प्रभात शास्त्री का पुण्यतिथि-समारोह

प्रभात शास्त्री संस्कृत-हिन्दी-ग्रन्थों के मर्मज्ञ थे : विभूति मिश्र

‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ के संग्रहालय में संस्कृत और हिन्दीभाषाओं के उन्नयन में क्रान्तिकारिक योगदान करनेवाले, हिन्दी साहित्य सम्मेलन के पूर्व-प्रधानमन्त्री प्रभात शास्त्री की उन्नीसवीं पुण्यतिथि का आयोजन १ जनवरी, २०१९ ई० को किया गया।

वर्तमान प्रधानमन्त्री विभूति मिश्र ने कहा, ” आज शिक्षा और भाषा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। ग्रन्थलेखन और अनुवाद करने के लिए योग्य विशेषज्ञ नहीं मिलते। इस दृष्टि से वास्तव में प्रभात शास्त्री संस्कृत-हिन्दी-ग्रन्थों के मर्मज्ञ थे। दूसरी ओर, आज प्रत्येक स्तर पर हिन्दी की उपेक्षा की जा रही है। इस पर नियन्त्रण करने की आवश्यकता है। डॉ० केन्द्रीय विश्वविद्यालय, इलाहाबाद में हिन्दविभागाध्यक्ष डॉ० रामकिशोर शर्मा का मत था,”‘विरुद्धों के प्रति सामंजस्य प्रभात जी का स्वभाव था। शास्त्री जी सामान्य व्यक्ति नहीं थी; उनकी विद्वत्ता की कीर्ति यत्र-तत्र सर्वत्र व्याप्त थी।” भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने आक्रामक तेवर में कहा,”शास्त्री जी ने जो कार्य किये थे, उनकी बखान तो हम करते हैं; किन्तु वे जिस सारस्वत राह पर चले थे, उस राह को विचारक छोड़ चुके हैं। ऐसा क्यों? देशभर में जितनी भी संस्कृतपीठ हैं, उनके प्रति शासकीय दृष्टि अनुदार है। अब तो शिक्षणसंस्थानों में हिन्दी-विषय को वैकल्पिक रूप देकर शिक्षा-परिषदों ने अपनी गर्हित मनोवृत्ति का परिचय दिया है। इसके प्रति हमारे शिक्षक-वर्ग को कोई चिन्ता नहीं है।” श्रीरमानिवास पाण्डेय ने शास्त्री जी के व्यक्तित्व और कर्त्तृत्व पर प्रकाश डालते हुए उनकी साहित्यिक-भाषिक अवदान को रेखांकित किया। धनंजय चोपड़ा ने प्रभात शास्त्री से सम्बन्धित संस्मरण सुनाया।

इनके अतिरिक्त मीनूरानी दुबे, विवेक सत्यांशु, अंशुल आदिक ने विचार व्यक्त किये। श्यामकृष्ण पाण्डेय ने संचालन किया। इस अवसर पर लक्ष्मीनारायण पाण्डेय, डी० एन० सारस्वत, डॉ० पूर्णिमा मालवीय, कंचनलता, सन्तकुमार त्रिपाठी, आर० एस० वर्मा, रंजना त्रिपाठी आदि उपस्थित थे।

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