भाई अपने देश भारत को तोड़ो नहीं जोड़ो : डॉ.एस.एन.सुब्बाराव

भारतवर्ष लाखों-लाख साल पुराना देश है। यहाँ अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। भाषा के आधार पर बने और बँटे देश और ज़्यादा बँटते चले गए। सत्तर वर्ष पहले तक हिंदुस्तान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा छोटा सा राष्ट्र पाकिस्तान भी केवल उर्दू भाषा और इस्लामिक देश की ज़िद के कारण एक नहीं रह सका और कुछ ही समय बाद उसके दो टुकड़े हो गए। विशालकाय भारत वर्ष अपनी बहुभाषी संस्कृति और सबको साथ लेकर चलने के कारण एक है और एक रहेगा। यह बात आज उज्जैन के अंकित ग्राम स्थित सेवाधाम में 93 वर्षीय महान गांधीवादी चिन्तक व विचारक तथा सत्याग्रह आन्दोलन के सक्रिय सिपाही डॉक्टर एस.एन.सुब्बाराव ने कही। वह एक सप्ताह से चल रहे अन्तरराष्ट्रीय युवा शिविर के समापन समारोह में बोल रहे थे।
भारत के 18 प्रान्तों एवं विभिन्न देशों से उज्जयिनी पहुँचे 400 युवक-युवतियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने 14/15 अगस्त 1947 की रात्रि के उन पलों को बड़े भावपूर्वक याद किया, जब भारतीय राजधानी दिल्ली के राष्ट्रपति भवन पर से ब्रिटिश सरकार के यूनियन जैक को उतारकर भारत का तिरंगा झंडा फहराया गया था। कुछ कुटिल चालों का शिकार हुए लोगों के कारण स्वाधीन भारत में भयंकर अशान्ति के उन क्षणों में महात्मा गांधी दिल्ली में नहीं थे। वह शान्ति स्थापना की अपील करते हुए पश्चिम बंगाल में अनशन पर थे और कृशकाय हो रहे थे । डॉ.सुब्बाराव ने बताया कि महात्मा गांधी भारत को हिंसामुक्त, भूखमुक्त, झूठमुक्त, नशामुक्त और भ्रष्टाचारमुक्त राष्ट्र बनाना चाहते थे। उन्होंने युवाओं से इस दिशा में काम करने का आह्वान किया और आग्रह किया कि हमारे युवा आदर्श नागरिक बनने का संकल्प लें।
गायत्रीमन्त्र के सामूहिक सहगान के बीच शुरू हुए समापन सत्र में हरियाणा के राज्यपाल प्रोफ़ेसर कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि इस देश को किसी राजा-महाराजा ने नहीं बनाया, बल्कि डॉक्टर सुब्बाराव जैसे मनीषियों और पावन हृदय वाले निस्पृह सन्तों ने बनाया और पोषित किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की पहचान अपनी संस्कृति से होती है। अपनी संस्कृति को विस्मृत किए जाने के कारण हमारा देश टूटा था। अखण्ड भारत के लिए आज बड़ी ज़रूरत है कि हम भारत की अपनी अमूल्य संस्कृति को न केवल अपनाएँ बल्कि उसकी जड़ों से अपने-आपको जोड़े रहें। राज्यपाल ने ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के केन्द्र सरकार के राष्ट्रीय संकल्प को सफल बनाने के लिए युवा शिविर जैसे आयोजनों को देश के हर प्रान्त में करने की सलाह दी। पाँच सौ से ज़्यादा दिव्यांगों एवं ज़रूरतमंदों को सेवाएँ दे रहे सेवाधाम आश्रम को उन्होंने ‘पवित्र सेवा तीर्थ’ की संज्ञा दी और इसके विस्तार के लिए इक्कीस लाख रूपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। वरिष्ठ पत्रकार एवं विदेश नीति के विशेषज्ञ श्री वेद प्रताप वैदिक ने स्वभाषा को प्रतिष्ठित करने का आंदोलन चलाने की ज़रूरत बतायी और युवाओं से न रिश्वत देने और न रिश्वत लेने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
विश्व जागृति मिशन के निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने कहा कि क्षुद्र महत्वाकांक्षाओं से अपने-आपको ऊपर उठाकर माँ भारती को एकता और अखण्डता के शिखर पर पहुँचाने और विश्व-मानवता के लिए काम करने वाला युवा ‘सच्चा स्वयंसेवक’ कहलाता है। उन्होंने कहा कि ऐसा लोकसेवक अपने लिए नहीं वरन् दूसरों के लिए जीता है। उन्होंने  विश्व जागृति मिशन द्वारा देवदूत (अनाथ) बच्चों की शिक्षा के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी भी इस अवसर पर दी। सेवाधाम के संस्थापक श्री सुधीर भाई गोयल ने राज्यपाल को आश्रम के सेवा कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कराया और यहाँ चलाए जा रहे सेवा कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला।  इस मौक़े पर अमर शहीद चन्द्र शेखर आज़ाद के कुटुम्बी पौत्र श्री अमित आज़ाद ‘तिवारी’ और स्वाधीनता संग्राम के इस प्रख्यात रणबाँकुरे के जीवन पर बनाए गए टीवी सीरियल ‘चन्द्र शेखर आज़ाद’ के निर्माता-निर्देशक श्री नितिन शुक्ल सहित कई गण्यमान व्यक्ति मौजूद रहे।
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