सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहाबाद अव्यवस्था का बना केंद्र

धनलोलुपता के चलते डॉक्टर्स लिख रहे बाहरी दवायें, जिम्मेदार डॉ नोमान उल्ला भी कर्तव्यों के प्रति लापरवाह

=== *शिवकुमार*=====


*शाहाबाद, हरदोई*- राज्य सरकार और उसके उच्चाधिकारी भले ही चाहे जितने प्रयास कर लें,परंतु सीएचसी शाहाबाद के जिम्मेदारों की कार्यशैली के चलते 24 घंटे की स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा करने वाला यह अस्पताल रोगियों के लिए अभिशाप बन रहा है।

जानकारी के अनुसार इस सीएचसी पर केवल सुबह 8 बजे से 1 बजे तक ही रोगी का पर्चा काउंटर पर बनता है और यह काउंटर बाहर की ओर खुले में स्थित है जिस कारण मरीज या परिजन पर्चा बनबाने के लिये कड़ी धूप में अपनी बारी का इंतजार करते है।रोगी के उपचार हेतु चिकित्सक भी तदनुसार उपलब्ध रहते है।परंतु प्राथमिक उपचार की सारी सुविधाओं से सुसज्जित होने के बाबजूद रोगियो को पर्याप्त सुविधा नहीं मुहैया हो पाती।सेहत को दुरुस्त करने के लिए आने वाली दवाओं का रखरखाव भी यहां समुचित ढंग से नहीं होता।प्रायः चिकित्सक रोगी को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए सीरप व विभिन्न कंपनियों की महंगी दवाएं अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए लिख देते हैं।क्योंकि विभिन्न कंपनियों से मिलने वाले कमीशन को ध्यान में रखकर ही चिकित्सक प्राइवेट मेडिकल स्टोर से दवाईयां लेने के लिए दवाव डालते हैं।अधिकारियो द्वारा कई बार निरीक्षण में तमाम खामियां पाई जाने के बाबजूद चिकित्सकों को केवल चेतावनी देकर छोंड़ दिया जाता है।जबकि कभी भी निरीक्षण के दौरान कई डॉक्टर को रोगी को प्राइवेट मेडिकल स्टोर से दवाई लेने का लिखा पर्चा पकड़ा जा सकता है।परंतु डॉक्टर द्वारा गंभीर बीमारी का हवाला देकर,एवं अस्पताल में दवा उपलब्ध न होने की मजबूरी जताई जाती है।पिछले दिनों एसडीएम द्वारा निरीक्षण के दौरान अस्पताल में पर्याप्त सफाई न होने पर प्रभारी चिकित्साधिकारी नोमान उल्ला को आवश्यक दिशा निर्देश दिए लेकिन उनकी कानो पर कोई जूं नहीं रेगी।पिछले काफी समय से सरकारी डॉक्टर द्वारा प्राइवेट रूप से मरीज देखने और पर्चा पर दवाई लिखने का मामला भी सामने आया है।यही नहीं इस अस्पताल की आपात सेवाएं भी कुव्यवस्था का शिकार हैं।सीएचसी में आई तकनीशियन,चश्मा बनाने के नाम पर भी रोगियों को सही सुविधा नहीं मिल पा रही है।डेंटल तकनीशियन तैनात है परंतु वह अस्पताल में यदा,कदा ही दिखता है।क्षेत्र में डेढ़ दर्जन से अधिक मातृ शिशु कल्याण केंद्रों पर तैनात एएनएम भी केंद्रों पर न रहकर तहसील मुख्यालय अथवा जिला मुख्यालय से आती जाती हैं। 24 घंटे की स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा करने वाला यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र,जिम्मेदारों की भृष्ट कार्यशैली के चलते रोगियों के लिए अभिशाप बनकर रह गया है।यही कारण है कि क्षेत्र के रोगी इस अस्पताल में सेहत से जुड़ी सेवाएं न लेकर निजी अस्पतालों की सेवाएं लेना बेहतर समझते हैं।दुर्घटना या मारपीट के मामलों में भी यहां मेडिको लीगल रिपोर्ट बनाने के नाम पर डाक्टर अवैध उगाही करने की सूचनाये भी मिलती रहती है।सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाये बेहतर करने के तमाम प्रयासों को शाहाबाद के सीएचसी के जिम्मेदार पलीता लगा रहे है।इस सीएचसी पर आज भी कई अव्यवस्थाएं जगजाहिर है और सीएचसी के जिम्मेदार डॉ नोमान उल्ला इन अव्यवस्थाओ के प्रति मूक सहमति बनाये है और सब कुछ जानकार भी अनजान बनते है या फिर अपने कर्तव्यों के प्रति और सरकार की मंशा को खिलवाड़ बनाकर बना कर रखा है।

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