हो जाऊँ मालामाल

September 22, 2017 0

राघवेन्द्र कुमार राघव- मिल जाए हमको माल किसी का, मैं हो जाऊँ मालामाल । चाहे हो वो चोरी का, या दे दे वो ससुराल । कण्डीशन लग जाए कोई, चाहें जो हो हाल । मिल […]

अब तो लिखना है मुझको भारत माँ के छालों पर

September 19, 2017 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ लखनऊ- लिखते लिखते थक गया हूँ लाल गुलाबी गालों पर | लिखना मुश्क़िल हो रहा है प्रेमिका के बालों पर || अब तो लिखना है मुझको भारत माँ के छालों पर […]

आवाज़ उठानी ही होगी सरताज बदलने ही होंगे

September 18, 2017 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ लखनऊ (युवा गीतकार) अल्फ़ाज़ बदलने चाहिए जज़्बात बदलने की ख़ातिर | हर सोच बदलनी चाहिए हालात बदलने की ख़ातिर || अग़लात कुचलने हों अगर अस्हाब बदलने ही होंगे | आदाब बदलने […]

बुढ़ापा : एक मार्मिक अहसास

September 15, 2017 0

राघवेन्द्र कुमार राघव- अंगों में भरी शिथिलता नज़र कमज़ोर हो गयी । देह को कसा झुर्रियों ने बालों की स्याह गयी । ख़ून भी पानी बनकर दूर तक बहने लगा । जीवन का यह छोर […]

निज भाषा है अपना मान, हिंदी से ही है सम्मान

September 14, 2017 1

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’, लखनऊ- किस कारण कोई स्वाँग रचो || किस कारण कोई स्वाँग रचो || निज भाषा है अपना मान | हिंदी से ही है सम्मान || अपनी भाषा ही है मूल | […]

मेरी हर कामयाबी पे, तेरा ही नाम होगा

September 10, 2017 0

✍ माज़ अंसारी (गौसगंज, हरदोई)- दी खुशियां तूने जो मुझको, भुलाना न आसान होगा, मेरी हर कामयाबी पे, तेरा ही नाम होगा। रखूँगा तेरे हर तर्ज़ को, खुद में समां कर इस तरह, भूल कर […]

कैसे आती बसन्ती ऋतु प्यार की

September 9, 2017 0

पवन कश्यप (युवा गीतकार, हरदोई)- अधखिले पुष्प जब वो खिले ही नहीं । कल मिलेंगे उन्होंने ये वादा किया, एक अरसा हुआ वो मिले ही नहीं। कैसे आती बसन्ती ऋतु प्यार की   मखमली शाम […]

क्या भरोसा है कल मैं रहूं न रहूं

September 8, 2017 0

पवन कश्यप (युवा गीतकार, हरदोई)- आपके दिल में क्या है बता दीजिये, क्या भरोसा है कल मै रहूं न रहूं। जिन्दगी एक उड़ती पतंग बन गई, थाम लो डोर तुम फिर मिलूं न मिलूं ।। […]

है मुक़द्दर साथ पर कौन जाने क्या लिखा है

September 6, 2017 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’, लखनऊ- ज़िन्दगी इक मर्ज़ है मौत ही बस इक दवा है | ज़िक़्र तेरा यूँ लगा हो रही जैसे दुआ है || मंज़िलों को छोड़कर रास्तों की ख़ाक छानी | वो […]

तेरी इन झील सी आंखों में जो ये नूर दिखता है

September 5, 2017 0

तेरी इन झील सी आंखों में जो ये नूर दिखता है, तेरे चेहरे की मदहोशी में ये मन चूर दिखता है । कहीं जुल्फों का गिर जाना, कहीं अधरों का खिल जाना । कहीं मासूम […]

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