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1971 के युद्ध और बांग्लादेश की आजादी में भारतीय सेना की भूमिका पर विस्तृत चर्चा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को राजधानी दिल्ली स्थित बांग्लादेश के उच्चायोग पहुंचकर बांग्लादेश के आर्म्ड फोर्सेस डे में शामिल हुए। इस दौरान खुद राजनाथ सिंह ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त के साथ मिलकर केक काटा। इस बारे में बांग्लादेश स्थित भारतीय दूतावास ने ट्वीट कर जानकारी दी है।

कार्यक्रम में सीडीएस जनरल बिपिन रावत, थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे और डीआईए चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल के. जे. एस. ढिल्लन भी रहे मौजूद।

अपने ट्वीट में दूतावास ने कहा साझा बलिदान में स्थापित दोस्ती। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज बांग्लादेश उच्चायोग, दिल्ली में मुख्य अतिथि के रूप में बांग्लादेश सशस्त्र सेना दिवस के ध्वज में भाग लिया। उन्होंने बांग्लादेश आर्म्ड फोर्सेस डे की 50वीं वर्षगांठ पर बधाई दी और 1971 के मुक्ति संग्राम के नायकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

जानकारी के मुताबिक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ के साथ सीडीएस जनरल बिपिन रावत, थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे और डीआईए चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल के. जे. एस. ढिल्लन भी मौजूद रहे। इस दौरान रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील रहा है। ऐसे में भारत भी अपने पड़ोसी देशों से ऐसे ही व्यवहार की अपेक्षा करता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि हथियार खरीदने के लिए भारत ने बांग्लादेश को 500 मिलियन यूएस डॉलर की क्रेडिट-लाइन भी दी है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में करीब 10 बिलियन यूएस डॉलर के विकास कार्यों के भारत की भागीदारी है।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि 1971 के युद्ध और बांग्लादेश की आजादी में भारतीय सेना की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कि 1971 में भारत गरीबी से जूझ रहा था इसके बावजूद भारत ने मुक्ति-वाहिनी के साथ मिलकर पाकि‌स्तान से 13 दिनों तक युद्ध लड़ा और बांग्लादेश (उस‌ वक्त पूर्वी पाकिस्तान) को पाकि‌‌स्तान के अत्याचार से मुक्त किया।

(रिपोर्ट: शाश्वत तिवारी)