हरियावां में गोशाला के नाम पर हुई लूट पर नहीं हुई कार्यवाही, आखिर क्यों हाथ पर हाथ धरे बैठा है जिला प्रशासन ?

हरदोई- एक ओर जहां सूबे के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पूरे प्रदेश में गोवंश के संरक्षण के लिए गोशाला खोलने के आदेश हुए । इसी क्रम में गोशाला के लिए जमीनों की तलाश भी शुरु कर दी गई ।

पूर्व में जिले में जो गोशालायें संचालित थी उनकी हालत की किसी को कोई खबर ही नही रही । न ही इस बात की खबर ली गई कि कितने गोशाला संचालकों ने गोशाला के नाम पर मिल रहे धन की लूट खुलेआम अधिकारियों के साथ मिलकर की गयी । गौशाला के लिए मिलने वाले पैसे का बन्दर बाँट किया ऐसी ही एक गोशाला हरियावां गांव में भी खुली थी जिससे गांव वालों को उम्मीद थी कि आवारा गोवंश को उसमे रखा जाएगा । उनकी फसलों को नुकसान नहीं होगा । लेकिन दबंग संचालकों के आगे किसी की एक न चली और गोशाला सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह गई । गायों के रखरखाव के लिए समय समय पर अनुदान तो मिलता रहा लेकिन उस पैसे का उपयोग गोशाला संचालक अपने घर व्यापार और बैंक खातों को भरने में करते रहे जब इसकी शिकायत हुई तो कार्यवाही करते हुए उच्च अधिकारियों द्वारा गौशाला को मिलने वाली रकम पर रोक लगा दी गई । लेकिन गौशाला संचालकों ने अपने राजनीतिक रसूख का फायदा उठाते हुए मामले को रफा दफा करवा दिया और फिर लूट का खेल जारी हो गया निश्चित ही जिले के वर्तमान जिलाधिकारी पुलकित खरे का गायों के संरक्षण को लेकर एक सराहनीय कदम है और गोवंश के लिए एक नई मुहिम भी चला रखी है लेकिन ऐसे भ्रष्टाचारी गोशाला संचालकों के विरुद्ध कब कार्यवाही होगी इसकी अभी पुष्टि करना मुश्किल है।

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