ कॉलोनी, हैदराबाद मैं क्या मिरी आरज़ू क्या लाखों टूट गए यहाँ तू क्या तिरी जुस्तजू क्या लाखों छूट गए यहाँ । चश्म-ए-हैराँ देख हाल पूँछ लेते हैं लोग मिरा क़रीबी […]

1 2 3 42
url and counting visits