जे० एन० यू० के विद्यार्थियों के प्रतिनिधिमण्डल के साथ वार्त्ता की जाये

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

बेशक, मैं जे० एन० यू० के विद्यार्थियों की अपनी माँगों के समर्थन में किये जानेवाले आन्दोलन का पक्षधर हूँ; परन्तु उनके आन्दोलन से यदि जनसामान्य को कोई कठिनाई और कष्ट होता हो तो उसका समर्थन मैं नहीं करता। जे०एन०यू०-प्रशासन ने विभिन्न मदों में दसगुणा तक शुल्क में वृद्धि करायी है, जो कि शोचनीय है। इस विषय पर जे०एन०यू०-प्रशासन के अधिकारियों को सहानुभूतिपूर्वक पहल करनी चाहिए।

दिल्ली के पुलिस-प्रशासन को भी उक्त प्रकरण में सहृदयता का प्रदर्शन करना होगा। पुलिस-प्रशासन की ओर से आन्दोलनकारियों पर अनावश्यक रूप में ‘लाठी-चार्ज’ का आदेश करने से बचना होगा; क्योंकि यदि गम्भीरतापूर्वक हमारे विद्यार्थियों की माँगों पर विचार नहीं किया गया तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि वह आन्दोलन ‘देशव्यापी’ हो जाये। केन्द्र-सरकार जिस तरह से जे० एन० यू० के विद्यार्थियों के साथ विगत पाँच वर्षों से सौतेला व्यवहार करती आ रही है, उसे अपने स्वभाव में बदलाव लाना होगा, अन्यथा यदि ‘क्रान्ति की आग’ भभक गयी तो नियन्त्रण करना सम्भव नहीं होगा।

यह लोकतन्त्र है; सिर्फ़ राजनेताओं को धरना-प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं है, बल्कि जन-जन को आत्माभिव्यक्ति का अधिकार है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १८ नवम्बर, २०१९ ईसवी)

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