इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय के रैगिंग-विषयक निर्णय का स्वागत है

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

भाषाविद्-समीक्षक डॉ. पृथ्वीनाथ पाण्डेय

रैगिंग करनेवाले छात्रावासियों के विरुद्ध इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय की ‘त्वरित’ तत्परता का हम स्वागत करते हैं। ऐसे कृत्य करनेवालों को ऐसा दण्ड मिलना चाहिए कि उनका प्रवेश ‘देश के किसी भी शिक्षण-संस्थान’ में न हो पाये‌। पूर्वांचल से आये हुए विद्यार्थियों में से अधिकतर तो सँभल जाते है; परन्तु कुछ को प्रयागराज की बाहरी दुनिया की ऐसी हवा लगती है कि वे गुमराह हो जाते हैं और अपनी ‘हवाबाज़ी’ नये-नये छात्रावासियों पर इस तरह से प्रदर्शित करते हैं, मानो वे तथाकथित ‘डॉन’ हों। अब देश के समस्त शिक्षण-संस्थानों के प्रशासन और प्रबन्धन को चाहिए कि वे पढ़ाई करने के नाम पर आकर ‘अराजकता’ का वातावरण फैलानेवालों के पंख कतर दें। इस तरह से जब ‘गुण्डातत्त्वों’ की अशोभनीय गतिविधियों को विनष्ट करने के लिए ठोस उपक्रम आरम्भ होंगे तब कहीं जाकर अध्ययन-अध्यापन और पठन-पाठन का सारस्वतमय परिदृश्य प्रत्यक्ष होगा। दुष्कृत्य के दोषी विद्यार्थियों के माँ-बाप अथवा अभिभावकों को बुलाकर उनकी सन्तति के कुकृत्यों से अवगत कराकर उन्हें पुलिसतन्त्रों को सौंप देना होगा। इस विषय में इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय अथवा अन्य कोई भी शैक्षिक केन्द्र यदि शिथिलता बरतता है तो न्यायालय को स्वत: संज्ञान कर इस गम्भीर प्रकरण पर स्वतन्त्र जाँच कराने का दायित्व सँभालना होगा। ऐसा हो जाने पर इस देश में ‘रैगिंग-विशेषज्ञ’ का नामोनिशां मिट जायेगा।

स्मरणीय है कि ‘रैगिंग’ को एक जघन्य कृत्य मानते हुए देश के शीर्षस्थ न्यायालय ने इसके विरुद्ध गम्भीर दण्ड का प्रविधान किया है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १४ अगस्त, २०१९ ईसवी)

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