सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

Prisha, Unveiling the Real World!

January 20, 2023 0

Prisha, a girl with mellifluous voice and cheerful personality believes that one could create his/her own world. Her peculiar ways of looking at life is her individuality. She believes that one should enjoy little things […]

कहानी प्यार की : अधूरा पन्ना

November 7, 2022 0

उसने कहा कि मेरे सिवा उसका कोई अपना नहीं है हमने कहा अच्छा , और हां सुनो मुझे न तुम्हारे सारे दुख बाटने है हमने कहा अच्छा , मुझे तुम्हारी स्माइल, तुम्हारी आंखें, गाल पर […]

लघुकथा : भरोसा (‘कांच का प्याला’ विषय पर आधारित)

May 5, 2022 0

नीना अन्दोत्रा पठानिया (युवा साहित्यसेविका)- सभी रात का खाना खाकर अपने – अपने कमरे में चले गये और नई नवेली रमा किचन का बाकी काम समेट रही थी । कुछ महीने ही हुए थे अभी […]

लघुकथा : अवाक्

May 5, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा, गोंडा, उत्तर-प्रदेश— सुबह रिया ने आवाज दी रिशु बेटा उठो मम्मा आज जल्दी क्यों, पता है रिशु आज हम लोग गांव जा रहे है ; दादी से मिलने । मम्मा गांव में मजा […]

लघुकथा : पार्क की घुमक्कड़ी

May 3, 2022 0

 अभिरंजन शर्मा (बिहार)- वो दोनों बेफिक्र हो कर पार्क में घूमते थे। हाल-ए-दिल बयां करते थे। वे हर दिन मिलते थे। बिना किसी डर-भय के। बगल में पुलिस थाना भी था। समाज की हर बंदिशों […]

कमज़ोर बुनियाद

April 21, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा- जिंदगी कितनी उबड़-खाबड़ रास्तों को तय करती हुई चलती रहती है । शुरुआत भी कठिन और अंत भी, मिलते हुए राहगीर भी छल द्वन्द्व से भरे हुए है हुकूमत का अच्छा नकाब चेहरे […]

गीत- कलम-कबूतर

April 14, 2022 0

राश दादा राश, बंगालुरू ये कलम है मेरी शोख ए अदा कबूतर बनकर उड जाती । हर छत पर जा दाना लाती कभी रात अंधेरे खो जाती ।  कभी गुटुर गुटुर करती चलती कभी बडे […]

बयाँदारी हमारी

April 14, 2022 0

राश दादा राश (बंगालुरू)- कायस्थ* हूँ कागजी कारोबार है मेरा स्याही से रिश्ता और कलम यार है मेरा नब्ज ना टटोलना यारों ,मेरे जिस्म का मयखाने की बस्तियां शराबी टोलियाँ मेरे धमनियों मे प्रवाहित रक्त […]

एक उलझन

October 11, 2021 0

(पहला अंक ) मुझे अफसोस है , कि तुमसे कोई बात कभी कही सुनी होती तो आज ऐसे दौर से न गुजरती । खैर कर ही क्या सकती हूँ ? खिड़की खोलती हूँ कोयले से […]

कहानी – “सरहद”

May 29, 2021 0

पायल रॉय, संस्थापक – “शिक्षा एक उज्ज्वल भविष्य की ओर” (युवा समाजसेविका, जबलपुर, म. प्र.) शाम का समय हो चला था। आज बादल कुछ ज्यादा ही साफ दिखाई दे रहे थे और हमेशा की तरह मैं […]

मन हार गया तब तुम हारे, मन जीत गया तो जीते तुम

September 26, 2020 0

अनिल चौधरी ( बैंक अधिकारी ) इस क्रूर काल के हर रण में,हर अवरोहण आरोहण में ।तुम खुद ही खुद का संबल हो,जीवन संघर्षों के क्षण में ।। शूलों से छलनी पावों को ,पीड़ा से […]

कहानी : तब क्या होगा ?

July 31, 2020 0

महेन्द्र महर्षि (सेवा निवृत्त; वरिष्ठ प्रसारण अधिकारी) गुरूग्राम : बुद्ध प्रकाश का सपना अभी और आगे भी चलता , मगर ऐसा नहीं होता कि सपनों का संसार वास्तव में साकार होता ही हो। सुबह की […]

कहानी : विभाजन की रेखाएँ

July 2, 2019 0

राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित” कहानीकार, वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि कुण्डलपुर गाँव में आज एक ही चर्चा थी सेठ धनपत राय के चारों बेटे ने अपना अपना हिस्सा ले लिया। सेठजी की धन दौलत मकान दुकान […]

Short Story : BE MY NEEM

June 27, 2019 0

Zaitoon Zia – They both met daily at morning walk. She was in her 40s he was about to touch 30 Juz after 2 autumn! she came to meditate, he came to jog ! Smiles […]

लघुकथा : आकर्षण

June 27, 2019 0

राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’, कहानीकार संगीता की ससुराल में सब अमन चैन था । खाता पीता परिवार था। समाज मे अच्छी इज्जत थी। उसके ससुर जीतमल जी गाँव के सबसे अमीर आदमी थे। गाँव वाले […]

कहानी : अफ़वाह

June 22, 2019 0

राजा को जनता पर संदेह हुआ। वह बोले मैंने इन्हें सब कुछ दे दिया फिर भी भूखमरी । आखिर क्या वजह है। उन्होंने पुरोहित जी को बुलाकर पूरी समस्या बताई। पुरोहित जी ने राजा को […]

कहानी : मनमीत

May 24, 2019 0

एडवोकेट तृषा द्विवेदी ‘मेघ’, साहित्यसेविका, उन्नाव- इंगेजमेंट हो जाने के बाद देवेश और देविका दोनों एक -दूसरे से मिलने-जुलने लगे थे । दोनों ही समान गुणवान व योग्य थे, देवेश बी0 एड0 करके गवर्नमेंट टीचर की […]

लघुकथा : परछाई

April 12, 2019 0

दीदी आज मुझे बहुत डर लग रहा है। रात में भूतों के साये की खबर पड़ी थी। रात में मुझे उस भूत ने बहुत डराया। मैं पूरी रात सो नहीं पाया। मैं बोलना चाहता था […]

चलो मेरे साथ

April 9, 2019 0

आकांक्षा मिश्रा, गोंडा, उत्तर प्रदेश आज , इक्कीस तारीख है । पूरा एक साल बीत गया , अपनी जिंदगी को अपनी तरह जीने की ख्वाईश भीतर ही भीतर दबी पड़ी थी । इन ख्वाइशों ने […]

एक कहानी : तब क्या होगा ?

July 31, 2018 0

महेन्द्र महर्षि , 31.7.2018. गुरूग्राम- चारपाई पर लेटा बुद्ध प्रकाश , जिसे घर पड़ौस के लोग लाड़ में बुधवा कहकर बुलाते हैं , आसमान में चमकते तारों को देखता – देखता न जाने कब सो […]

1 2