व्यंग्यात्मक ग़ज़ल :- पति की अभिलाषा

September 8, 2018 0

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’  सुन्दर डीपी लगा रखी है मोहतरमा अब तो चाय पिला दें सुबह उठते से ही देखो की है तारीफ़ अब तो चाय पिला दें । सोच रखा है छुट्टी का दिन […]

‘चाचा’ के कारामाती बोरिया

June 28, 2018 1

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ओकर बियहवा बिदेसे में कराई दीहल जाऊ का? आपन ओनिए रहि के फरियावत रही। काहें से कि जब देख तब, ओकरा गोड़वा में शनिचरे चढ़ल रहेले। हमरा इहो लागता कि ओ जनम […]

‘कर’ ‘नाटक’…….पर्दा उठा; नाटक शुरू

May 10, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘कर’ ‘नाटक’ अपने-अपने उस्ताद के साथ जम्हूरे पहुँच गये हैं; ,वहीं हमने भी अपने उस्ताद और जम्हूरे भेज दिये हैं। “तो बोल जमूरे!” “हाँ ओस्ताद!” “जमूरे! ‘कर’ ‘नाटक’ का चुनावी बुखार क्या […]

उल्लू सीधा हुआ हमारा, अपने घर सब जाओ

April 7, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- नाचो गाओ ढोल बजाओ, खाओ और खिलाओ। लोकतन्त्र की क़ब्र खुद रही, सब मिल जश्न मनाओ। सब मिल जश्न मनाओ प्यारे! डूब सुरा में जाओ, नंगों की पा नंगी संगत, सब नंगे […]

वैलेण्टाइनोत्सव पर सटीक व्यंग्यात्मक प्रस्तुति : काहेक सोचु करै…

February 15, 2018 548

अवधेश कुमार शुक्ला (प्र. अ. जू. हा. कामीपुर) बबूल के वृक्ष पर पीली- पीली रेखावत, लटकती, झूलती, कुछ गुच्छिल, कुछ स्वतन्त्र लटकनों को देखा । देखने में आकर्षक, आलिंगन को उसी तरह मचलती लगीं, जिस […]

जय हो यूपी बोर्ड परीक्षा की

February 12, 2018 0

अनिल मिश्र- नीक काम एक भवा है अबकी यूपी बोर्ड परीक्षा मा । गुणवत्ता फिरि आई धीरे धीरे बिगरी शिक्षा मा । लागि कैमरा कमरा कमरा ताका झांकी बन्द हुई । नकल समुल्ली इमला बोली […]

‘लव जेहाद’ बनाम ‘लव ऐण्ड लवेरिया न्यू इण्डिया प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी’

January 17, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय  कभी नौकरी को ‘नौकरी’ की तरह से की ही नहीं। वैसे भी कोई इतना मज़बूत खूँटा किसी के पास था भी नहीं कि कोई बाँध सकता। पगहा तुराकर भाग खड़ा होता था। […]

जी हाँ, मैं प्यार बेचता हूँ

January 17, 2018 394

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- आइए जनाब! मैं प्यार बेचता हूँ। किसिम-किसिम का प्यार तरह-तरह का प्यार भाँति-भाँति का प्यार नाना प्रकार का प्यार विविध प्रकार का प्यार। आप प्यार, आम प्यार, ख़ास प्यार मर्दाना प्यार, जनाना […]

हाँ, साहेब! यही चुनाव है

January 12, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- साहेब! यही चुनाव है। चुनावी मौसम है, दलदल में अब पाँव हैं। हवा का रुख़ नामालूम, दो नावों में पाँव हैं।। साहेब! यही चुनाव है। हत्यारे, बलात्कारी, व्यभिचारी चहुँ ओर, धर्म, जाति, […]

व्यंग्य भोजपुरी भाषा में : अब काँहें पिपरा ता, झँख!

November 19, 2017 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ”अच्छे दिन आयेंगे-अच्छे आयेंगे”—- इहे सुनाई-सुनाई के, देखाइ-देखाइ के उ तहरा के भरमवले रहे आ तब तहरा के हमार बतिया न नू बुझात रहे; तब त कनवाँ में ठेपी लगाइ के ‘नमो-नमो’ […]

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