उत्तरदायी

December 9, 2017 0

आकांक्षा मिश्रा–  इन विगत वर्षों में अनगिनत सवालों ने बहुत परेशान तुम्हे परेशानिया उठाई नही कुटिल मुस्कान नई चालें चल रही थी अगले दिन के लिए मुग्धा अनायाश भटक रही थी ओट में चाहों में […]

एक बेग़ाने के नाम पत्र

December 7, 2017 0

आकांक्षा मिश्र- पिछले कुछ दिनों से देख रही हूँ तुम व्यवस्थित जीवन जीने के लिए घर का नक्शा बदल रहे हो । साथ ही जीने का सलीका भी । अच्छा है गतिमान जिंदगी के कई […]

किसने क्या कहा?

December 6, 2017 0

 डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- जब मैं जीवन का मूल अस्तित्व तलाश करने लगा तब हृदय ने अतिवादी कहा | जब मन को मन में पैठाने लगा तब शरीर ने उत्पाती कहा जब विचार का विचार से […]

हिन्द की एकता

December 5, 2017 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद- शंख और अजान से होती है भोर मेरे भारत की, ये बात है हमारे अटल विश्वास और आदत की। हिन्द की शान में हम एक ही हैं जान लो ‘जगन’ बात है […]

भूल जाओगे हमें यह पाप है

December 4, 2017 0

पवन कश्यप (युवा गीतकार, हरदोई)- यदि नयन रोते रहे संताप होगा। भूल जाओगे हमें यह पाप होगा।। हरि से हरि नारद बने थे, प्रेम मे बस वह सने थे। शब्दों के फेरो में फसकर, मायूसी […]

सूरज की किरणें

November 30, 2017 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद, मो०- ९६७००१००१७ अरुणोदय हो गया शिखर में, किरणों से सुरभित हो गई धरा। पशु-पक्षी भी हो गए प्रफुल्लित, धरती का दामन है हरा – भरा। कलियां पुष्पित होकर मुसकाईं, चञ्चरीक ने किया […]

एक अभिव्यक्ति

November 28, 2017 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- तुम्हारी पूर्णता भाती नहीं मुझे क्योंकि तुम मुझसे द्रुत गति में दूर हो रहे हो। हाँ, मैं अपूर्ण हूँ। तुम मुग्ध हो, अपनी पूर्णता पर और मैं गर्वित हूँ, अपनी अपूर्णता पर […]

निराश मन की आशा

November 28, 2017 2

रचयिता- सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ (लखनऊ हरदोई रोड टावर प्लाट सुन्नी, निकट बघौली चौराहा) एक पढ़ा लिखा नामी-गिरामी परिवार से जुड़ा युवक जब घर परिवार की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता तो उसको घर के […]

ग़ज़ल- अन्धों का शहर है यहाँ जागते रहो

November 28, 2017 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद हर आँख है उनींदी सी आँकते रहो। अन्धों का शहर है यहाँ जागते रहो।। आँखों में है मुहब्बत या है नुमाईश, हर पल निगाहें उनकी भाँपते रहो। कैसा है दस्तूर और कैसा […]

हाइकु : मिट्टी

November 27, 2017 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद- * १* मैं ही मिट्टी हूँ! धरा की चहक हूँ! सुरभित हूँ! *२* चाक की शान हूँ! सोंधी सी महक हूँ! मैं तिलक हूँ! *३* मैं करीब हूँ! मौत में नसीब हूँ! […]

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