ब्लॉक कोथावां में वोटर लिस्टों की बिक्री के नाम पर हो रही अवैध वसूली

“जमूरा-जमूरा, जमूरा-जमूरा, जमूरा-जमूरा”

April 15, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जमूरे!बोल ओस्ताद।अबे! कहाँ मर गया तू?यहीं तो हूँ ओस्ताद! तेरे पिच्छू।कोरोना से अब तक लाखों लोग मर चुके हैं।फिर ओस्ताद!अबे हरामख़ोर!तुझे क्यों रखा है?’मन की बात’ सुनाऔर यहाँ बटोरी गयी […]

बाहर का कप

April 4, 2021 0

आकांक्षा मिश्रा मोहिनी, सुबह 7 बजे से लेकर 11 बजे तक अपनी मेम साहब के यहाँ काम करती । सारे काम मोहिनी के जिम्मे ……. मेमसाहब 8 बजे उठती, उसके एक घण्टे पहले मोहिनी के […]

चिंतन : मूरख को मूरख कहै, अतिशय मूरख होय

April 2, 2021 0

आज ‘फर्स्ट अप्रैल’- मूरख दिवस है । आज के दिन चतुर लोग किसी को मूर्ख बनाने में आनन्दित होते हैं । मूर्ख बनाये नही जाते, होते ही हैं । मूर्खता साधारण बुद्धिमानो को विकार या […]

पढ़ीं-लिखीं चतुर मूर्ख महिलाएँ

March 30, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मैं गंगा-गोमती से लखनऊ जा रहा था। मेरे पार्श्व में दो महिलाएँ एक बच्चे के साथ बैठी हुई थीं। मैं अपनी पुस्तक ‘समग्र सामान्य हिन्दी’ और ‘समग्र सामान्य ज्ञान’ के […]

सरकार बहादुर की चड्ढी सरकती हुई

February 6, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भाइयों-बहनों-मितरों! फोर ट्वेंटी वेब ४२० पर यह खोखलीवाणी का ८४० झूमरी तलय्या का ढपोरशंखी-केन्द्र है। मैं लफ़्फ़ाज पण्डित लफ़्फ़ाजी का पिटारा लेकर ख़ुदा को हाज़िर-नाज़िर जानकर दरवाज़ातोड़ हाज़िर हूँ। जैसा […]

व्यंग्य : नेताओं का बोलबाला

February 5, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी, सतना, हिनौती, मध्य प्रदेश संसद भवन में आजनेताओं का बोलबाला चल रहा है ।अब हमारे देश में सिंधिया जैसेनेताओं का जन्म हो रहा है । कोई खुद को बेच रहा हैतो कोई किसी […]

इहे ह भोजपूरी बाबू!

January 23, 2021 0

“अब देख ना हे भछनो के” — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (सर्वाधिकार सुरक्षित — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २३ जनवरी, २०२१ ईसवी।)

क्रिमिनल बाबा का दरबार

January 20, 2021 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय : ‘क्रिमिनल बाबा’ का अय्याशीभरा दरबार सज गया है। धर्म-कर्म का ठीकेदार ‘क्रिमिनल बाबा’ ६५ इंच का सीना फुलाये धर्म-कर्म की झाड़-फूँक कर रहा है। पहली भक्तिन— बाबा के चरणों में […]

तानाशाही चरम पर, नहीं कोई दरकार

October 12, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–गयी हाथ से नौकरी, लोग हुए बेकाम।नमो-नमो का जप करो, बोलो जयश्रीराम।।दो–शर्म-हया सब पी गये, छान पकौड़ा तेल।जनता जाये भाँड़ में, अजब-ग़ज़ब का खेल।।तीन–थपरी मारो प्रेम से, उत्तम बना प्रदेश।गुण्डे […]

योगी! तेरे राज्य में जनता है मज़बूर

October 6, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अन्धकार है छा गया, शासक है बेहोश।पनही लगाओ मुँह पर, आये शायद होश।।जनता भी कुछ कम नहीं, चाटे शहद लगाय।‘हिन्दू’ ‘मन्दिर’ जाप कर, स्वर्ग सहज ही पाय।।पानी-बिजली दूर अब, सब […]

न्याय-देवता कह रहे, लाओ! घर में सौत

October 2, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कैसा यह भगवान् है, चोर-चमारी भक्ति।मन्दिर में मूरत दिखे, उड़न-छू हुई शक्ति।।दो–पट्टी बाँधे आँख में, देश जगाता चोर।भक्त माल सब ले गये, कहीं नहीं अब शोर।।तीन–अजब-ग़ज़ब के लोग हैं, शर्म-हया […]

रोज़गार की चाह में, उजले होते बाल

September 28, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–जपो नमो-नमो माला, लिये कटोरा हाथ।कंगाली में देश है, दिखे न कोई साथ।।दो–देश की शिक्षा चोर है, चहुँ दिशि दिखें दलाल।रोज़गार की चाह में, उजले होते बाल।।तीन–देश विपक्षी ‘कोमा’ में, […]

व्यंग्य : E-पोथी अर्थात Google बाबा

September 24, 2020 0

चिन्तन : पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, ई-पोथी पढ़ि जिये। बालपोथी (कक्षा एक की पुस्तक) से आरंभ शिक्षा ई -पोथी ने क्या ले लिया,चमत्कार हो गया। बस्ते बच्चों या लेखपालों को लादने से मुक्ति मिली। […]

सबके-सब धुत्त दिख रहे इस मैख़ाने में!

September 24, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–सियासत लिपटी बदनामी की चादर में,सबके-सब धुत्त दिख रहे इस मैख़ाने में!दो–अजीब-सा सन्नाटा पसरा इधर और उधर,आग बो डालो अब, कहीं बीत न जाये पहर।तीन–बात आते-आते नज़र में ठहर आती […]

भोजपूरी के पोंछिटा मत खींच…S..S..S

August 27, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भोजपूरी के हड़ाह लिक्खाड़), परियागराज भोजपूरी ‘चिनियाबादाम’ न हवे ए बाबू कि अँगुठवा दबाई के फोरि देहला आ मुँहवाँ में ढुकाइ लेहल। जेकरा फराकी ठोकला के बदिया……धोवे के सहूर ना […]

“न ख़ुदा ही मिला, न विसाले सनम!”

August 19, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मुझे ऐसा कोई भी व्यक्ति पसन्द नहीं है, जो कहता कुछ हो और करता कुछ हो। ऐसों से मैं दूरी बना लेता हूँ। अधिकतर ‘लिक्खाड़’ और ‘वाचाल’ लोग ‘महिला- स्वातन्त्र्य’ […]

पीएम केअर फण्ड के कहाँ गये सब नोट?

August 15, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–रोज़गार सब खा गये, नौजवान हलकान।नीति बदलती रोज़ है, अटकी सबकी जान।।दो–हिन्दू भगवा नाम पर, ठगते हैं हर रोज़।जनता मोहित हो रही, तरह-तरह की खोज।।तीन–काग़ज़ पर है दिख रहा, देश […]

आज की स्वतन्त्रता

August 15, 2020 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ नयी सुबह की आहट पाकर,अलसाया भारत जाग रहा है ।जो जन गण मन को फांस सके,वो जाल बहेलिया डाल रहा है ।सब्ज़बाग अच्छे होते हैं खुद के ही,इन्द्रजाल में फंसकर क्यों […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

August 1, 2020 0

● ख़ुदग़रज हँसी बनाम ख़ुद्दार तबस्सुम सच, हँसी कितनी हसीन होती है और गुस्ताख़ भी कि आप चाहकर भी उससे अलग नहीं हो सकते। शातिर हँसी तो इंसान की फ़ित्रत का बाख़ूबी बयान करती है। […]

‘चौकीदार चाचा’ के फराकी ठोकल माहँगा पड़ि गउवे

June 27, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ओकर बियहवा बिदेसे में कराई दीहल जाऊ का? आपन ओनिए रहि के फरियावत रही। काहें से कि जब देख तब, ओकरा गोड़वा में शनिचरे चढ़ल रहेले। हमरा इहो लागता कि […]

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