जस्टिस फॉर प्रियंका रेड्डी

December 6, 2019 0

सीतांशु त्रिपाठी, जिला- सतना (मध्यप्रदेश) फिर लुट गई है गुड़िया किसी मां की चलो रे हम सब मिल के फिर उसको इंसाफ दिलाये । उसकी तस्वीर पर जस्टिस फॉर प्रियंका रेड्डी लिख कर दो-चार दिनों […]

व्यंग्य : नेताओं से यारों होता गदहा महान है

December 1, 2019 0

राजन कुमार साह ‘साहित्य’ (दरभंंगा, बिहार) चंद नेताओं से यारों होता गदहा महान है । चंद पैसो के लिए बेचता नहीं अपना ईमान है । कौन कहता है हमारे देश में महंगाई बहुत है । […]

आवर्तन और दरार : ‘नीति’ छिछोरी दिख रही, ‘राज’ हुआ असहाय!

October 31, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– एक : राष्ट्रवाद छद्म बना, चहुँ दिशि दिखते चोर। मुँह काला हो रात में, चन्दन चमके भोर।। दो : तन पाप में ख़ूब रमा, पुण्य नहीं है पास। मुखमण्डल जल्लाद-सा, कैसे आये […]

राम और रावण गले मिलने लगे हैं !

October 8, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– कैसे-कैसे बाबा अब दिखने लगे हैं, कामिनी ले बाँहों में खिलने लगे हैं। भगवा वस्त्र औ’ कलंकित मर्यादा, आश्रम में बहुरुपिये दिखने लगे हैं। कौन है साधु और शैतान भी कौन? चरित्र […]

हे ईश्वर! हम ‘भारतीय’ कितने मूर्ख हैं

September 30, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- आपने कभी विचार किया है :– भारतीय अपनी सन्तति की जन्मतिथि (जन्मदिन का प्रयोग अशुद्ध और अनुपयुक्त है।) के अवसर पर आयोजित समारोहों में जलती हुई मोमबत्तियों को क्यों बुझाते हैं? ‘केक’ […]

‘शिक्षक-दिवस’ पर विशेष टिप्पणी : “शिक्षे! तुम्हारा नाश हो”

September 5, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- आज ९९ प्रतिशत गुरु कुटिल बन चुके हैं। वहीं पूर्व के गुरु, जो जीवन-मूल्यों की ‘कल’ तक रक्षा करनेे के लिए प्राण-पण से तत्पर रहते थे और अपने शिष्यवृन्द को भी चैतन्य […]

व्यंग्य : आजकल के दोस्त

August 25, 2019 0

कवि : सितांशु त्रिपाठी– आज जब मुझे लगा कि शायद न अब हैं मेरे भविष्य का कोई ठिकाना , तब सारे नौकरी वाले दोस्तों ने कहा नौकरी न लगे तो बिल्कुल न तुम घबराना , […]

काश कि हर लड़की दुआ करती कि उसको रावण सा भाई मिला होता

August 13, 2019 0

लेखक – सीतांशु त्रिपाठी, सतना मध्यप्रदेश आज मैं उस समाज की बात कर रहा हूँ जहाँ कहा तो ये जाता हैं की लड़की लक्ष्मी का रूप होती है । लड़की देवी होती है । लड़की […]

कविता – बेटियां

July 18, 2019 0

जयति जैन “नूतन” घर से भाग जाती है जो बेटियां वे ले जाती हैं कई बेटियों के सपने उनकी उम्मीदें,वह कायम कर जाती है मां बाप के दिलों में एक डर जो उन्हें दिन रात सताता है कहीं दूसरी बेटियों […]

व्यंग्य : राजनीति की शुचिता अब तो नाला बनकर बहती है

April 19, 2019 0

……चुनाव-2019…… फूट रहे हैं बोल भयानक नेताओं के मुख से, जनता हुई है आहत अपने नेताओं के रुख से। बैन लगा योगी के ऊपर रोका गया छिछोरा आजम, बड़ी निराली माया मेनका, मौन हुई अपने […]

मोबाइल का सम्मोहन

April 7, 2019 0

संजय वर्मा ‘दृष्टि’- वर्तमान में फेसबुक, वाट्सअप ने टॉकीज, टीवी, वीडियो गेम्स, रेडियो आदि को काफी पीछे  छोड़ दिया। कहने का मतलब है कि दिन और रात इसमे ही लगे रहते है। यदि घर पर […]

बनना न चौकीदार सजन

March 26, 2019 0

©जगन्नाथ शुक्ल…✍ (प्रयागराज) बनना न चौकीदार सजन, तुमको घर के अन्दर रहना है; यदि शौक है पहरेदारी की, तो सीमा पर जाकर लड़ना है। न संसद की चाह रखो, न मन्त्रालय की सौदेबाजी; तुम्हे देश […]

जोगिरा : मै बन जाऊं भाजपा, पिय मेरे काँग्रेस

March 10, 2019 0

डॉ. प्रिया मिश्रा राजनीति के रंग में अजब गजब का खेललोकतंत्र के राज में देखो पंचतंत्र का मेल…जोगीरा सा रा रा रा रा रा…।हाथी चढ़के बुआ आयी खूब मची हुङदंग,बबुआ जी के पप्पा ने भी […]

दो बेगाने बसपा और सपा एक साथ

January 13, 2019 0

समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव एवं बहुजन समाज पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष कु॰ मायावती की जुगलबंदी आखिर हो ही गयी । वैसे इन दोनों की गलबहियाँ जनता और इन्हें खुद को रास नहीं आती हैं […]

नीति’ छिछोरी दिख रही, ‘राज’ हुआ असहाय!

October 31, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : तन्त्र लोक का है कहाँ, चहूँ दिशा हैं चोर। मुँह काला हो रात में, चन्दन चमके भोर।। दो : तन पाप में ख़ूब रमा, पुण्य नहीं है पास। चेहरा है […]

न्यू इण्डिया’ के लुटेरे ‘कहार’ देखिए!

October 27, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय डोली ‘हिन्दुत्व’ औ’ ‘विकास’ की उठी, ‘न्यू इण्डिया’ के लुटेरे ‘कहार’ देखिए! ‘अच्छे दिन’ की चिड़िया फुर्र हो गयी, सौ डिग्रीवाला चुनावी बुख़ार देखिए! धर्म से शून्य, पर ज्ञान बाँटने में दक्ष, […]

पुस्तक समीक्षा – कृति :- अट्टहास

October 7, 2018 0

प्रधान संपादक :- अनूप श्रीवास्तव अतिथि संपादक:- विनोद कुमार विक्की पृष्ठ:- 56 सम्पादकीय कार्यालय:- 9,गुलिस्तां कॉलोनी लखनऊ उत्तर प्रदेश समीक्षक:- राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित” युवा व्यंग्यकार विनोद कुमार विक्की की मेहनत रंग लाई। विक्की ने अट्टहास […]

गधा-आन्दोलन ज़िन्दाबाद!

October 3, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय गधे बेचारे सोच रहे हैं, हम तो ‘गधे-के-गधे’ रहे और जो हमसे रात-दिन प्रेरणा लेता रहा, वह तो ‘शातिर’ निकला। ऐसे में, ‘गधा- मण्डलीे ‘जन्तर-मन्तर’ में आगामी १५ अक्तूबर को सोमवार के […]

व्यंग्यात्मक ग़ज़ल :- पति की अभिलाषा

September 8, 2018 0

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’  सुन्दर डीपी लगा रखी है मोहतरमा अब तो चाय पिला दें सुबह उठते से ही देखो की है तारीफ़ अब तो चाय पिला दें । सोच रखा है छुट्टी का दिन […]

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