ब्लॉक कोथावां में वोटर लिस्टों की बिक्री के नाम पर हो रही अवैध वसूली

भ्रष्टाचार : ब्लॉक मूरतगंज के ग्राम सरवाकाजी में जिम्मेदार अधिकारी ने 12 लाख की इंटरलाॅकिंग सड़क और नाली का कागजों पर बनायी, बिना कोई काम रूपये खाते से निकाले

मामला कौशाम्बी ब्लॉक मूरतगंज ग्राम सरवाकाजी का है।

जिला पंचायतराज अधिकारी और जिला विकास अधिकारी की भूमिका भी बड़ा जांच का विषय है ?

कौशाम्बी : ग्रामीण क्षेत्रों की विकास योजनाओं से जुड़े ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी का खेल भी बड़ा निराला है। मनमानी तैनाती पाकर मनमाना खेल जैसे विभाग का नियम ही बन गया है ।

ब्लॉक मूरतगंज ग्राम सभा भीखमपुर में तैनात ग्राम विकास अधिकारी मनमानी जगह पर तैनाती पाकर मनमानी तरीके से विकास कार्यों की रकम को खर्च दिखाकर ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी मालामाल हो रहे हैं। तैनाती पाने के लिए इन्हें भेंट भी चढ़ानी पड़ती है जिसे यह सहज ही स्वीकार कर लेते हैं।

ग्राम सभा सरवाकाजी माजरा भीखमपुर का देखने को मिला है जहाँ कैलाश मौर्य के घर से शंकर गुप्ता के घर तक नाली निर्माण और इंटरलॉकिंग सड़क का कार्य दिखा कर 12,00,000 लाख रुपए अप्रैल 2017 में पास हुआ है और रकम निकाल ली गई है । लेकिन अभी तक इसमें कोई कार्य नहीं हुआ है । ना तो मरम्मत हुई है ना ही इंटरलॉकिंग का कार्य हुआ है ।

ग्रामीणों का कहना है कि ये सड़क 30 वर्षों से ऐसे ही है, इसमें कोई कार्य नहीं हुआ है और कोई कार्य आता भी है तो ये लोग बंदरबाट कर लेते है। डेढ़ वर्षों से लगातार इस गांव के ग्रामीण ग्रामसभा सरवाकाजी की शिकायत कर कार्यवाही और सर्वे करने की मांग कर रहे हैं । लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी गाँव में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत की जांच गुणवत्तापूर्ण तरीके से नहीं हो सकी है ।

सरकार के नियमों के अनुसार एक विकासखंड में 6 वर्षों से अधिक किसी भी ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी की तैनाती नहीं की जा सकती है, लेकिन देखा यह जा रहा है कि विभिन्न विकास खंडों में इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारियों की मनमानी तैनाती की गई है। सूबे के मुख्यमंत्री के निर्देशों की धज्जियां उड़ा कर तैनाती देने के मामले में जिला पंचायतराज अधिकारी और जिला विकास अधिकारी की क्या मंशा है ? यह बड़ा जांच का विषय है ।

मनमानी तरीके से ग्राम पंचायतों में तैनाती पाने वाले यह ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों पर विभागीय अधिकारियों का अंकुश लगभग समाप्त हो चुका है। भेंट चढ़ाने के बाद मनमानी जगह पर तैनाती पाने वाले ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारियों के नकेल कसने का साहस विभागीय अधिकारी नहीं कर पाते हैं, जिसके चलते यह बेलगाम हो जाते हैं। शासन द्वारा भेजी गयी ग्राम पंचायतों में विकास की बड़ी रकम पर अपना एकाधिकार समझने लगते हैं और मनमानी कर इस रकम को खर्च कर अभिलेखो में अपनी गणित भिड़ा देते हैं । जिससे सरकार की योजनाओं का लाभ गरीब जनता तक नहीं पहुंच पाता है और योजनाओं के लाभ न मिलने से गरीब जनता रोज जिले के आला अधिकारी तक फरियाद लेकर पहुंच रही है। लेकिन जांच के नाम पर फिर इन्हें ग्राम विकास अधिकारियों ग्राम पंचायत अधिकारियों को शिकायती पत्र सौंप दिया जाता है, जिससे ग्राम पंचायत और ग्राम विकास अधिकारी मनमानी फर्जी रिपोर्ट लगाकर पीड़ित फरियादियों के प्रार्थना पत्रों को निस्तारित कर देते हैं । इसी हेराफेरी की आड़ में सरकारी रकम का आंकड़ों का खेल बीते कई सालों से खेला जा रहा है। 

ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारियों के आंकड़ों का खेल कब तक चलता रहेगा ? यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है ! नियम विरुद्ध तरीके से इन्हें तैनाती देने वाले जिला विकास अधिकारी और जिला पंचायतराज अधिकारी के कारनामों पर उच्च स्तरीय जांच कराई गई तो इनके भी कारनामे उजागर होंगे ।

क्या योगीराज में जिला पंचायतराज अधिकारी और जिला विकास अधिकारी के तमाम काले कारनामों पर शासन स्तर से निष्पक्ष जांच हो पाएगी यह कह पाना मुश्किल ही है ? इसको लेकर गांव के लोगों में आक्रोश साफ नजर आता है। मामला ब्लॉक मूरतगंज ग्राम सभा सरवाकाजी का है।

जिला ब्यूरो चीफ #IV24 न्यूज़ कौशाम्बी से मसुरिया दीन मौर्य की रिपोर्ट

url and counting visits