एक अभिव्यक्ति : हर किसी पे भरोसा तुम जताया न करो

April 18, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हर नज़र से नज़रें तुम मिलाया न करो, हर शख़्स से निगाहें खिलाया न करो। कितने एहतियात से तुम्हें सँभाले रखा है, हर किसी पे भरोसा तुम जताया न करो। बेहद ज़ालिम […]

कहाँ सो रहा शौर्य है, सीना दे जो चीर?

April 15, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : ज़बान पर अंकुश नहीं, कैसे हैं ये लोग! प्रेमरोग से विकट है, नेता का संयोग।। दो : नेता-रोग है प्लेग, घर-घर घुसणम होय। देश को चाटें घुन-सा, जन-जन अब है […]

एक अभिव्यक्ति : उसकी चुप्पी क्यों तह होकर रह जाती है चादर में?

April 15, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय उसकी हक़ीक़त सिमट कर क्यों रह जाती है, चादर में, अँगड़ाई लेकर वह क्यों सिमट जाता है, चादर में। ऐ हवा! तू उस तक जाकर मेरा यह सवाल करना, उसकी चुप्पी क्यों […]

गाँव ! हमारा बचपन दे दे !

April 14, 2018 0

        गीत  गाँव ! हमारा बचपन दे दे ! वह मिट्टी के सुघर खिलौने । वह काली बकरी के छौने । वह मेरे गुड्डे की शादी , रोती सी गुड़िया के गौने […]

आसिफ़ा और आदमखोर

April 13, 2018 0

-अमित धर्मसिंह उसने अभी दुनिया को देखना शुरू किया था, समझना नहीं, अगर वह दुनिया को ज़रा भी समझती तो वह समझ जाती बलात्कारियों की चाल, उनकी भाषा और पहनावे से पहचान जाती उनके धर्म […]

एक अभिव्यक्ति : जागर्ति और सुसुप्ति

April 13, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इलाहाबाद के सघन पदातिक पथ पर विश्रान्त-क्लान्त शयन करती प्रौढ़ा, आजीविका-साधन से समन्वय-सामंजस्य स्थापित करती; अद्भुत एकान्वित और पार्थक्य के आचरण की सभ्यता प्रदर्शित करती; अवचेतन से साक्षात् करती, मानो सांसारिकता से […]

कुछ अंतर्मन की बातें

April 12, 2018 0

रचनाकार-पवन कश्यप  गीतों ने की आज गर्जना कब तुम हमको गाओगे, अंदर मेरा दम घुटता,कब मुखमण्डल पर लाओगे । कुछ कहने में अनायास ये होठ कांपने लगते है, कुछ अंतस ने हिम्मत की तो शब्द […]

मेरे पास शब्द है तुम्हें जानने के लिए

April 10, 2018 0

आकांक्षा मिश्रा- उसने कहा मेरे पास शब्द है तुम्हें जानने के लिए इतने शब्द हालात सम्भालने के काम आ सके क्या कहूँ ? अभी-अभी हृदय की पीड़ा बढ़ रही तुम अभी मौन हो ये मन […]

उल्लू सीधा हुआ हमारा, अपने घर सब जाओ

April 7, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- नाचो गाओ ढोल बजाओ, खाओ और खिलाओ। लोकतन्त्र की क़ब्र खुद रही, सब मिल जश्न मनाओ। सब मिल जश्न मनाओ प्यारे! डूब सुरा में जाओ, नंगों की पा नंगी संगत, सब नंगे […]

एक अभिव्यक्ति : मेरे सिर पर तना अम्बर, मुझे धरती पे रहने दो

April 5, 2018 1

जगन्नाथ शुक्ल (इलाहाबाद) चलने दो नियति का चाबुक, मुझे निज  कर्म   करने   दो। मेरे   हिय  में  चला    खंज़र, मुझे  तुम   धैर्य  धरने    दो। कोई ना-क़ाबिल कहे मुझको, उसके आँखों की परख होगी। मेरे   सिर     पर   […]

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