एक अभिव्यक्ति : सपनों के सारे ख़रीदार हो गये

June 24, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : देखते-ही-देखते, हम बाज़ार हो गये, सपनों के सारे यहाँ, ख़रीदार हो गये। गरदन झटक पंछी-मानिंद, उड़ते रहे जो, बेशक, वही अब हमारे, तलबगार हो गये। दो : ज़िन्दगी से छेड़ख़ानी […]

जन-गण-मन का अभिमान है ‘हिन्दी’

June 23, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय समग्र भारत का परिधान है हिन्दी, राष्ट्रीय आन-बान औ’ शान है हिन्दी। भाषाओं में है शीर्ष स्थान पर स्थित, जीवन-मरण का आख्यान है हिन्दी। आओ! करें नमन अपनी राजभाषा को, हमारे आचरण […]

एक अभिव्यक्ति : नत-अवनत मुद्रा में, वात्स्यायन की सम्पन्न दीक्षा

June 22, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय निभृत-निलय में वितान तानता मन, निश्शब्द-मूक याचना– सम्पृक्त उर्वशी-मेनका का तन। अनाघ्रात पुष्प-सा– सर्वांग सौन्दर्यस्वामिनी-द्वय की कान्ति, समग्र संसार-संसूचित– कमनीय कामिनी के क्लान्त कपोलों की भ्रान्ति। रूप, रस, गन्ध स्पर्श का आकर्षण, […]

कविता : अन्तर्यात्रा

June 21, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : शुष्क पड़ी संवेदना, घायल रक्त-सम्बन्ध। अजब खेल है मोह का, कैसा यह अनुबन्ध? दो : मेरा-तेरा किस लिए, माया से अब डोल। गठरी दाबे काँख में, द्वार हृदय का खोल।। […]

आवर्त्तन और दरार

June 20, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : कल तक था जो जगद्गुरु, भ्रष्ट बन गया देश। दिखते सब बहुरुपिये, तरह-तरह के वेश।। दो : कुम्भकर्णी सब नींद में, नहीं किसी को होश। बाँट देश को सब रहे, […]

योग क्या है ?

June 20, 2018 0

कवि राजेश पुरोहित (राजस्थान) योग आत्मा से परमात्मा का मिलन निर्मलता स्वच्छता का संदेश मानसिक शांति का उपाय तन बने सुदृढ़ मन मे जगे आत्मविश्वास नई उमंग नई चेतना नई स्फूर्ति नए उल्लास का उदय […]

आगत-अनागत

June 19, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : नभ से उतरा चाँद है, दिखता बहुत उदास। धरती सिसकी रातभर, नहीं दिखे अब आस।। दो : जड़-चेतन हैं सोच में, मानव बहुत कठोर। पापकर्म गठिया रहा, रात हो गयी […]

एक गीत : ये दिल मत तोड़ना पगली,जो धड़के तेरे सहारे ही

June 18, 2018 0

जगन्नाथ शुक्ल…✍ (इलाहाबाद) चले  आये  थके-हारे ,इन  जज़्बातों  के सहारे ही, ये दिल मत तोड़ना पगली,जो धड़के तेरे सहारे ही। इसे मत भूल जाना तुम,इसका अपमान मत करना, बड़ा  मासूम-सा ये दिल, इसे  मजबूर  मत करना। […]

“विशुद्ध वंदना” : परम पूज्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के चरणों में समर्पित

June 17, 2018 0

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ वेष दिगम्बर धारी मुनिवर करुणा अब जगाएँगे पार करो खेवैया नहीं तो हम भव में ठहर जाएँगे । भक्ति भाव से आपको पुकारें हे! विशुद्ध महासंत कृपा प्रकटाओ अपनी नहीं तो […]

अजीब सी बस्ती

June 9, 2018 0

  राघवेन्द्र कुमार “राघव”- अन्त:विचारों में उलझा न जाने कब मैं, एक अजीब सी बस्ती में आ गया । बस्ती बड़ी ही खुशनुमा और रंगीन थी । किन्तु वहां की हवा में अनजान सी उदासी […]

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