कविता : आजादी की कीमत

September 19, 2018 0

शालू मिश्रा, नोहर (हनुमानगढ) राजस्थान कितना सुंदर कितना प्यारा देखो हिन्द देश हैं, तीन लोक से न्यारा ओर विशेष हैं। सिर पर पहने केसरिया बाना राष्ट्रपहरी यहाँ आए थे, सीने पर गोली खाके हँसते हंसते […]

‘निर्मल मन के मोती’ वाकई निर्मल है  

September 16, 2018 0

‘निर्मल मन के मोती’ कविता संग्रह कवि गौरी शंकर उपाध्याय ‘उदय ’95 कविताओं का गुलदस्ता है | जिसमे कविता मिश्रित गीत एक अदभुत तालमेल का संयोजन है जो मन को छू जाता है | वंदना […]

आरती गजानन जी की, पार्वती नंदन शिवसुत की

September 16, 2018 0

श्री गणेश मनावर जिला धार (मप्र ) के वरिष्ठ कवि श्री शिवदत्त जी “प्राण ” ने लगभग 60 वर्ष पूर्व गणेश जी की स्वरचित आरती लिखी थी जो पूरे मनावर एवं  आसपास के क्षेत्रों  में संगीत […]

गीत – दिल टूटा खिलौने की तरह, पर मैं तो मुसकाता रहा

September 14, 2018 0

जगन्नाथ शुक्ल..✍ (इलाहाबाद) नज़्म-ए-वफ़ा अहल-ए-बज़्म में,मैं सदा गाता रहा। दिल टूटा खिलौने की तरह,पर मैं तो मुसकाता रहा।।—२ अठखेलियाँ  करते  हैं  आँसू, जब तब मेरे पलकों के भीतर, हूँ विवश  मैं   इस  क़दर  कि- घूँटता   […]

वतन का हफ़ीज़ होता है

September 13, 2018 0

जगन्नाथ शुक्ल…✍ जब  दूर  बैठा  कवि  कोई, सर्जन के बीज  बोता  है, भाव में खुद को पा कर, मन में हर्ष का तीज़ होता है। जब दूर…………………………………………………. उठी  जैसे लहर  कोई,  नया  अनुबन्ध  करने  को, […]

हिन्दी हम सबकी पहचान है

September 13, 2018 0

कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी हिन्दी आन है हमारी शान है। हिन्दी हम सबकी पहचान है।। हिन्दी में गीता और कुरान है। हिन्दी ही हम सबकी जान है।। हिन्दी का रखना हमें ध्यान है। हिन्दी में […]

गणेश जी की महिमा

September 12, 2018 0

शालू मिश्रा, नोहर (हनुमानगढ), राजस्थान ऐ विघ्नहर्ता ऐ मंगलकर्ता तू ही दुखहर्ता तू ही सुखकर्ता, एकदंत गजबदन को मेरा बारंबार प्रणाम । चारों ओर मची है धूम गणेश उत्सव की, जीवन में छाई नई आशा […]

मुसाफिर का मन

September 11, 2018 0

शालू मिश्रा, नोहर (हनुमानगढ), राजस्थान मन ये तेरा परेशान क्यूँ है, इस जग से बेफिक्र क्यूँ है, नित नये ख्वाब सजा कर मन में दबा बैठा क्यूँ है। पथ पर नित आगे बढ चल न […]

तेल का देखो खेल

September 8, 2018 0

कवि – राजेश पुरोहित रोज – रोज तेल के भाव चढ़ रहे। सियासत में तूफान भी मच रहे।। विपक्ष के नेता हाहाकार कर रहे। जनता के प्रदर्शन रोज ही हो रहे।। आने वाले अब अगले […]

अदाकारी

September 8, 2018 0

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत” ज़िंदगी के रंग मंच पर आदमी है सिर्फ़ एक कठपुतली । कठपुतली अपनी अदाकारी में कितने भी रंग भर ले आख़िर; वह पहचान ही ली जाती है, कि वह मात्र एक कठपुतली है । ऐसे ही आदमी चेहरे पर कितने ही झूठे-सच्चे रंग भरे अंत में, रंगीन चेहरे के पीछे असली चेहरा पहचान ही लिया जाता है |   Post Views: 26

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